Revathi Tamil Nadu: तमिलनाडु में एक अद्भुत बहादुरी और न्याय की कहानी सामने आई है, जिसने पूरी पुलिस व्यवस्था में हड़कंप मचा दिया। 7 अप्रैल को आए फ़ैसले में, तमिलनाडु के 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सज़ा सुनाई गई। यह वही केस है, जिसमें पिता–पुत्र पी. जयराज और जे. बेनिक्स को पुलिस कस्टडी में बर्बरता की हदों तक पीटा गया और उनकी जान चली गई। इस पूरे केस को उस मुक़ाम तक पहुँचाने में एक महिला कॉन्स्टेबल एस. रेवती की गवाही निर्णायक साबित हुई।
हिम्मत की मिसाल: एस. रेवती
जब पूरे सिस्टम में कोई भी पुलिस के खिलाफ बोलने से डर रहा था, तभी रेवती ने मजिस्ट्रेट के सामने कहा, “सर, मैं आपको सब कुछ बताऊंगी।” यह बात उनके साहस और न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। तत्कालीन हेड कॉन्स्टेबल रेवती उस वक़्त तूतुकुड़ी ज़िले के सतांकुलम पुलिस स्टेशन में ड्यूटी पर थीं। उन्होंने धमकियों और सिस्टम के दबाव की परवाह किए बिना अदालत में पूरी घटना का बारीक बारीक ब्यौरा पेश किया।
कैसे हुआ हादसा | Revathi Tamil Nadu
दोनों पिता–पुत्र को 2020 में कोविड लॉकडाउन नियम तोड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। हालांकि सीबीआई जांच में पता चला कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़े थे। यह बर्बरता सिर्फ पुलिस के अकड़ और ग़ुरूर का परिणाम थी। पुलिसकर्मियों ने उन्हें इतनी बेरहमी से पीटा कि जख्मों और ख़ून के बीच उनकी जान चली गई।
गवाही और साक्ष्य
रेवती ने मजिस्ट्रेट के सामने घटना का पूरा विवरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे जयराज और बेनिक्स को लगातार पीटा गया, उनके शरीर पर चोटें आईं और आखिर में उन्हें जुडिशियल कस्टडी में भेजा गया। रेवती ने सीसीटीवी फ़ुटेज में दिख रहे दोषी पुलिसवालों की पहचान भी करवाई, जिससे साबित हुआ कि आरोपी घटना के वक़्त वहां मौजूद थे।
रेवती ने मजिस्ट्रेट को बताया, “मैं रात के करीब 8:50 बजे थाने पहुंची। अंदर से चिल्लाने और रोने की आवाज़ आ रही थी। वो कह रहा था- ‘अम्मा, दर्द हो रहा है! मुझे छोड़ दो!’ इसी बीच सब-इंस्पेक्टर बालकृष्णन की आवाज़ भी सुनाई दे रही थी। वो चिल्ला रहे थे- ‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई थाने में हंगामा करने की?’”
उन्होंने यह भी बताया कि पुलिसवालों ने पिता–पुत्र को बूट से हमला किया, कपड़े उतार दिए, हाथ बांध दिए और चोट पहुँचाई। रेवती ने बेनिक्स और जयराज को मदद देने की कोशिश की, जैसे उन्हें कॉफ़ी देने का प्रयास, जिसे तुरंत पुलिस ने छीनकर फेंक दिया।
धमकियों के बावजूद अडिग
रेवती को अपने बयान दर्ज करने के दौरान धमकाया गया। पुलिस ने कोर्ट स्टाफ़ को भी डराने की कोशिश की। शुरुआत में रेवती अपने बयान पर साइन करने से डर रही थीं। मजिस्ट्रेट ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया। रेवती ने यह भरोसा मिलने के बाद ही अदालत में अपना बयान दर्ज किया।
सुरक्षा और न्याय
मद्रास हाई कोर्ट ने रेवती और उनके पति की सुरक्षा के लिए दो पुलिस कॉन्स्टेबल तैनात किए। अदालत और प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि वह बिना डर के गवाही दे सकें। यही साहस और सुरक्षा का भरोसा इस केस में निर्णायक साबित हुआ और नौ पुलिसकर्मियों को सज़ा-ए-मौत मिली।





























