India Army Lebanon: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच लेबनान पर इजरायल के लगातार हमलों की खबरें सामने आ रही हैं। एयरस्ट्राइक और बढ़ते संघर्ष के बीच एक सवाल लोगों के मन में उठ रहा है आखिर इस युद्ध जैसे हालात में वहां 600 से ज्यादा भारतीय सैनिक क्या कर रहे हैं? दरअसल, यह कोई नई तैनाती नहीं है, बल्कि एक लंबे समय से चल रहे संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन का हिस्सा है, जिसमें भारत की अहम भूमिका है।
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1978 से चल रहा है मिशन | India Army Lebanon
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की अंतरिम शांति सेना, जिसे United Nations Interim Force in Lebanon (UNIFIL) कहा जाता है, की स्थापना साल 1978 में की गई थी। यह कदम उस समय उठाया गया था जब इजरायल और लेबनान के बीच तनाव चरम पर था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 425 और 426 के तहत इस मिशन का मकसद इजरायली सेना की वापसी सुनिश्चित करना, क्षेत्र में शांति बहाल करना और लेबनान सरकार को अपनी सत्ता मजबूत करने में मदद करना था।
कितने सैनिक और कौन-कौन से देश शामिल?
वर्तमान में UNIFIL में करीब 7,500 से 8,500 शांति सैनिक तैनात हैं, जो लगभग 47 से 50 देशों से आते हैं। इनमें भारत का योगदान भी काफी बड़ा है। करीब 600 से 642 भारतीय सैनिक इस मिशन का हिस्सा हैं, जो दक्षिणी लेबनान में तैनात हैं। भारत के अलावा इंडोनेशिया, इटली, फ्रांस, घाना, मलेशिया और नेपाल जैसे देशों के सैनिक भी यहां बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
क्या है ‘ब्लू लाइन’?
भारतीय सैनिक मुख्य रूप से ‘ब्लू लाइन’ नाम की सीमा पर तैनात हैं। यह लगभग 120 किलोमीटर लंबी एक सीमांकन रेखा है, जो इजरायल और लेबनान को अलग करती है। हालांकि यह कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है, लेकिन इसे संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों के बीच सीधे संघर्ष को रोकने के लिए तय किया है। यहां तैनात सैनिक लगातार गश्त करते हैं, किसी भी तरह की घुसपैठ या उल्लंघन पर नजर रखते हैं और तनाव को बढ़ने से रोकने की कोशिश करते हैं।
क्या है भारतीय सैनिकों की भूमिका?
UNIFIL के तहत भारतीय सैनिकों की भूमिका सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है। वे एक ‘बफर’ की तरह काम करते हैं, जिससे दोनों पक्षों के बीच सीधा टकराव कम हो सके। इसके अलावा भारतीय टुकड़ियां लेबनानी सेना की मदद भी करती हैं, ताकि वह दक्षिणी क्षेत्र में बेहतर तरीके से काम कर सके। मानवीय स्तर पर भी भारतीय सैनिक अहम भूमिका निभाते हैं। वे संघर्ष प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, दवाइयां और जरूरी सहायता पहुंचाते हैं।
क्यों नहीं बुलाए जा सकते वापस?
चूंकि ये सैनिक संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के तहत तैनात हैं, इसलिए भारत उन्हें एकतरफा वापस नहीं बुला सकता। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों के तहत ही होती है।
वैश्विक शांति में भारत की भूमिका
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जो संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं। लेबनान में भारतीय सैनिकों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि भारत सिर्फ अपने हितों तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाता है।
तनाव के बीच बढ़ी जिम्मेदारी
मौजूदा हालात को देखते हुए लेबनान में तैनात भारतीय और अन्य देशों के सैनिक काफी सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं। बढ़ते संघर्ष के बीच उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी बड़े टकराव में बदल सकती है।





























