Viral Girl Monalisa case: महाकुंभ से चर्चा में आई ‘वायरल गर्ल’ का मामला अब गंभीर कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले चुका है। केरल में मुस्लिम युवक फरमान खान से शादी करने वाली इस लड़की को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है जांच में उसका जन्म प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है और वह नाबालिग निकली। इस पूरे मामले में अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। नगर परिषद महेश्वर के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) प्रियंक पंड्या का तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब धार जिले की धामनोद नगर परिषद भेजा गया है।
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बना विवाद की जड़ | Viral Girl Monalisa case
जानकारी के मुताबिक, नगर परिषद महेश्वर ने 5 जून 2025 को ‘मोनालिसा’ नाम से एक जन्म प्रमाण पत्र जारी किया था। इसमें लड़की की जन्मतिथि साल 2008 दर्ज की गई थी। इसी दस्तावेज के आधार पर उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी फरमान खान ने केरल में उससे शादी की। लेकिन जब इस प्रमाण पत्र की जांच की गई, तो यह फर्जी निकला। जैसे ही यह बात सामने आई, प्रशासन में हड़कंप मच गया और नगर परिषद ने तत्काल प्रभाव से इस जन्म प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया।
मां का दावा: 2009 में हुआ था जन्म
लड़की की मां ने पूरे मामले में अलग ही सच सामने रखा है। उनका कहना है कि उन्होंने 30 दिसंबर 2009 को महेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेटी को जन्म दिया था। अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक, बच्ची का जन्म शाम 5:50 बजे हुआ था और उसका वजन 2 किलो 100 ग्राम था। यह एक सामान्य डिलीवरी थी। मां का आरोप है कि वह अनपढ़ हैं और किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जानकारी के बिना उनसे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए, जिसका बाद में गलत इस्तेमाल किया गया।
सीएमओ पर कार्रवाई, तबादला आदेश जारी
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। राज्य शासन के उपसचिव प्रमोद शुक्ला ने आदेश जारी करते हुए सीएमओ प्रियंक पंड्या का तबादला कर दिया। यह कदम इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
‘लव जिहाद’ और साजिश के आरोप
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। खरगोन-बड़वानी सांसद गजेंद्र पटेल ने इसे ‘लव जिहाद’ से जोड़ते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ एक शादी का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है। उनके मुताबिक, केरल में जाकर शादी करना और फर्जी दस्तावेज तैयार करना कुछ संगठनों की कार्यप्रणाली का हिस्सा हो सकता है, जिसमें पीएफआई जैसे संगठनों का भी हाथ हो सकता है।
राष्ट्रीय आयोग ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने भी इस पर संज्ञान लिया है। आयोग के निर्देश पर एक उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच करेगी।
देशभर में चर्चा का विषय बना मामला
खरगोन जिले का महेश्वर इस विवाद के बाद देशभर में चर्चा का केंद्र बन गया है। एक तरफ नाबालिग की शादी, दूसरी ओर फर्जी दस्तावेज इन दोनों ने मिलकर इस मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
फिलहाल प्रशासन, जांच एजेंसियां और आयोग सभी इस मामले की तह तक जाने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में जांच के बाद और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
और पढ़ें: इस महिला कॉन्स्टेबल की बहादुरी ने दिलाई 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा | Revathi Tamil Nadu





























