अनुशासन या प्रताड़ना? बचपन के वो जख्म जिसने एक हंसते-खेलते वकील को 5वीं मंजिल से कूदने पर किया मजबूर | Kanpur Priyanshu Shrivastava

Rajni | Nedrick News Kanpur Published: 24 Apr 2026, 10:36 AM | Updated: 24 Apr 2026, 10:47 AM

Kanpur Priyanshu Shrivastava: पिता-पुत्र का रिश्ता दुनिया के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है, जहाँ बचपन में पिता के कंधे बेटे का जहां होते हैं, वहीं बुढ़ापे में बेटा उनकी लाठी बनता है। लेकिन क्या हो जब यही पवित्र रिश्ता जिल्लत और प्रताड़ना का सबब बन जाए और इंसान को मौत, जिंदगी से आसान लगने लगे? कहते हैं खुदकुशी का फैसला दुनिया का सबसे कठिन फैसला है, उस आखिरी कदम को उठाने से पहले इंसान मन ही मन हजार बार मरता है।

कानपुर कोर्ट में एक युवा वकील के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जिसने मौत को गले लगाने से पहले फेसबुक पर अपनी आखिरी बात लिखी ‘मेरी लाश को पापा छू भी न पाएं’। वह तो चला गया, लेकिन पीछे छोड़ गया कभी न भरने वाले जख्म और अनगिनत अनसुलझे सवाल ?

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क्या है पूरा मामला?

यूपी के कानपुर में गुरुवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। 24 साल के एक युवा वकील, प्रियांशु श्रीवास्तव (Priyanshu Shrivastava) ने गुरुवार दोपहर करीब 3:30 बजे कोर्ट बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। इस घटना के बाद पूरे अदालत परिसर में हड़कंप मच गया।

कानपुर के डिप्टी कमिश्नर सत्यजीत गुप्ता द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि प्रियांशु को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही भारी संख्या में वकील इकट्ठा होने लगे, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए कोतवाली पुलिस ने कोर्ट परिसर की घेराबंदी की।

प्रियांशु का आखिरी खत

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आत्मघाती कदम उठाने से पहले प्रियांशु ने दो पन्नों का एक सुसाइड नोट लिखा और उसे अपने व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगा दिया। व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगे सुसाइड नोट से ये पता चलता है कि वह तकलीफों से गुजर रहा था। सुसाइड नोट के हर शब्द में बरसों का दबा हुआ दर्द और अपनों से मिली जिल्लत का जिक्र था।

उसने बचपन की कुछ कड़वी यादें साझा करते हुए लिखा कि कैसे छोटी-छोटी बातों पर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। Priyanshu Shrivastava ने यहाँ तक लिख दिया कि उसकी मौत के बाद उसके पिता उसकी लाश को हाथ भी न लगाएँ। यह पंक्तियाँ बताने के लिए काफी हैं कि एक हंसते-खेलते युवा के भीतर भावनाओं का कैसा तूफान चल रहा था।

नोट के जरिए प्रियांशु ने की अपील

नोट में उसने बेहद भावुक बातें लिखीं। उसने कहा कि रोज-रोज इस तरह जीने से बेहतर है कि एक बार मरकर सब खत्म कर दिया जाए। उसने सभी माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों पर उतना ही दबाव डालें, जितना वे सह सकें। आखिर में उसने (Priyanshu Shrivastava) अपनी मां के लिए प्यार जताया और पिता के लिए कड़े शब्द लिखते हुए कहा कि उसकी लाश को उसके पिता छू भी न पाएं।

पुलिस की कार्रवाई

कानपुर पुलिस प्रियांशु श्रीवास्तव (Priyanshu Shrivastava) आत्महत्या मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। डीसीपी (ईस्ट) सत्यजीत गुप्ता के अनुसार, पुलिस ने प्रियांशु का मोबाइल फोन और कोर्ट परिसर के सीसीटीवी फुटेज कब्जे में ले लिए हैं, जिसमें वह अंतिम क्षणों में किसी से फोन पर बात करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अब उनके कॉल रिकॉर्ड्स और व्हाट्सएप स्टेटस पर पोस्ट किए गए दो पन्नों के सुसाइड नोट की सत्यता की जांच कर रही है।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने पुष्टि की है कि नोट में बचपन के गहरे जख्मों और पारिवारिक तनाव का जिक्र है, जिसे जांच का मुख्य आधार बनाया गया है। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पुलिस परिजनों व दोस्तों के बयान दर्ज कर रही है, किसी भी लिखित शिकायत के मिलते ही मामले में औपचारिक मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

लोग अक्सर यह कहकर बात टाल देते हैं कि माता-पिता जो भी करते हैं, अपने बच्चों की भलाई के लिए ही करते हैं। लेकिन यह बात हर परिस्थिति में सही हो, यह जरूरी नहीं। जिंदगी में अनुशासन जरूरी है, परंतु भलाई के नाम पर किसी को इतना प्रताड़ित न कर दिया जाए कि वह जीना ही छोड़ दे।

कहते हैं कि बेइज्जती अगर अकेले में हो तो इंसान सह भी लेता है, लेकिन जब सबके सामने हो, तो उसकी चोट सीधे रूह पर लगती है। कानपुर की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं हमारी परवरिश और अनुशासन का तरीका किसी की जान पर तो भारी नहीं पड़ रहा?

Rajni

rajni@nedricknews.com

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