Mamata Banerjee TMC rebellion: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2026 के बाद से राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार बदलता नजर आ रहा है और अब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर ही असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने नेतृत्व के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। इस घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और राजनीतिक गलियारों में टीएमसी में संभावित टूट की चर्चा तेज हो गई है।
60 विधायकों के समर्थन का दावा, विधानसभा में बढ़ीं अटकलें| Mamata Banerjee TMC rebellion
सूत्रों के मुताबिक, उलुबेरिया ईस्ट के विधायक रहे ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि टीएमसी के करीब 60 विधायक उनके समर्थन में हैं। पार्टी के कुल 80 विधायकों में से इतनी बड़ी संख्या का समर्थन मिलने का दावा राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, अब तक इन विधायकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
बुधवार को ऋतब्रत बनर्जी के विधानसभा पहुंचने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया। बताया जा रहा है कि उनके समर्थन में टीएमसी के करीब 20 विधायक भी विधानसभा पहुंचे हैं। इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह दावा सही साबित होता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
1 जून को पार्टी ने की थी बड़ी कार्रवाई
दरअसल, 1 जून को टीएमसी नेतृत्व ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए ऋतब्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी की ओर से कहा गया था कि दोनों नेता लगातार संगठन के निर्देशों की अनदेखी कर रहे थे और ऐसी गतिविधियों में शामिल थे, जिनसे पार्टी के हित प्रभावित हो रहे थे।
कार्रवाई के तहत दोनों नेताओं से पार्टी के सभी पद और जिम्मेदारियां भी तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई थीं। यह फैसला सामने आते ही बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई थी।
‘शिंदे मॉडल’ से हो रही तुलना
राजनीतिक गलियारों में मौजूदा घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में हुए चर्चित ‘शिंदे मॉडल’ से की जा रही है। जिस तरह महाराष्ट्र में पार्टी के भीतर बगावत ने सत्ता और संगठन दोनों की तस्वीर बदल दी थी, उसी तरह के कयास अब पश्चिम बंगाल को लेकर लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि बागी गुट की ओर से ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में पेश करने की तैयारी की जा रही है। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि बागी खेमा अपने राजनीतिक अस्तित्व को अलग पहचान देने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
नकली सिग्नेचर विवाद के बाद बढ़ा टकराव
ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा का नाम कथित ‘नकली सिग्नेचर’ विवाद से भी जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस विवाद के सामने आने के बाद ही पार्टी नेतृत्व ने दोनों नेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। हालांकि, निष्कासन के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया के सामने खुलकर कोई बयान नहीं दिया है। इसके बावजूद विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी की नाटकीय मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि वे राजनीतिक लड़ाई से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
बंगाल की राजनीति पर सबकी नजर
फिलहाल टीएमसी के भीतर चल रही इस खींचतान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। बागी विधायकों की वास्तविक संख्या क्या है और यह असंतोष कितना बड़ा रूप लेता है, इस पर आने वाले दिनों में सबकी नजर रहेगी। लेकिन इतना तय है कि मौजूदा घटनाक्रम ने ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व की चिंताओं को बढ़ा दिया है।






























