US Canada Conflicts: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक बार फिर कनाडा को “अमेरिका का 51वां राज्य” कहे जाने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि इस बार कनाडा सरकार ने बेहद संयमित रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह हर सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने के मूड में नहीं है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मंगलवार को इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि उनकी सरकार ट्रंप की हर टिप्पणी को गंभीर राजनीतिक प्रतिक्रिया का आधार नहीं बनाएगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर अहम बातचीत चल रही है।
ट्रंप की पोस्ट से शुरू हुआ नया विवाद| US Canada Conflicts
विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कनाडा की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक खबर साझा की। यह रिपोर्ट कनाडा के हालिया GDP आंकड़ों और तकनीकी मंदी की आशंकाओं पर आधारित थी। इसी पोस्ट के साथ ट्रंप ने एक बार फिर कनाडा को “अमेरिका का 51वां राज्य” बता दिया। यह पहली बार नहीं है पिछले कई महीनों से ट्रंप समय-समय पर इसी तरह की टिप्पणी करते रहे हैं, जिन पर कनाडा में पहले भी नाराजगी जताई जाती रही है।
अमेरिकी राजदूत की पोस्ट से भी बढ़ा तनाव
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब कनाडा में अमेरिकी राजदूत Pete Hoekstra ने ट्रंप की पोस्ट का स्क्रीनशॉट अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर साझा कर दिया। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या कनाडा सरकार इस पर राजनयिक स्तर पर कोई कदम उठाएगी।
PM मार्क कार्नी का सधा हुआ जवाब
क्यूबेक के लोंग्यूइल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पीएम कार्नी से पूछा गया कि क्या सरकार अमेरिकी राजदूत के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी या उन्हें देश छोड़ने के लिए कहा जा सकता है, तो उन्होंने स्पष्ट “नहीं” में जवाब दिया।
कार्नी ने कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच रिश्ते बेहद व्यापक और महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिका हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में हमारे गहरे संबंध हैं। हमें मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के साथ काम करना होगा।” उन्होंने आगे कहा, “यह एक ऐसा प्रशासन है जिसके साथ हमें काम करना है। हम प्रशासन को उसके स्वरूप में स्वीकार करते हैं।”
सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया नहीं देने की रणनीति
ट्रंप की लगातार टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कार्नी ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और हाल के महीनों में उनकी पोस्टिंग बढ़ी है। उन्होंने साफ कहा, “हम उनके हर पोस्ट पर प्रतिक्रिया या जवाब नहीं देंगे।” राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बयान कनाडा की उस रणनीति को दिखाता है जिसमें वह अनावश्यक विवादों से दूरी बनाकर कूटनीतिक स्थिरता बनाए रखना चाहता है।
विपक्ष ने भी बताया “हास्यास्पद”
कनाडा की विपक्षी पार्टी के नेता Pierre Poilievre ने ट्रंप के बयान को पूरी तरह “हास्यास्पद” करार दिया। उन्होंने कहा कि कनाडा कभी भी अमेरिका का 51वां राज्य नहीं बन सकता और इस तरह की टिप्पणियां वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने वाली हैं। पोइलिव्रे ने कहा कि देश को फिलहाल महंगाई, खाद्य सुरक्षा और जीवन-यापन की बढ़ती लागत जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि ऐसे बयानों पर।
अमेरिकी राजदूत पर विवाद और याचिका
दूसरी ओर, अमेरिकी राजदूत Pete Hoekstra पहले भी ट्रंप के इस तरह के बयानों को लेकर उठी चिंताओं को कमतर बताते रहे हैं। उनका कहना है कि लोग इन टिप्पणियों को जरूरत से ज्यादा गंभीरता से लेते हैं और दोनों देशों को सहयोग पर ध्यान देना चाहिए।
हालांकि कनाडा में हर कोई इस राय से सहमत नहीं है। देश की संसद में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें सरकार से राजदूत को निष्कासित करने पर विचार करने की मांग की गई है। फरवरी में दायर इस याचिका पर अब तक 14,600 से अधिक हस्ताक्षर हो चुके हैं।
व्यापार वार्ता के बीच बढ़ा राजनीतिक तनाव
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर अहम बातचीत चल रही है। कनाडा के व्यापार मंत्री Dominic LeBlanc वाशिंगटन पहुंचे हैं, जहां उनकी मुलाकात अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer से प्रस्तावित है।
बातचीत का मुख्य फोकस CUSMA (Canada-United States-Mexico Agreement) की समीक्षा और उसके भविष्य पर है। कनाडा ने अमेरिका और मैक्सिको से इस समझौते को अगले 16 सालों के लिए नवीनीकृत करने का आग्रह भी किया है। तीनों देश 1 जुलाई की समयसीमा से पहले इस व्यापार समझौते की समीक्षा प्रक्रिया को पूरा करने में जुटे हुए हैं।
कूटनीति बनाम बयानबाज़ी
जब पीएम कार्नी से पूछा गया कि क्या ट्रंप की “51वें राज्य” वाली टिप्पणी व्यापार वार्ता को प्रभावित करेगी, तो उन्होंने इसे सीधे तौर पर नकार दिया। उनका कहना था कि उनकी सरकार सोशल मीडिया की बयानबाज़ी और वास्तविक कूटनीतिक बातचीत को अलग नजरिए से देखती है।































