Sikhism in Bangkok: भारत के बाहर भारतीय संस्कृति से प्रभावित अगर कोई और देश है तो वो है ग्लैमर और सांस्कृतिक धरोहर को एक साथ लेकर चलने वाला देश थाईलैंड। हालांकि आज के समय में दुनिया में थाईलैंड की पहचान बदलती जा रहीं है जिसमें थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक का नाम काफी प्रचलित है, लेकिन सही मायने में बैंकॉक को करीब से जानने वाले अच्छे से समझ सकते है।
कि बैंकॉक क्यों भारतीय के लिए बेहद खास है, खासकर बैंकॉक में रहने वाले सिखो के लिए, जो कि बैंकॉक की अर्थव्यवस्था ने भी अग्रणी भूमिका निभा रहे है। बैंकॉक में सिखो का इतिहास कई दशकों पुराना है लेकिन फिर भी वो आज एक स्थापित संगठन है। अपने इस लेख में बैंकॉक में सिखिज्म की कहानी को जानेंगे साथ ही कैसे बैंकॉक के फ़हुरत में आज करीब 100 सालों से एक मिनी पंजाब बसा हुआ है, औऱ क्यों यहां के सिखों ने दुनिया भर में अलग पहचान बनाई हुई है।
बैंकॉक के बारे में जानकारी
बैंकॉक जिसे थाई लोग क्रुंग थेप महा नखोन के नाम से बुलाते है, थाइलैंड की राजधानी और सबसे आबादी वाला शहर भी है। ये शहर चाओ फ्राया नदी के डेल्टा पर बना हुआ है, जिसकी क्षेत्रफल 1,568.7 वर्ग किलोमीटर है, वहीं 2024 तक इसकी आबादी लगभग 11.4 मिलियन के आसपास थी, जो कि थाईलैंड की आबादी का 15.9% हिस्सा है. थाईलैंड की इकॉनॉमी में बैंकॉक का योगदान काफी अहम है।
वहीं थाईलैंड की पॉलिटिक्स, , एजुकेशन, मीडिया और मॉडर्न सोसाइटी पर भी बैंकॉक का काफी प्रभाव है। बैंकॉक दुनिया के शीर्ष पर्यटन स्थलों में से एक है, जिसे मास्टरकार्ड ने लंदन से भी ज्यादा पर्यटको के आने का रिकॉर्ड दर्ज किया था। बैंकॉक में प्रॉस्टिट्यूशन टेक्निकली गैर-कानूनी है, लेकिन बावजूद इसके मौजूदा समय में विदेशों में सेक्स इंडस्ट्री में एक बड़ी डेस्टिनेशन के तौर पर फेमस हो चुका है।
जबकि मसाज पार्लर, सॉना और सस्ते होटल की सर्विस नाम दिये जाते है। बैंकॉक को “एशिया का सिन सिटी भी कहा जाता है। थाईलैंड मौजूदा समय में एक बौद्ध बहुत देश है, जिसका असल बैंकॉक में भी नजर आता है। मगर फिर भी सिखों की पहचान समेटे हुए भी एक क्षेत्र है, जहां सिख बड़े व्यापारियों के रूप में जाने जाने है।
बैंकॉक में सिख धर्म की शुरुआत
बैंकॉक मौजूदा से समय में सबसे ज्यादा वैल्यू बौद्ध धर्म को देता है, जो भारत में ही जन्म एक धर्म है लेकिन बैंकॉक में इस वक्त सिख भी काफी पावरफुल कम्युनिटी है। बैंकॉक के फाहुरत में एक प्रभावशाली सिख कम्युनीटी रहती है। जो वहीं के कपड़ा व्यापार पर राज करते है। फाहुरत थाई सिखों का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृति केंद्र है। 20 सदी की शुरुआत में 1905 में सिख मूल रूप से व्यापार के लिए थाईलैंड आये थे।
बां मोह में पहला गुरुद्वारा गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा
जिसमें उन्होंने सबसे बैंकॉक के फाहुरत को अपना स्थान बनाया। धीरे धीरे रोजगार के अवसरो को देखते हुए सिखों की संख्या यहां बढ़ने लगी, तो 1912-13 के आसपास सिखों ने अपनी कम्युनिटी को मजबूत बनाने के लिए बां मोह में पहला गुरुद्वारा गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा की स्थापना की थी जिसे 1913 को फाहुरत और चक्रपेट रोड के कोने पर आधिकारिक रूप से स्थापित किया गया।
वैसे तो पूरे थाइलैंड में करीब 70000 सिख रहते है जो कि विशेष रूप से बैंकॉक, चियांग माई और फुकेत में बसे है, लेकिन फाहुरत में सिखों द्वारा सिल्क साड़ी का व्यापार पूरी दुनिया में काफी प्रचलित है। इस स्थान को आपको भारतीय सिक्खी संस्कृति और थाई संस्कृति का खूबसूरत मेल नजर आता है। करीब 100 सालों से भी ज्यादा के इतिहास को अपने में समेटे हुए बैंकॉक के सिख यहां के रंग में रंग तो चुके है लेकिन उन्होंने अपने सिक्खी की परंपरा और संस्कृति के कोई समझौता नहीं किया है। वो यहां सिख धर्म को पूरे नियम के साथ फॉलो करते है।
बैंकॉक में भले ही बौद्ध धर्म को ज्यादा मान्यता दी जाती हो लेकिन यहां सिख धर्म को भी पूरा सम्मान दिया जाता है। आकड़ो का माने तो थाईलैंड में करीब 20 गुरुद्वारे मौजूद है। सार्वजनिक रूप से लंगर करना, नगर कीर्तन का होना, ये बताता है कि क्यों सिख धर्म अपनी अलग पहचान बनाये हुए है।
