दिल्ली शराब नीति केस में बड़ा मोड़: जस्टिस शर्मा ने छोड़ी सुनवाई…  केजरीवाल बोले– सत्य की जीत हुई| Delhi Liquor scam

Nandani | Nedrick News Delhi Published: 15 मई 2026, 05:19 PM Updated: 15 मई 2026, 05:19 PM
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Delhi Liquor scam: दिल्ली की राजनीति और चर्चित शराब नीति मामले में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने शराब नीति से जुड़े मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। खास बात यह रही कि यह फैसला उन्होंने आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के तुरंत बाद लिया।

कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। वहीं, आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “सत्य की जीत हुई। गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई।” हालांकि उन्होंने अपने पोस्ट में न तो शराब नीति केस का नाम लिया और न ही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का जिक्र किया, लेकिन उनके ट्वीट को इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

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जस्टिस शर्मा ने क्यों छोड़ा केस? Delhi Liquor scam

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने साफ कहा कि उनका यह फैसला किसी दबाव या रिक्यूजल की मांग के कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि चूंकि उन्होंने इस मामले में अवमानना की कार्यवाही शुरू की है, इसलिए न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बेहतर होगा कि शराब नीति से जुड़े मामलों की सुनवाई अब दूसरी बेंच करे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे इस तरह नहीं देखा जाना चाहिए कि किसी पक्ष की मांग पर उन्होंने केस छोड़ा है। अदालत का मानना था कि मौजूदा हालात में दूसरी बेंच द्वारा सुनवाई उचित रहेगी।

AAP नेताओं पर अवमानना की कार्यवाही

इस मामले का सबसे अहम हिस्सा वह टिप्पणी रही जिसमें जस्टिस शर्मा ने कहा कि अदालत और न्यायपालिका के खिलाफ एक “सुनियोजित डिजिटल अभियान” चलाया गया। कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर एडिटेड वीडियो, पोस्ट और बयान फैलाकर अदालत की छवि खराब करने की कोशिश की गई। जस्टिस शर्मा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “एक झूठ को हजार बार बोलने से वह सच नहीं बन जाता।”

उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट रूम की कार्यवाही से जुड़े वीडियो को काट-छांटकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया ताकि अदालत और जज को लेकर गलत धारणा बनाई जा सके। इसी आधार पर अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और विनय मिश्रा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का फैसला लिया है।

“जज को डराने की कोशिश हुई”

सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने काफी सख्त टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि अदालत के खिलाफ ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई जिससे यह संदेश जाए कि अगर किसी नेता के खिलाफ फैसला आता है तो जज और उनके परिवार पर आरोप लगाए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ व्यक्तिगत हमला नहीं था बल्कि न्यायपालिका की संस्था को कमजोर करने की कोशिश थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को उनके फैसले पर आपत्ति थी तो वे सुप्रीम कोर्ट जा सकते थे, लेकिन इसके बजाय सोशल मीडिया पर नैरेटिव तैयार किया गया।

सौरभ भारद्वाज का वीडियो भी चर्चा में

AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दो बातें दोहराईं पहली, कि यह कार्रवाई व्यक्तिगत नहीं बल्कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए है, और दूसरी, उन्होंने आसान रास्ते की बजाय कठिन रास्ता चुना। वहीं, AAP के मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को केस से अलग कर लिया है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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