Rinmukteshwar Mahadev Temple: आमतौर पर मंदिरों में सोने, चांदी या कीमती आभूषण चढ़ाने की परंपरा होती है। लेकिन क्या आप एक ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में जानते हैं, जहाँ कोई बहुमूल्य धातु नहीं, बल्कि चने की दाल चढ़ाई जाती है? सदियों से चली आ रही इस अनोखी परंपरा के पीछे एक बेहद खास धार्मिक मान्यता जुड़ी है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि यह रहस्यमयी मंदिर कहाँ है और यहाँ दाल चढ़ाने की क्या मान्यता है।
Rinmukteshwar Mahadev Temple में चढ़ाते है दाल
दरअसल पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ओंकारेश्वर में स्थित ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर (Rinmukteshwar Mahadev Temple) में भगवान शिव को बेलपत्र की जगह मुख्य रूप से चने की दाल अर्पित की जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों को हर प्रकार के कर्ज से मुक्ति मिलती है और आर्थिक समृद्धि आती है।
यह मंदिर पवित्र नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। श्रद्धालु पहले नदी में पवित्र स्नान करते हैं और फिर मंदिर में प्रवेश करते हैं। यहाँ शिवलिंग पर जल और दूध के साथ विशेष रूप से पीली चने की दाल चढ़ाई जाती है। मान्यता के अनुसार, कई श्रद्धालु यहाँ सवा पाव (250 ग्राम) से लेकर सवा मन (लगभग 50 किलो) तक चने की दाल अर्पित करते हैं।
महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास
बता दें कि इस मंदिर में सोमवार, शिवरात्रि और सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, इस दरबार का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। अज्ञातवास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को उनके ऋणों और दुखों से मुक्ति दिलाने के लिए इस स्थान पर ऋणमुक्तेश्वर महादेव की स्थापना करवाई थी।
जब पांडवों का अज्ञातवास समाप्त हुआ, तब उन्होंने कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए यहाँ ‘सवाया सोना’ अर्पित किया था। उसी प्राचीन परंपरा के प्रतीक के रूप में आज के समय में श्रद्धालु यहाँ सोने के समान पीली दिखने वाली चने की दाल चढ़ाते हैं।
अनोखी परंपरा के लिए आस्था का केंद्र
ओंकारेश्वर का ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर अपनी इस अनोखी परंपरा के कारण भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है। महाभारत काल से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जहाँ चने की दाल चढ़ाने मात्र से भक्तों को सांसारिक और आर्थिक ऋणों से मुक्ति मिल जाती है। यह पावन धाम न केवल जीवन की चिंताओं को दूर कर मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि सच्चे भाव से मांगी गई हर मन्नत को भी पूरा करता है। यही कारण है कि यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु महादेव की इस अद्भुत महिमा का मुरीद हो जाता है।
































