Modi Government Mid term Review: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार शाम हुई मंत्रिपरिषद की बैठक इस बार सिर्फ एक औपचारिक समीक्षा नहीं थी, बल्कि इसे सरकार के तीसरे कार्यकाल के “मिड-टर्म रिव्यू” के तौर पर देखा गया। करीब साढ़े चार घंटे तक चली इस हाई-लेवल बैठक में केंद्र सरकार के सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य मंत्री शामिल हुए। बैठक का मकसद साफ था अब तक हुए काम की समीक्षा और आगे की दिशा तय करना।
9 मंत्रालयों ने रखा अपना रिपोर्ट कार्ड| Modi Government Mid term Review
बैठक की शुरुआत शाम 5 बजे ‘सेवा तीर्थ’ में हुई, जहां सबसे पहले 9 बड़े मंत्रालयों ने अपने कामकाज का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इनमें वाणिज्य मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय जैसे अहम विभाग शामिल रहे। सरकार की ओर से सभी मंत्रालयों को पहले ही निर्देश दिया गया था कि वे अपने काम को चार हिस्सों में बांटकर पेश करें कानून में बदलाव, नियमों में सुधार, नीतिगत परिवर्तन और काम करने के तरीके में सुधार। साथ ही यह भी बताना जरूरी था कि इन बदलावों का आम लोगों की जिंदगी पर क्या असर पड़ा है।
इस समीक्षा को सिर्फ कागजी रिपोर्ट नहीं बल्कि “परिणाम आधारित आकलन” के रूप में देखा गया, जहां फोकस इस बात पर था कि योजनाओं का लाभ जमीन पर कितना पहुंचा है।
2047 का विजन और ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में एक बार फिर अपने “विकसित भारत 2047” के विजन को दोहराया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि सभी नीतियों और योजनाओं का लक्ष्य भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना होना चाहिए। इसके साथ ही पीएम ने ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाने पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की हर योजना का अंतिम उद्देश्य जनता की रोजमर्रा की जिंदगी को सरल बनाना होना चाहिए चाहे वह डिजिटल सेवाएं हों, इंफ्रास्ट्रक्चर हो या फिर प्रशासनिक प्रक्रिया।
बैठक में बड़ी परियोजनाओं की रफ्तार और मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल पर भी चर्चा हुई, ताकि योजनाएं समय पर पूरी हो सकें।
मिडिल ईस्ट संकट और आर्थिक असर पर चिंता
बैठक में अंतरराष्ट्रीय हालात भी अहम एजेंडा रहे। खासकर मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और उसके भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस वैश्विक संकट का असर भारतीय नागरिकों पर कम से कम पड़े। इसके लिए ऊर्जा, कृषि, खाद, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का सीधा असर तेल, गैस और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है, इसलिए पहले से तैयारी जरूरी है।
मंत्रियों का समूह लगातार नजर बनाए हुए
इस मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक समूह लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है, हालांकि वे दक्षिण कोरिया दौरे पर होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। वहीं स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी जिनेवा दौरे पर होने की वजह से मौजूद नहीं थे।
विदेश नीति और पीएम के 5 देशों के दौरे की जानकारी
बैठक के अंत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी की हालिया पांच देशों की विदेश यात्रा का विस्तृत ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि इस दौरे से भारत को कूटनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर कई अहम उपलब्धियां मिली हैं। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि आने वाले समय में इन समझौतों और साझेदारियों का भारत की वैश्विक स्थिति पर सकारात्मक असर पड़ेगा और देश की रणनीतिक ताकत और मजबूत होगी।




























