Uttarakhand Politics: कांग्रेस पार्टी में उत्तराखंड से कई चर्चित नेताओं के शामिल होने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस मुख्यालय नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता और सदस्यता कार्यक्रम में कई नेताओं ने पार्टी का दामन थामा।
प्रमुख नेताओं की सदस्यता | Uttarakhand Politics
उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया और इसके बाद सदस्यता वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर रुद्रपुर से 2 बार के विधायक राजकुमार ठुकराल, भीमताल के चर्चित नेता लखन सिंह, घनसाली से भाजपा विधायक रहे भीम लाल आर्य, मसूरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता, सितारगंज से 2 बार के विधायक नारायण पाल और भाजपा से रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गौयल ने कांग्रेस की सदस्यता ली।
कार्यक्रम में उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी ने सभी नेताओं को पटका पहनाकर सदस्यता दिलाई। इस दौरान CWC सदस्य और कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
हरीश रावत की नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, पूर्व सीएम हरीश रावत कांग्रेस में एक व्यक्ति के शामिल न होने से नाराज हैं। रामनगर से निर्दलीय विधायक रह चुके संजय नेगी, जिन्हें हरीश रावत का करीबी माना जाता है, आखिरकार कांग्रेस में शामिल नहीं हो पाए। रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की।
भाजपा का जवाब और तंज
उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अब केवल चार लोगों की पार्टी रह गई है। उन्होंने कहा, “चाहे देहरादून में हो या दिल्ली में जॉइनिंग, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
भट्ट ने आगे कहा कि पहले कांग्रेस आरोप लगाती थी कि भाजपा के पास नेता नहीं हैं और कांग्रेस अपने नेताओं को मंत्री बना देती है। अब वही कांग्रेस भाजपा से निकले नेताओं को दिल्ली में सदस्य बना रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हमारा निकाला हुआ माल कांग्रेस ले रही है तो हम क्या कर सकते हैं?”
राजनीतिक विश्लेषण
विशेषज्ञों का मानना है कि इस जॉइनिंग से कांग्रेस उत्तराखंड में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। भाजपा से आए नेताओं की सदस्यता से पार्टी को रणनीतिक बढ़त मिली है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पिछली बार कांग्रेस कमजोर रही थी। इसके बावजूद हरीश रावत की नाराजगी और संजय नेगी का शामिल न होना पार्टी के अंदर संतुलन बनाए रखने की चुनौती पेश कर सकता है।
कुल मिलाकर, यह सदस्यता कार्यक्रम कांग्रेस के लिए राजनीतिक मजबूती का संकेत है। नए चेहरों और अनुभव का मेल पार्टी के रणनीतिक अभियानों और लोक संपर्क कार्यक्रमों में मदद कर सकता है। वहीं, भाजपा की आलोचना और पार्टी के अंदरूनी मतभेद इसे चुनौतीपूर्ण भी बना सकते हैं।



























