Good Friday: वैसे तो सारे धर्मों का एक खास दिन होता है और उसका अपना महत्व है, और ईसाई धर्म में गुड फ्राइडे बहुत ही खास दिन होता है। इसी दिन यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। यह दिन एक तरफ दुख और शोक का है, लेकिन दूसरी तरफ इसे पवित्र और उम्मीद से जुड़ा दिन भी माना जाता है। यही वजह है कि इसे गुड फ्राइडे कहा जाता है। यह दिन एक तरफ दुख और शोक का है, तो दूसरी तरफ उनके महान बलिदान और मानवता के लिए जगी एक नई उम्मीद का भी है। तो चलिए जानते है गुड फ्राइडे की ईसाई धर्म में क्या मान्यता है?
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गुड फ्राइडे नाम क्यों पड़ा?
पहली नजर में यह सवाल आता है कि जिस दिन इतना दुखद घटना हुई, उसे गुड यानी अच्छा क्यों कहा जाता है? इसको लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक बताया जा रहा है कि साल 1290 की एक डिक्शनरी में इसे पहले गौउड फ्राइडे कहा जाता था। समय के साथ यह शब्द बदलकर Good Friday हो गया, जो आज पूरी दुनिया में प्रचलित है।
धर्म में क्या मान्यता है?
ईसाई मान्यता के अनुसार, यीशु मसीह ने अपनी जान देकर पूरी मानवता के पापों का प्रायश्चित किया। यानी उन्होंने दूसरों के लिए बलिदान दिया। इसलिए यह दिन दुखद होने के बावजूद मोक्ष और उद्धार का प्रतीक माना जाता है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पुराने समय में गुड शब्द का मतलब सिर्फ अच्छा नहीं, बल्कि पवित्र भी होता था। इसलिए इसे (Holy) होली फ्राइडे यानी पवित्र शुक्रवार भी कहा जाता है। यही कारण है कि Good Friday का दिन केवल शोक का नहीं, बल्कि कृतज्ञता (Gratitude) और नई शुरुआत का दिन भी है।
उम्मीद और नई शुरुआत का प्रतीक
Good Friday के बाद ईस्टर आता है, जब यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की मान्यता है। इसी कारण यह दिन सिर्फ दुख नहीं, बल्कि उम्मीद और नई शुरुआत का भी संकेत देता है। गुड फ्राइडे का यह बलिदान और ईस्टर की यह जीत ही ईसाई धर्म की असली नींव है।
साहित्य और बाइबल का संदर्भ
ग्रीक साहित्य में भी इस दिन को “होली फ्राइडे” यानी पवित्र शुक्रवार कहा गया है। वहीं बाइबल के सभोपदेशक (Ecclesiastes 7:1) में कहा गया है कि इंसान की मृत्यु का दिन उसके जन्म से ज्यादा पवित्र होता है। यही सोच भी इस दिन को “गुड” कहने के पीछे एक वजह मानी जाती है। यानी जब कोई महान आत्मा मानवता के लिए अपना जीवन देती है, तो वह दिन शोक से कहीं अधिक पवित्र और पूजनीय बन जाता है।
सीधी बात यह है कि Good Friday दुख का दिन जरूर है, लेकिन यह त्याग, प्रेम और इंसानियत के लिए किए गए बलिदान का प्रतीक भी है। इसलिए इसे “गुड” कहा जाता है क्योंकि इस दिन एक ऐसी घटना हुई, जिसने दुनिया को उम्मीद और मुक्ति का रास्ता दिखाया।




























