Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद और आसपास के जिलों की पाँच बड़ी और धमाकेदार ख़बरों में जुर्म, घूसखोरी, ठगी से लेकर आम जनता को बड़ी राहत देने वाली कई बड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में हैं। पहली बड़ी ख़बर मुरादनगर से है, जहाँ 9 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात से हड़कंप मच गया है, आरोपी परिवार समेत फरार है। दूसरी सनसनीखेज ख़बर इंदिरापुरम से, जहाँ ठगों ने इंसानियत को शर्मसार करते हुए एक कैंसर पीड़ित व्यक्ति से बिजनेस के नाम पर करीब 32 लाख रुपये की बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।
तीसरी बड़ी ख़बर सरकारी महकमे में मचे हड़कंप की है, जहाँ 100 करोड़ के घोटाले की जांच कर रहे एक आवास विकास अधिकारी खुद 50 लाख की घूस लेते कैमरे में कैद हो गए, जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। चौथी महत्वपूर्ण ख़बर परिवहन विभाग से है। अब RTO का अधिकार खत्म हो गया है और गाड़ियों की फिटनेस जांच पूरी तरह मशीनों से होगी, जिसने हापुड़ और बुलंदशहर के गाड़ी मालिकों की टेंशन बढ़ा दी है।
और पाँचवीं सबसे बड़ी राहत भरी ख़बर सड़क हादसे के पीड़ितों के लिए है, जहाँ अब सिर्फ ‘112’ पर एक कॉल करते ही गाजियाबाद के 18 बड़े प्राइवेट अस्पतालों में 7 दिनों तक बिल्कुल मुफ्त इलाज मिलेगा। तो चलिए इस लेख के जरिए इन पाँचों ख़बरों को विस्तार से जानते हैं।
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9 साल की मासूम से दुष्कर्म
गाजियाबाद की पहली खबर मुरादनगर थाना क्षेत्र से जहां एक गांव में दूसरे समुदाय के युवक पर नौ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म करने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। घटना की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है।
बता दें कि गाजियाबाद जिले के अंतर्गत आने वाला मुरादनगर थाना क्षेत्र का एक गांव में पीड़ित परिवार द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत (तहरीर) के अनुसार, गांव का ही दूसरे समुदाय का एक युवक उनकी 9 साल की मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। आरोप है कि वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही जब पीड़ित परिजन बच्ची को लेकर पुलिस के पास पहुंचे, तो इसका पता चलते ही आरोपी और उसके परिवार के लोग गिरफ्तारी के डर से गांव छोड़कर फरार हो गए हैं। पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज कर लिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित बच्ची को तुरंत मेडिकल जांच के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया है। फरार आरोपी और उसके परिजनों को दबोचने के लिए पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
कैंसर पीड़ित व्यक्ति से लाखों की ठगी (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद से दूसरी बड़ी खबर इंदिरापुरम थाना क्षेत्र से है, जहां ठगों ने एक कैंसर पीड़ित व्यक्ति को अपना शिकार बनाया है। बिजनेस में निवेश और भारी मुनाफे का झांसा देकर पीड़ित से 31 लाख 66 हजार रुपये की धोखाधड़ी का बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। इस संबंध में पीड़ित की पत्नी की शिकायत पर इंदिरापुरम पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
धोखाधड़ी के शिकार पीड़ित विजय कुमार कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और वसुंधरा सेक्टर-13 के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी रेखा जायसवाल ने ‘जायजअप बेवरेजेस एलएलपी’ नाम की कंपनी की सीईओ गुंजन पोद्दार, श्रद्धा पोद्दार और नुपुर पोद्दार के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है।
आरोप है कि इन लोगों ने अपनी फर्म में निवेश करने पर तीन महीने में 20 फीसदी मुनाफे का झांसा दिया था। एडवांस के नाम पर पहले 5 लाख रुपये लिए गए और बाद में पीड़ित परिवार को कोई रकम या मुनाफा देने के बजाय, आरोपियों ने खुद ही सारा लाभ हड़प लिया और कुल 31.66 लाख की चपत लगा दी। पुलिस अब आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
आवास अधिकारी के रिश्वत लेने का वीडियो वायरल (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद से तीसरी बड़ी खबर भी इंदिरापुरम से ही है, जहां आवास विकास कार्यालय में तैनात एक सहकारी आवास अधिकारी का 50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस मामले में शासन स्तर से बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है और इंदिरापुरम थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
