US-Israel Relations: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल के रिश्ते एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल के सैन्य घटनाक्रम और ईरान को लेकर बदलते समीकरणों के बीच ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की जल्द व्हाइट हाउस में मुलाकात हो सकती है। माना जा रहा है कि यदि यह बैठक होती है तो इसमें ईरान, गाजा, लेबनान और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
हाल के दिनों में इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे मध्य पूर्व का माहौल काफी संवेदनशील बना हुआ है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब अमेरिका क्षेत्र में तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है, जबकि इजरायल की सुरक्षा प्राथमिकताएं कुछ मामलों में अलग दिखाई दे रही हैं। हालांकि, इन आकलनों पर दोनों सरकारों की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
ट्रंप ने क्या कहा? US-Israel Relations
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Axios से बातचीत में बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उनसे मुलाकात की इच्छा जताई है। ट्रंप के मुताबिक यह बैठक नाटो शिखर सम्मेलन के बाद अगले सप्ताह या उसके अगले सप्ताह हो सकती है। उन्होंने कहा कि उनके और नेतन्याहू के व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि “बॉस कौन है।” ट्रंप का यह बयान भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
नेतन्याहू कार्यालय ने भी की पुष्टि
इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी पुष्टि की है कि नेतन्याहू ने अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ट्रंप को फोन कर शुभकामनाएं दी थीं। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने जल्द अमेरिका में मुलाकात करने पर सहमति जताई। नेतन्याहू ने अमेरिका को वैश्विक स्वतंत्रता का प्रमुख संरक्षक बताते हुए दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को बेहद महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच कुछ नीतिगत मुद्दों पर मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं।
किन मुद्दों पर हैं मतभेद?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में ईरान के साथ संघर्षविराम को आगे बढ़ाने और परमाणु वार्ता शुरू करने से जुड़े प्रयासों का समर्थन किया था। इसके अलावा ट्रंप ने कथित तौर पर नेतन्याहू से लेबनान में सैन्य कार्रवाई सीमित रखने और दक्षिणी लेबनान से चरणबद्ध वापसी के प्रस्ताव पर आगे बढ़ने का आग्रह भी किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन मुद्दों पर इजरायल पूरी तरह सहमत नहीं दिखा। यही वजह है कि विश्लेषक दोनों नेताओं की संभावित बैठक को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
ईरान पर ट्रंप का बयान
इस बीच ट्रंप ने ईरान को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार ईरान अमेरिका के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के कारण दोनों पक्षों के बीच वार्ता में लगभग एक सप्ताह का विराम आया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान दोनों पक्षों के बीच किसी प्रकार का हमला नहीं होगा। साथ ही ट्रंप ने अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी की उम्मीद नहीं थी।
दुनिया की नजर संभावित बैठक पर
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात होती है, तो उसका असर केवल अमेरिका और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान, गाजा, लेबनान और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी इसके परिणाम दिखाई दे सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों की ओर से संभावित बैठक की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में इस मुलाकात को क्षेत्रीय तनाव कम करने और भविष्य की रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
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