How ships navigate at sea| अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया में साफ दिखाई देने लगा है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है, इस वक्त चर्चा के केंद्र में है। दरअसल, दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
मौजूदा हालात में इस रूट से गुजरने वाले कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसी वजह से आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर समंदर के बीच, जहां न कोई सड़क होती है और न ही साइन बोर्ड, वहां जहाज अपनी दिशा कैसे तय करते हैं और हजारों किलोमीटर दूर का सफर कैसे पूरा करते हैं।
रेडियो और सैटेलाइट से बना रहता है संपर्क | How ships navigate at sea
समंदर में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह तकनीक और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर निर्भर करती है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील इलाके में हर मूवमेंट बेहद सावधानी से किया जाता है। जहाजों के बीच संपर्क बनाए रखने में रेडियो कम्युनिकेशन की अहम भूमिका होती है। इसके जरिए आसपास मौजूद जहाज एक-दूसरे को अपनी लोकेशन, दिशा और संभावित खतरे की जानकारी देते रहते हैं।
जब जहाज तट से काफी दूर निकल जाते हैं, तब सैटेलाइट कम्युनिकेशन काम आता है। इसकी मदद से जहाज हजारों किलोमीटर दूर बैठे कंट्रोल रूम से जुड़े रहते हैं और हर स्थिति पर नजर रखी जाती है।
एआईएस सिस्टम: हर जहाज की पूरी जानकारी
आधुनिक जहाजों में एआईएस (ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) लगा होता है। यह सिस्टम जहाज की लोकेशन, स्पीड और दिशा की जानकारी लगातार ट्रांसमिट करता रहता है। इससे आसपास के जहाज और कंट्रोल सेंटर आसानी से समझ पाते हैं कि कौन सा जहाज किस दिशा में जा रहा है। यही वजह है कि समुद्र में टकराव या रास्ता भटकने की घटनाएं काफी हद तक कम हो जाती हैं।
GPS, रडार और कंपास से तय होती है दिशा
जहाजों को सही दिशा में चलाने के लिए कई तकनीकों का एक साथ इस्तेमाल होता है। जीपीएस से जहाज की सटीक लोकेशन पता चलती है, जबकि रडार आसपास मौजूद जहाजों और किसी भी बाधा की जानकारी देता है। वहीं कंपास दिशा तय करने में मदद करता है। इन सभी सिस्टम के संयोजन से यह तय होता है कि जहाज को लेफ्ट जाना है या राइट। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियम भी होते हैं, जिनका पालन हर जहाज के लिए जरूरी होता है।
ईरान से भारत तक कैसे पूरा होता है सफर
ईरान से निकलने वाले जहाज सबसे पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करते हैं, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। इसके बाद जहाज अरब सागर में प्रवेश करते हैं और भारत के पश्चिमी तट की ओर बढ़ते हैं। आमतौर पर जहाज कांडला (गुजरात) तक करीब एक से डेढ़ दिन में पहुंच जाते हैं, जबकि मुंबई तक पहुंचने में लगभग दो दिन का समय लगता है। हालांकि मौसम, समुद्री ट्रैफिक और सुरक्षा हालात के अनुसार इस समय में बदलाव भी हो सकता है।
तनाव का असर और बढ़ती चिंता
होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर बढ़ते तनाव का असर सिर्फ जहाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है।
ऐसे में जहां एक तरफ सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक तकनीक और नेविगेशन सिस्टम की मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समुद्र में जहाज सुरक्षित और सही दिशा में अपनी यात्रा पूरी कर सकें।
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