घूसकांड के आरोपी का नाम सतीश कुमार है, जो गाजियाबाद आवास विकास परिषद कार्यालय में सहकारी आवास अधिकारी के पद पर तैनात थे। यह पूरा मामला वेव सिटी की ‘संचार नेस्ट सहकारी समिति’ में हुए करीब 100 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले की जांच से जुड़ा है। आरोप है कि जांच अधिकारी सतीश कुमार ने कार्रवाई रोकने और सोसायटी की सीलिंग हटाने के एवज में 50 लाख रुपये की मोटी रकम की मांग की थी, जिसका रिश्वत लेते समय वीडियो बना लिया गया।
यह वीडियो जैसे ही लखनऊ मुख्यालय पहुंचा, उच्चाधिकारियों ने आरोपी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। सहायक आवास आयुक्त की तहरीर पर इंदिरापुरम थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि, आरोपी सतीश कुमार ने खुद को निर्दोष बताते हुए दावा किया है कि यह वीडियो एआई-एडिटेड यानी डीपफेक है। इंदिरापुरम पुलिस के अनुसार, वायरल वीडियो और आवाज की सत्यता जांचने के लिए इसे फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मशीनें करेंगी वाहनों की फिटनेस जांच (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद से चौथी खबर हापुड़ और बुलंदशहर के वाहन मालिकों के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण है। अब वाहनों की फिटनेस जांच मानवीय दखल के बिना, पूरी तरह ऑटोमेटेड (मशीनीकृत) टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के जरिए की जाएगी, जिससे RTO (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) के अधिकारियों का सीधा अधिकार खत्म हो गया है।
इस व्यवस्था के लागू होने से उन वाहन स्वामियों की मुसीबतें बढ़ गई हैं जिनके वाहनों में किसी भी तरह की कमी या डेंट-पेंट की समस्या है। अब व्यावसायिक और अन्य वाहनों की फिटनेस जांच RTO दफ्तर में मैन्युअल तरीके से नहीं होगी। इसके लिए पूरी तरह से आधुनिक मशीनों से लैस ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) अनिवार्य कर दिए गए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने या न करने का फैसला RTO इंस्पेक्टर नहीं, बल्कि कंप्यूटर और मशीनें करेंगी। मशीनी जांच में पास होने पर ही ऑनलाइन सर्टिफिकेट जारी होगा।
हापुड़ और बुलंदशहर के वाहन स्वामियों के लिए परेशानी इसलिए बढ़ गई है क्योंकि मशीनी जांच बेहद सख्त होती है। गाड़ी में छोटा सा डेंट, स्क्रैच, लाइट का खराब होना, या मानकों से थोड़ा सा भी भटकाव होने पर मशीन तुरंत वाहन को ‘फेल’ कर देती है। एक बार गाड़ी फेल होने पर वाहन मालिक को दोबारा फीस भरनी होगी और कमियों को ठीक कराकर फिर से टेस्ट देना होगा। इससे समय और पैसे दोनों का नुकसान बढ़ गया है।
सड़क हादसे के पीड़ितों के लिए राहत भरी खबर (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद से पांचवीं और सबसे बड़ी राहत भरी खबर सड़क हादसे के पीड़ितों के लिए है। अब जिले में किसी भी सड़क दुर्घटना के बाद इलाज के खर्च की चिंता में किसी मासूम की जान नहीं जाएगी। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार की ‘पीएम-राहत योजना’ के तहत सड़क हादसों में घायल लोगों को अब 112 नंबर पर सिर्फ एक कॉल करने पर तुरंत एम्बुलेंस सुविधा मिलेगी और नजदीकी 18 निजी अस्पतालों में 7 दिनों तक बिल्कुल मुफ्त यानी कैशलेस इलाज मुहैया कराया जाएगा।
इस योजना से जुड़े सभी 18 प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों और स्टाफ को सीएमओ कार्यालय में ट्रेनिंग दे दी गई है। हादसे के समय ‘गोल्डन ऑवर’ यानी पहले महत्वपूर्ण घंटे में मरीज की जान बचाने के लिए अधिकतम 7 दिनों तक या डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज पूरी तरह मुफ्त मिलेगा। सूचना मिलते ही मरीज को बिना किसी कागजी देरी या एडवांस पेमेंट के सीधे चयनित अस्पताल ले जाया जाएगा।
हिन्दुस्तान समाचार के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि कोई भी अस्पताल हादसे के मरीज को भर्ती करने से मना नहीं कर सकता। हर केस का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, जिसकी समीक्षा खुद सीएमओ करेंगे। गाजियाबाद के इन 18 अस्पतालों में पोद्दार नर्सिंग होम, निवोक सुपरस्पेशिलिटी, शांति गोपाल, मेधा, एमएस, क्योरोमेक्स, कमल, गुप्ता और वरदान हॉस्पिटल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।






























