Pawan Khera Controversy: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत अब कानूनी विवाद का बड़ा मुद्दा बन गई है। असम सरकार ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। यह पूरा मामला उन आरोपों से जुड़ा है जो खेड़ा ने हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा के खिलाफ लगाए थे।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को एक बयान में दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां भी हैं। इन आरोपों के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई और गुवाहाटी में खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। उन पर मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस की कार्रवाई और खेड़ा की कानूनी रणनीति | Pawan Khera Controversy
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 अप्रैल को असम पुलिस दिल्ली स्थित खेड़ा के घर पहुंची थी, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं मिले। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट में ट्रांजिट अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की।
10 अप्रैल को हाई कोर्ट की जस्टिस के. सुजना ने उन्हें एक सप्ताह की राहत देते हुए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी। अदालत ने साफ किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है, बल्कि केवल अस्थायी राहत दे रही है ताकि खेड़ा संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची असम सरकार
अब इस फैसले के खिलाफ असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता शुवोदीप राय ने याचिका में कहा है कि तेलंगाना हाई कोर्ट का इस मामले में अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) नहीं बनता।
साथ ही यह भी तर्क दिया गया है कि ट्रांजिट अग्रिम जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो रही है और पुलिस को पूछताछ में दिक्कत आ रही है। इस याचिका पर इसी सप्ताह सुनवाई होने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने असम सरकार के रुख को “दुराग्रहपूर्ण” बताया है और कहा कि पूरी पार्टी पवन खेड़ा के साथ खड़ी है। वहीं, असम सरकार का कहना है कि आरोप गंभीर हैं और उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
चुनाव के बीच बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया जब असम में चुनावी माहौल गर्म था। 9 अप्रैल को विधानसभा के लिए मतदान होना था, और उससे ठीक पहले खेड़ा के बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी थी। इसी के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ केस दर्ज किया।
अब क्या आगे?
फिलहाल इस मामले की अगली कड़ी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही साफ होगी। अगर कोर्ट असम सरकार की दलीलों को मानता है, तो खेड़ा की राहत पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर गर्मा गया है और आने वाले दिनों में इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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