RBI Property Rules: अगर आपने बैंक से लिया गया लोन नहीं चुकाया और बैंक ने आपकी गिरवी रखी संपत्ति जब्त कर ली, तो अब उसे दोबारा अपने नाम करवाना आसान नहीं होगा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस संबंध में सख्त नियम जारी करते हुए साफ कर दिया है कि कोई भी लोन डिफॉल्टर अपनी जब्त की गई संपत्ति को सार्वजनिक नीलामी के जरिए दोबारा नहीं खरीद सकेगा। इतना ही नहीं, डिफॉल्टर के रिश्तेदार, करीबी सहयोगी या कारोबारी साझेदार भी ऐसी संपत्ति की नीलामी में हिस्सा लेकर उसे अपने नाम नहीं कर सकेंगे।
आरबीआई का मानना है कि इस कदम से जानबूझकर लोन नहीं चुकाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
किन संपत्तियों पर लागू होगा नया नियम? RBI Property Rules
आरबीआई के नए निर्देश उन सभी अचल संपत्तियों पर लागू होंगे, जिन्हें बैंक कर्ज वसूली के लिए जब्त करते हैं। इसमें गिरवी रखी गई जमीन, मकान, दुकान और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं। आमतौर पर जब कोई कर्जदार तय समय तक अपना लोन नहीं चुका पाता, तो बैंक कानूनी प्रक्रिया के तहत उसकी गिरवी रखी संपत्ति को अपने कब्जे में लेकर सार्वजनिक नीलामी के जरिए बेचता है। इस बिक्री से मिलने वाली राशि से बैंक अपने बकाया कर्ज की वसूली करता है।
अब नीलामी में नहीं मिलेगी डिफॉल्टर को एंट्री
अब तक कुछ मामलों में यह आशंका जताई जाती रही कि डिफॉल्टर सीधे या अपने रिश्तेदारों और सहयोगियों के जरिए नीलामी में हिस्सा लेकर उसी संपत्ति को कम कीमत पर दोबारा खरीद लेते थे। इससे वे एक तरफ लोन नहीं चुकाते थे और दूसरी तरफ संपत्ति भी फिर से अपने नियंत्रण में ले आते थे। इसी संभावना को खत्म करने के लिए आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि डिफॉल्टर, उसके रिश्तेदार, साझेदार या उससे जुड़े व्यक्ति नीलामी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे।
केंद्रीय बैंक का कहना है कि यदि ऐसी छूट दी जाए तो कुछ लोग जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाएंगे और बाद में कम कीमत पर वही संपत्ति खरीदने की कोशिश करेंगे। इससे बैंकिंग व्यवस्था में नैतिक जोखिम (Moral Hazard) बढ़ेगा और ईमानदारी से लोन चुकाने वालों के साथ भी अन्याय होगा।
मई में आया था ड्राफ्ट, अब नियम हुए अंतिम
इस साल मई में आरबीआई ने इस संबंध में ड्राफ्ट नियम जारी किए थे। उस दौरान कुछ सुझाव आए थे कि डिफॉल्टरों को भी नीलामी में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए। हालांकि आरबीआई ने इन सुझावों को स्वीकार नहीं किया। केंद्रीय बैंक का कहना है कि ऐसा करने से नियमों का दुरुपयोग हो सकता है और जानबूझकर लोन डिफॉल्ट करने वालों को फायदा मिलेगा। इसलिए अंतिम नियमों में इस तरह की किसी भी संभावना पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
बैंक भी लंबे समय तक नहीं रख सकेंगे जब्त संपत्ति
आरबीआई ने सिर्फ डिफॉल्टरों पर ही सख्ती नहीं दिखाई है, बल्कि बैंकों के लिए भी स्पष्ट समयसीमा तय की है। नए नियमों के मुताबिक, बैंक जब्त की गई संपत्तियों को अनिश्चित समय तक अपने पास नहीं रख सकते। प्रत्येक बैंक को अपने बोर्ड द्वारा तय नीति के अनुसार निश्चित अवधि के भीतर इन संपत्तियों की बिक्री करनी होगी। यह अवधि अधिकतम सात वर्ष तक ही हो सकती है। आरबीआई ने कहा है कि ऐसी संपत्तियों की बिक्री जल्द से जल्द सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
क्या होगा इस फैसले का असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम बैंकिंग व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम कदम है। इससे उन मामलों पर रोक लगेगी, जहां कुछ लोग जानबूझकर लोन नहीं चुकाते थे और बाद में कम कीमत पर अपनी ही संपत्ति दोबारा हासिल करने की कोशिश करते थे। इसके अलावा यह फैसला बैंक अधिकारियों और डिफॉल्टरों के बीच संभावित सांठगांठ की आशंकाओं को भी कम करेगा। पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया से वास्तविक खरीदारों को समान अवसर मिलेगा और बैंकों को भी अपनी बकाया राशि की बेहतर वसूली करने में मदद मिलेगी।





























