India kerosene supply 2026: मिडिल ईस्ट में जारी जंग और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने रविवार को एक अहम कदम उठाया है। केंद्र ने घरों तक खाना पकाने के लिए केरोसिन की आपूर्ति तेज करने के उद्देश्य से पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी ढील देने की घोषणा की है। यह फैसला खासकर उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां घरों में रोजमर्रा के लिए केरोसिन का इस्तेमाल होता है।
अस्थायी ढील के तहत क्या मिलेगा फायदा | India kerosene supply 2026
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि नई अधिसूचना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को 60 दिनों की अवधि के लिए पेट्रोल पंप और अन्य खुदरा माध्यमों से केरोसिन बेचने की अनुमति दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग जरूरत के समय आसानी से ईंधन प्राप्त कर सकें।
मंत्रालय ने बताया कि पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 और 2002 के तहत विशेष परिस्थितियों में सरकार पेट्रोलियम उत्पादों को सामान्य सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों से छूट दे सकती है। इस छूट का लाभ केवल कुछ निश्चित शर्तों के साथ ही मिलेगा, ताकि वितरण प्रणाली व्यवस्थित और सुरक्षित बनी रहे।
कितने राज्यों में लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह अस्थायी राहत 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी। इन क्षेत्रों में उच्च प्राथमिकता वाले सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत स्टॉक रखने की व्यवस्था की गई है। इसका मतलब यह है कि तेल कंपनियों को पेट्रोल पंप और अन्य खुदरा आउटलेट्स पर हर वितरण इकाई के लिए अधिकतम 2,500 लीटर तक केरोसिन रखने की अनुमति होगी।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि अगर अचानक मांग बढ़े या सप्लाई में किसी तरह की बाधा आए, तो तुरंत जरूरत के अनुसार केरोसिन की आपूर्ति की जा सके।
सरकार ने उठाया संतुलित कदम
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस अस्थायी ढील का मतलब यह नहीं है कि बाकी सभी नियमों को नजरअंदाज किया जाएगा। अन्य सभी शर्तों और नियमों का कड़ाई से पालन करना जरूरी होगा। इसका मकसद यह है कि आपूर्ति बढ़ाते समय सुरक्षा और मानक भी कायम रहें।
विशेष रूप से यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है। घरेलू स्तर पर केरोसिन की बढ़ी हुई उपलब्धता आम लोगों के लिए राहत साबित होगी, खासकर उन परिवारों के लिए जो खाना पकाने और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस ईंधन पर निर्भर हैं।
देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की कोशिश
सरकार का यह निर्णय एक तरफ घरेलू मांग को पूरा करने और लोगों तक ईंधन की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने की दिशा में है, वहीं दूसरी तरफ यह वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि यह व्यवस्था 60 दिनों के लिए लागू रहेगी और इसके बाद स्थिति के अनुसार आगे की योजना बनाई जाएगी।
इस तरह, भारत सरकार ने संकट के समय में आम जनता के हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समय रहते ठोस और प्रभावी कदम उठाए हैं।





























