Gurdwaras in West Bengal: बंगाल सिख धर्म को मानने वाले हर एक अनुयायी के लिए बंगाल बेहद अहम स्थानों में से एक है, सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव जी की उदासी की यात्रा में बंगाल में उनका पड़ाव हो, या नौवे गुरु गुरु तेग बहागुर का वहां जाकर 2 सालों तक सिख धर्म के विचारों का प्रचार प्रसार करना हो.. गुरु साहिबानों के यहां आने से लोगो में बराबरी, जातिगत भेदभाव को दूर करने और आपसी सौहार्द की भावना का बढ़ावा मिला था। सिख धर्म की भावना और विचारों के फलने फूलने की कई निशानियां यहां सिख गुरुद्वारों को रूप में मौजूद है। जो सबूत है सिख गुरुओं के बंगाल की धरती पर आने का.. वहीं ये गुरुद्वारे बंगाल में सिख धर्म की नींव को भी मजबूत कर रहे है। अपने इस लेख में बंगाल में मौजूद 5 सिख गुरुद्वारों के बारे में जानेंगे, जो यहां सिक्खी की शान बढ़ा रहे है।
गुरुद्वारा बड़ी संगत – कोलकाता, पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में यहां मौजूद है सबसे पुराने गुरुद्वारों में से एक गुरुद्वारा गुरुद्वारा बड़ी संगत। सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरू गुरु नानक देव जी अपनी दूसरी उदासी के दौरान 1510 ईसवी में बंगाल के पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोण गए थे। जहां गुरु साहिब ने एक पेड़ के नीचे आराम किया था और इस दौरान राजा चंद्रकेतु राय गुरु साहिब के दर्शन करने आये थे। जहां एक गुरुद्वारा और उदासी मठ भी है.. वहीं जब वो ढाका से लौट रहे थे तब वो कोलकाता गए थे, जहां वो बन संगत नाम की जगह पर ठहरे थे, इस स्थान पर राजा बहादुर सिंह से उनकी मुलाकात हुई थी, जिनसे प्रभावित होकर उन्होंने इस स्थान पर गुरु की स्मृति में एक तीर्थस्थल बनवाया था, जिसे गुरुद्वारा बारी संगत नाम दिया गया था, जो सिख धर्म के अनुयायियों के लिए प्रमुख केंद्र बन गया।
नौवे गुरु गुरु तेग बहादुर भी अपनी बंगाल यात्रा के दौरान इस स्थान पर आये थे.. और कुछ समय रूके थे। कोलकाता के तुल्लापति कॉटन स्ट्रीट पर मौजूद गुरुद्वारा बड़ी संगत एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। हालांकि समय के साथ इस गुरुद्वारे ने काफी कुछ झेला है, इसक रखरखाव की कमी के कारण ये काफी जर्जर हुआ तो वहीं 1910 और 1922 के बीच गुरुद्वारे की इमारत और इसकी संपत्ति को चार बार गिरवी रख दिया गया था, लेकिन जब बंगाल की गुरुद्वारा समिति के इसकी देखभाल नहीं हो सकी तो दिसंबर 1920 में अमृतसर में नवगठित शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति को गुरुद्वारे की जिम्मेदारी दे दी गई।
लेकिन ये रखरखाव ज्यादा दिनो तक नहीं रख सकें, चौथी बार जिसके पास गिरवी रखा गया था वो कोर्ट पहुंच गये.. तब फैसला हुआ कि 6 महीने के अंदर निलाम हो जायेगा वर्ना बकाया राशि दी जाये.. मगर किसी तरह से आपसी सहमति से समय और बढ़ाया गया और आखिरकार 1937 में बकाया राशि का भुगतान हुआ और तब से ये गुरुद्वारा शान से सिक्खी की शान बढ़ा रहा है। हाबड़ा ब्रिज के ठीक सामने बना ये गुरुद्वारा काफी आलीशान है, जिसका प्रार्थना भवन काफी बड़ा है.. ये करीब 4 मंजिला है औऱ उसके गुंबद पर सोने का गुंबद लगा है। सिख संगत अपने धार्मिक कार्यक्रर्मों और समाजिक कार्यक्रमों के लिए यहीं जमा होते है। सिख धर्म की मजबूत पहचाने को खुद में समेटे है गुरुद्वारा बारा सिख संगत।
