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नर्मदा का पहला बांध बना हादसे का गवाह: बरगी डैम में 30 से ज्यादा पर्यटकों से भरी क्रूज डूबी | Jabalpur Cruise Tragedy

Nandani | Nedrick News Jabalpur Published: 01 May 2026, 11:00 AM | Updated: 01 May 2026, 11:00 AM

Jabalpur Cruise Tragedy: मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक बड़ा हादसा सामने आया है, जहां नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम में पर्यटकों से भरी एक क्रूज अचानक डूब गई। बताया जा रहा है कि क्रूज में कुल 35 लोग सवार थे, जो नौका विहार का आनंद लेने पहुंचे थे। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन जैसे ही क्रूज डैम के बीच पहुंची, मौसम ने अचानक करवट ली और तेज हवाएं चलने लगीं। हवाओं के झोंकों के कारण क्रूज असंतुलित हो गई और कुछ ही पलों में पानी में समा गई।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन अभी भी कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस हादसे में कई लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है।

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पर्यटन का प्रमुख केंद्र है बरगी डैम | Jabalpur Cruise Tragedy

बरगी डैम जबलपुर का एक बेहद लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट माना जाता है। मध्य प्रदेश पर्यटन की जानकारी के मुताबिक, यह बांध सालभर पर्यटकों के लिए खुला रहता है। यहां आने वाले लोगों के लिए नौका विहार सबसे बड़ा आकर्षण है। हालांकि, यह गतिविधि तभी संभव होती है जब डैम में पर्याप्त जलस्तर हो और बारिश कम हो।

आमतौर पर अक्टूबर से अप्रैल तक का समय यहां घूमने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान मौसम साफ रहता है और पानी का स्तर भी ठीक होता है। लेकिन इस बार अचानक बदले मौसम ने एक बड़े हादसे को जन्म दे दिया।

1974 में शुरू हुआ था बरगी डैम का निर्माण

बरगी डैम जबलपुर शहर से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यह नर्मदा नदी पर बने प्रमुख बांधों में से एक है और इसे इस नदी पर बने शुरुआती पूर्ण बांधों में गिना जाता है। नर्मदा को मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी और बेहद प्राचीन नदी माना जाता है, जो गंगा और हिमालय से भी पुरानी बताई जाती है।

इस बांध का निर्माण साल 1974 में शुरू हुआ था और इसे पूरा होने में करीब 16 साल लगे। आखिरकार 1990 में यह परियोजना पूरी हुई। इस दौरान कई गांवों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा, क्योंकि वे बैकवाटर क्षेत्र में आ रहे थे।

सिंचाई, बिजली और जल आपूर्ति में अहम भूमिका

बरगी डैम का नाम पास के बरगी गांव के नाम पर पड़ा है, जो एनएच-7 के करीब स्थित है और जबलपुर को नागपुर से जोड़ता है। यह बांध न सिर्फ सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां 90 मेगावाट क्षमता की पनबिजली भी पैदा की जाती है।

बरगी डायवर्जन योजना लागू होने के बाद सिंचाई का क्षेत्र बढ़कर 4370 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है। डैम से निकलने वाली नहरें जबलपुर, मंडला और सिवनी जैसे जिलों तक पानी पहुंचाती हैं, और इस नेटवर्क को और विस्तार देने का काम अभी भी जारी है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकसित की गई सुविधाएं

इस बांध का बैकवाटर एक विशाल झील का रूप ले चुका है, जो करीब 75 किलोमीटर लंबी और 4.5 किलोमीटर चौड़ी है। इसी वजह से यहां पर्यटन की काफी संभावनाएं बनीं और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने यहां नौकाविहार, क्रूज और रिजॉर्ट जैसी सुविधाएं शुरू कीं।

बरगी डैम की ऊंचाई करीब 69 मीटर और लंबाई 5.4 किलोमीटर है। इसे मूल रूप से 105 मेगावाट बिजली उत्पादन और लगभग 2980 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा देने के उद्देश्य से बनाया गया था, हालांकि वर्तमान में 90 मेगावाट उत्पादन हो रहा है।

इंदिरा सागर डैम में भी मिलती हैं ऐसी सुविधाएं

बरगी डैम की तरह ही नर्मदा नदी पर बना इंदिरा सागर डैम, जिसे हनुवंतिया टापू के नाम से भी जाना जाता है, पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। इसका जलाशय देश के सबसे बड़े जलाशयों में गिना जाता है और यहां भी नौकाविहार जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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