Modi 3.0 Cabinet Expansion: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल यानी मोदी 3.0 के पहले मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि विस्तार की रूपरेखा लगभग तैयार हो चुकी है और अब सिर्फ सही समय का इंतजार है। कौन नया मंत्री बनेगा, किन नेताओं की जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, किसका विभाग बदलेगा और किन मंत्रियों की विदाई हो सकती है, इसे लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार के संभावित फेरबदल में महिलाओं, पिछड़ा वर्ग (OBC) और युवाओं को प्राथमिकता मिल सकती है। साथ ही अगले साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उन्हें ध्यान में रखकर भी मंत्रिमंडल की नई तस्वीर तैयार की जा रही है।
कब हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार? Modi 3.0 Cabinet Expansion
राजनीतिक कार्यक्रमों पर नजर डालें तो फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम काफी व्यस्त है। 30 जून और 1 जुलाई को राष्ट्रपति आंध्र प्रदेश के दौरे पर रहेंगी। वहीं 1 से 3 जुलाई तक जापान के प्रधानमंत्री भारत दौरे पर रहेंगे। इसके बाद 4 जुलाई को प्रधानमंत्री राजस्थान जाएंगे। 5 जुलाई को कार्यक्रम अपेक्षाकृत खाली बताया जा रहा है, इसलिए इस तारीख को लेकर भी चर्चाएं हैं। दूसरी ओर 6 जुलाई से प्रधानमंत्री इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर रवाना होंगे और 11 जुलाई तक विदेश यात्रा पर रहेंगे। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि या तो 5 जुलाई को या फिर 11 जुलाई के बाद कभी भी मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है।
क्या मानसून सत्र से पहले होगा बड़ा फैसला?
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। ऐसे में 11 से 20 जुलाई के बीच कैबिनेट विस्तार की संभावना भी जताई जा रही है। इससे पहले भी ऐसा हो चुका है। साल 2021 में संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले 7 जुलाई को बड़े स्तर पर मंत्रिमंडल विस्तार किया गया था, जिसमें कई वरिष्ठ मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका मिला था।
इसी वजह से माना जा रहा है कि इस बार भी संसद सत्र से पहले सरकार बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है।
किन मंत्रियों की जिम्मेदारियों में हो सकता है बदलाव?
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ ऐसे मंत्री हैं जिनके पास एक से अधिक विभाग हैं। संभावना है कि उनके विभागों का बंटवारा किया जाए। वहीं कुछ नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत के तहत उनके मंत्री पद छोड़ने की चर्चा है ताकि वह 2027 के विधानसभा चुनाव पर पूरा ध्यान दे सकें।
रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो चुका है और उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका दी जा सकती है। इसी तरह हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके मंत्री पद छोड़ने की अटकलें हैं। वहीं अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद एक पद पहले से ही खाली माना जा रहा है।
महिलाओं और OBC पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक संतुलन सबसे अहम आधार हो सकता है। महिलाओं और पिछड़ा वर्ग को अधिक प्रतिनिधित्व देने पर विशेष ध्यान दिए जाने की चर्चा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में भी बड़ी संख्या में OBC, एससी-एसटी और महिला नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई थीं। माना जा रहा है कि इसी तरह का फॉर्मूला केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी देखने को मिल सकता है।
चुनावी राज्यों का भी रखा जाएगा ध्यान
अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात समेत सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन राज्यों के जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नए मंत्रियों का चयन किया जा सकता है।
इसके अलावा ऐसी भी चर्चा है कि 75 वर्ष की आयु के करीब पहुंच चुके कुछ नेताओं को संगठन या सरकार में नई भूमिका दी जा सकती है, ताकि नए चेहरों को अवसर मिले।






