2, गुरुद्वारा राशबारी सिख संगत, हावड़ा – Gurdwara Rashbari Sikh Congregation
कोलकाता के हावड़ा स्टेशन के पास मौजूद है गुरुद्वारा राशबारी सिख संगत। इस गुरुद्वारे की शुरु, साल 1935 में हुई थी। जब पवित्र श्री गुरु ग्रंथ का पहला प्रकाश इस गुरुद्वारे में किया गया था। हालांकि इस गुरूद्वारे का रखरखाव वैसे नहीं हो सका जैसा कि गुरुद्वारो का होना चाहिए था..लेकिन दो मंजिला ये गुरुद्वारा हावड़ा के स्टेशन के पास तंग गालियों में बना हुआ है और इतना भव्य भी नहीं है। लेकिन यहां रहने वालें सिख संगतो के लिए बेहद खास है। हावड़ा रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वाले संगतो को लिए ये स्थान काफी अहम है.. जहां सिख धर्म के परंपराओं और संस्कृति का पूरा ध्यान रखा जाता है। हुगली नदी के किनारे बना ये गुरुद्वारा काफी शांति और आध्यत्मिकता का बोध कराता है।
3, श्री गुरु नानक गुरुद्वारा, बर्धवान – Shri Guru Nanak Gurdwara
ऐतिहासिक रूप से पश्चिम बंगाल का एक जिला बर्धमान काफी प्रसिद्ध है। यहीं प्रथम गुरु साहिब गुरु नानक देव जी की स्मृति और उनके सम्मान में बनाया गया है श्री गुरु नानक गुरुद्वारा। ये गुरुद्वारा ग्रांड ट्रंक रोड खोशबगान बर्धमान में स्थित है। काफी लंबी दूरी में फैला ये गुरुद्वारा वैसे को एक मंजिला ही है लेकिन इसका परिसर काफी आलीशान और बड़ा है, जहां एक साथ सैकड़ो सिख संगते आकर बैठ सकती है। गुरुद्वारे के अंदर पवित्र श्री ग्रंथ साहिब की गद्दी को मैन रोड से ही देखा जा सकता है.. जो भी सिख संगत यहां से गुजरता है वो बिना मत्था देकें जा ही नहीं पाता है।
4, गुरुद्वारा गुरु का बाग, बागमारी – Gurdwara Guru Ka Bagh
कोलकाता के बागमारी में स्थित गुरुद्वारा गुरु का बाग कंकुरगाछी में स्थित सिख धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद खास स्थान है। वैसे तो ये एक छोटा सा गुरुद्वारा है लेकिन इसका परिसर काफी बड़ा है और हर गुरुद्वारे की तरह यहां भी दैनिक प्रार्थना, भजन कीर्तन, और रोजाना लंगर की सेवा दी जाती है। ये गुरूदवारा सुबह 7 बजे खुलता है और रात को 8 बजे बंद होता है। धार्मिक कार्यकर्मों में यहां सिखों संगतों की काफी भीड़ होती है.. गुरु का बाग उस स्थान को कहा जाता है जहां गुरु साहिब ने कुछ समय बिताया हो.. ये वो स्थान है जहां गुरु साहिबानो ने अपना समय बिताया था और सिक्खी का प्रचार किया था।
5, गुरुद्वारा साहिब टिकियापारा – Gurdwara Sahib Tikiapara
बंगाल के हावड़ा क्षेत्र के टिकियापारा में मौजूद है सिखों का एक प्रमुख गुरुद्वारा साहिब.. जो कि अपने शांत और धार्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है। सिख धर्म की हर परंपरा को सख्ती से पालन करने वाला गुरुद्वारा साहिब सिख गुरुओं के सम्मान में बनाया गया.. जहां रोजाना अरदास, कीर्तन का आयोजन होता है और आने वाले सभी लोगो के लिए लंगर किया जाता है, जो कि यहां रहने वाले सिखों की सहायता से ही होता है। आध्यत्मिक शांति की तलाश कर रहे संगतो को लिए ये स्थान काफी मायने रखता है। इनके अलावा भी बंगाल में अनगिनत गुरुद्वारे है जो सिख धर्म की शान को बनाये रखें हुए है।



























