Iran-US War: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब सीधे वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री रास्तों पर दिखने लगा है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है, वहां जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
ट्रंप का दावा– ‘ईरान भेज रहा है 20 तेल टैंकर’
डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया कि ईरान अमेरिका को 20 तेल टैंकर भेज रहा है। उनके मुताबिक ये टैंकर सोमवार, 30 मार्च 2026 की सुबह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते गुजरना शुरू करेंगे। ट्रंप ने इसे “सम्मान दिखाने वाला कदम” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी ईरान 10 बड़े तेल टैंकर अमेरिका को दे चुका है। हालांकि, इस दावे को लेकर अभी तक ईरान की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे स्थिति और रहस्यमयी बन गई है।
पाकिस्तान के जरिए चल रही बातचीत | Iran-US War
ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सीधे नहीं, बल्कि पाकिस्तान के माध्यम से हो रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है और अमेरिका इस समय मजबूत स्थिति में है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच कोई डील सामने आ सकती है। इस बयान के बाद कूटनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
खर्ग द्वीप पर अमेरिका का सख्त रुख
तनाव के बीच ट्रंप ने ईरान के खर्ग द्वीप को लेकर भी बड़ा और सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस रणनीतिक द्वीप को अपने कब्जे में लेने के विकल्प पर विचार कर रहा है। खर्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यहीं से उसका करीब 90 प्रतिशत तेल निर्यात होता है। ट्रंप ने साफ किया कि अगर अमेरिका ऐसा कदम उठाता है, तो वहां लंबे समय तक सैन्य मौजूदगी बनाए रखनी पड़ेगी।
इस बयान पर ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। ईरान के ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम ज़ोल्फ़ागरी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना वहां पहुंचती है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
हवाई हमले और बढ़ता खतरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 13 मार्च को अमेरिका खर्ग द्वीप पर हवाई हमला भी कर चुका है, जिसमें कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका के पास इस द्वीप को पूरी तरह नुकसान पहुंचाने या कब्जे में लेने की योजना तैयार है। अगर ऐसा होता है, तो इसका सीधा असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, क्योंकि उसकी तेल आय का बड़ा हिस्सा इसी द्वीप पर निर्भर है।
15 शर्तों में से ज्यादातर मानने का दावा
ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए रखी गई 15 शर्तों में से ज्यादातर मान ली हैं। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच सीधे और परोक्ष दोनों तरह की बातचीत जारी है। इसी बीच इस्लामाबाद में एक अहम बैठक हुई, जिसमें मिस्र, तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक में यह साफ कहा गया कि यह युद्ध किसी के हित में नहीं है और इससे पूरे क्षेत्र को नुकसान हो रहा है।
‘ईरान में सत्ता परिवर्तन’ – बयान पर सस्पेंस
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और वहां नए लोग सामने आ रहे हैं। हालांकि, इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे स्थिति और उलझ गई है।
क्षेत्र में बढ़ती चिंता
इन सभी घटनाओं के बीच पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ बातचीत की उम्मीद जताई जा रही है, तो दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई के संकेत भी मिल रहे हैं। ऐसे में दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव शांति की ओर बढ़ेगा या और गहराएगा।





























