America Massive Action On Iran| 32 साल पहले अमेरिका ने उठाया 20 एटम बम का मैटेरियल, अब ईरान में मिशन मुश्किल!

Nandani | Nedrick News Iran Published: 31 Mar 2026, 08:57 AM | Updated: 31 Mar 2026, 08:57 AM

America Massive Action On Iran: अमेरिका एक बेहद जटिल और खतरनाक मिशन पर काम कर रहा है, जिसके तहत वह ईरान से 10–11 परमाणु बम बनाने जितना एनरिच्ड यूरेनियम निकालने पर विचार कर रहा है। यह जानकारी अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मिशन में अमेरिकी विशेष बलों को ईरानी क्षेत्र में भेजना पड़ सकता है और ऑपरेशन कई दिनों तक चल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन वे इस विकल्प के प्रति खुले हैं।

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क्यों यह ऑपरेशन विचाराधीन है| America Massive Action On Iran

अमेरिका इस कदम पर इसलिए विचार कर रहा है क्योंकि 32 साल पहले उसने इसी तरह का एक बेहद संवेदनशील ऑपरेशन किया था। उस समय सोवियत संघ के विघटन के बाद कजाकिस्तान में पड़े 600 किलोग्राम हाईली एनरिच्ड यूरेनियम (HEU) को सुरक्षित अमेरिका ले गया था। अगर यह सामग्री आतंकवादियों या हथियार माफिया के हाथ लगती, तो यह वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी। 600 किलोग्राम HEU से लगभग 20 परमाणु बम बनाए जा सकते थे। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने इस ऑपरेशन को ग्रीन सिग्नल दिया था।

प्रोजेक्ट सफायर: एक ऐतिहासिक मिशन

1990 में सोवियत संघ के विघटन के बाद परमाणु हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला यूरेनियम अलग-अलग जगहों में बिखर गया। कजाकिस्तान के उस्त-कामेनोगोर्स्क शहर के पास उल्बा मेटलर्जिकल प्लांट में 600 किलोग्राम HEU पड़ी हुई थी। यह यूरेनियम सोवियत काल की अल्फा क्लास पनडुब्बियों के लिए इस्तेमाल किया जाता था और इससे 20 परमाणु बम बनाए जा सकते थे।

अमेरिकी दूतावास के अधिकारी एंडी वेबर को स्थानीय मैकेनिक से इस यूरेनियम की जानकारी मिली। कई महीनों की गुप्त डिप्लोमेसी के बाद अमेरिका और कजाकिस्तान के बीच समझौता हुआ और राष्ट्रपति क्लिंटन ने 7 अक्टूबर 1994 को गुप्त निर्देश पर इस मिशन को मंजूरी दी। इसे कोडनेम “प्रोजेक्ट सफायर” दिया गया।

ऑपरेशन की प्रक्रिया

अक्टूबर 1994 में डेलावेयर के डोवर एयर फोर्स बेस से तीन विशाल C-5 गैलेक्सी कार्गो विमान उड़े। इनमें 31 सदस्यीय टीम सवार थी, जिसमें टेक्नीशियन, पेंटागन और एनर्जी डिपार्टमेंट के विशेषज्ञ, और डॉक्टर शामिल थे। टीम को रेडिएशन जैसी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया था।

उस्त-कामेनोगोर्स्क पहुंचकर टीम ने दिन में 12 घंटे काम किया। चार हफ्तों में उन्होंने 2,200 किलोग्राम मटेरियल हैंडल किया और 600 किलोग्राम HEU को 400 से अधिक विशेष शिपिंग कंटेनरों में पैक किया। इसके बाद ठंडी, बर्फीली रात में ट्रक एयरपोर्ट की ओर रवाना हुए। विमान में लादकर इसे अमेरिका के ओक रिज़ स्थित नेशनल सिक्योरिटी कॉम्प्लेक्स ले जाया गया, जहां इसे IAEA की निगरानी में लो एनरिच्ड यूरेनियम में बदला गया।

23 नवंबर 1994 को राष्ट्रपति क्लिंटन ने इस मिशन की सफलता की घोषणा की। इसने न केवल परमाणु प्रसार को रोका बल्कि अमेरिका और कजाकिस्तान के बीच सहयोग की नींव भी रखी।

ईरान में स्थिति पूरी तरह अलग

कजाकिस्तान का ऑपरेशन पूरी तरह सहयोग पर आधारित था। कजाक सरकार ने अमेरिकी टीम को साइट तक पहुंचने, पैकिंग और सामग्री निकालने की अनुमति दी थी। लेकिन ईरान में स्थिति उलट है। ईरान अमेरिका के किसी भी ऑपरेशन को स्वीकार नहीं करेगा। अगर अमेरिकी विशेष बल ईरान में घुसते हैं, तो यह एक पूरी तरह से कॉम्बैट ऑपरेशन होगा।

इस ऑपरेशन में न्यूक्लियर साइट्स जैसे इस्फहान के अंडरग्राउंड टनल्स या बंकर को सुरक्षित करना होगा। मलबे या क्षतिग्रस्त साइट्स से सिलिंडर निकालने होंगे और अमेरिकी सैनिकों को कई दिनों तक वहां रहना पड़ेगा। ईरान ड्रोन, मिसाइल और ग्राउंड फोर्स का इस्तेमाल कर सकता है।

जोखिम का स्तर

कजाकिस्तान में मुख्य चुनौती ठंड, बर्फ और रेडियोएक्टिव मटेरियल का हैंडलिंग था। वहां कोई सैनिक हताहत नहीं हुआ। लेकिन ईरान में खतरा कई गुना अधिक है। अमेरिकी सैनिकों की जान पर हमेशा खतरा रहेगा। अचानक हमले, मिसाइल हमले, और ड्रोन हमले की संभावना बनी रहेगी। UF6 गैस के सिलिंडरों में यूरेनियम भरा हो सकता है, जो रेडियोएक्टिव और हैंडलिंग में खतरनाक है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ऑपरेशन में सात दिन या उससे अधिक समय लग सकता है। ईरान अपने यूरेनियम को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इसलिए यह मिशन प्रोजेक्ट सफायर के मुकाबले पूरी तरह जोखिम भरा और संवेदनशील होगा।

अमेरिकी रणनीति और निर्णय

रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप अभी इस ऑपरेशन पर अंतिम फैसला नहीं ले चुके हैं। यह विचार, पिछले अनुभव और कजाकिस्तान ऑपरेशन पर आधारित है, लेकिन ईरान की स्थिति पूरी तरह अलग है। कजाकिस्तान में सहयोग था, ईरान में तीव्र विरोध। अमेरिका के लिए यह मिशन न सिर्फ सैन्य चुनौती है, बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है।

कुल मिलाकर, अमेरिका ईरान में परमाणु यूरेनियम निकालने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। प्रोजेक्ट सफायर की सफलता ने पहले दिखा दिया कि ऐसे ऑपरेशन संभव हैं, लेकिन ईरान में स्थिति बिल्कुल अलग और खतरनाक है। यह मिशन दुनिया के सबसे संवेदनशील और जोखिम भरे ऑपरेशनों में से एक माना जा रहा है। अगर यह ऑपरेशन हुआ, तो यह आधुनिक सैन्य और कूटनीतिक इतिहास का सबसे जटिल मिशन साबित हो सकता है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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