Dhurandhar Movie Controversy: कुछ दिनो पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर (Bollywood actress Swara Bhasker) की मां इरा भास्कर (Ira Bhaskar) ने धुरंधर जैसी फिल्मों को प्रोपेगेंडा से इन्फ्लूयेंश फिल्म कहा था। जिसे लेकर वो काफी ट्रोल भी हुई थी..उन्होंने कहा था कि धुरंधर जैसी फिल्में माहौल को खराब करती है..ये एक विशेष समुदाय का टारगेट करके बनाई गई है और पाकिस्तान औऱ मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलानी वाली फिल्म कहा था। हालांकि इरा भास्कर इस मामले में काफी ट्रोल भी हुई थी, मगर 19 मार्च को धुरंधर का सेकेंट पार्ट भी रिलीज हो गया और जैसा की उम्मीद थी इस फिल्म ने कई सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए मात्र 10 दिनों में 1000 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है।
एक तरफ इस फिल्म की जमकर तारीफ हो रही है तो कुछ लोगो को फिल्म की सक्सेस शायद हजम नहीं हो रही है। इरा भास्कर के बाद सैयारा फिल्म की हिरोइन अनीत पड्डा की बहन रीत पड्डा ने भी धुरंधर को एक प्रोपेगेंडा वाली फिल्म करार देते हुए सोशल मीडिया पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है। अपने इस लेख में जानेंगे कि आखिर सबको पसंद आने फिल्म रीत पड्डा को क्यों नापसंद आई।
क्या बोली रीत पड्डा – What did Reet Padda say?
दरअसल रीत पड्डा (Reet Padda) ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है- जिसमें उन्होंने कहा कि ‘कश्मीर फाइल्स’, ‘केरल स्टोरी’ या ‘धुरंधर’ (‘The Kashmir Files’, ‘The Kerala Story’, or ‘Dhurandhar’) जैसी वाकई में प्रोपेंगेंडा को बढ़ावा देने वाली फिल्में है। धुरंधर तो इसका सबसे बड़ा सबूत है कि ये फिल्म बीजेपी सरकार (BJP Government) के पक्ष में उनका सही नैरेटिव दिखाने की कोशिश कर रही है। सरकार के लोगो के भाषणों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो नोटबंदी जैसी चोटी रूकावट को सही करार देते है, क्या ये प्रोपेगेंडा नहीं है, बिल्कुल है..कौन इससे इंकार करेंगा..कोई नहीं।
विशेष समुदाय के खिलाफ एक नैरेटिव तैयार किया
इतनी ही द केरल स्टोरी में हजारों महिलाओं का धर्म परिवर्तन (Religion change) का आकड़ा दिखाया गया जबकि ये तो शायद कुछ सौ ही होंगे। सच्चाई तो ये है कि केवल एक टुकड़ा लिया जाता है और उसमें मनगढ़त आकड़े और कहानी डालकर उसे बड़ा बनाया जा रहा है.. और किसी एक विशेष समुदाय के खिलाफ एक नैरेटिव तैयार हो गया। जबकि जो सरकार की खिलाफ होती है उसे रीलिज ही नहीं होने दिया जाता है। रीत ने उन लोगो पर भी तंज कसा जो प्रोपेगेंडा को सही बता रहे है.. रीत ने कहा कि वो इस तरह की बातों पर ध्यान नहीं देती क्योंकि ऐसे लोगो का मन बदलने का मतलब है कि बिल्लियों को कैलकुलस सिखाना।
फिल्म की स्टोरी रियल लाइफ इवेंट से प्रेरित नहीं
लेकिन कुछ लोग मुझ पर ज्यादा ध्यान दे रहे है तो मैं उनकी जिज्ञासा शांत कर देती हूं. हालांकि ये कोई पहली बार नही है जब धुरंधर, कश्मीर फाइल्स या केरल डायरीज जैसी फिल्मों के मुद्दे पर सवाल उठे हो..लेकिन इन फिल्मों में जो भी मुद्दा उठा है क्या वो वाकई में रियल लाइफ इवेंट से प्रेरित नहीं है.. क्या वाकई में एक विशेष वर्ग के कारण सामाजिक सौहार्द प्रभावित नहीं होता.. आज कश्मीर का जो हाल है… कश्मीरी पंडितो का जो हाल हुआ..उनकी वजह कौन था.. जवाब हम सभी जानते है।
रीत पड्डा को एक युजर ने भी करारा जवाब दिया कि अगर आपकी सोच नहीं मिलती तो सीधा उन्हें प्रोपेगेंडा कहना कहां तक सहीं है.. सबकी अपनी सोच है, आजादी है। बता दें कि रीत पड्डा एक मार्केटिंक प्रोफेशनल की तरह काम करती है। और मानवाधिकारों के लिए अक्सर आवाज उठाती है। अब देखना ये होगा कि रीत पड्डा के इस रिएक्शन से अनीत पड्डा पर क्या असर पड़ता है।





























