US-Iran War News: ईरान को लेकर अमेरिका के भीतर हलचल तेज हो गई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ वरिष्ठ सलाहकार मानते हैं कि अगर ईरान पर सैन्य कार्रवाई करनी ही पड़े, तो पहला हमला इजरायल को करना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर इजरायल पहले कदम उठाता है और ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो अमेरिकी जनता के बीच भी ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने का समर्थन बढ़ सकता है।
प्रशासन के कुछ अधिकारियों का यह भी तर्क है कि यदि इजरायल अकेले हमला करे और जवाब में ईरान अमेरिका को निशाना बनाए, तो वॉशिंगटन के पास सीधा हस्तक्षेप करने का मजबूत आधार होगा। हालांकि, इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी घोषित नहीं किया गया है।
एफ-22 की तैनाती से बढ़ी अटकलें | US-Iran War News
तनाव के बीच खबर आई कि इजरायल में 12 एफ-22 लड़ाकू विमानों की लैंडिंग हुई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने पहली बार एफ-22 फाइटर जेट इजरायल भेजे हैं। इन विमानों का उद्देश्य संभावित ईरानी जवाबी हमलों से इजरायल और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
साथ ही, सूत्रों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल संयुक्त सैन्य अभियान पर भी विचार कर सकते हैं, चाहे पहला हमला कोई भी करे। पॉलिटिको की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई का पैमाना अभी तय नहीं है। लेकिन एक चिंता यह भी है कि अगर अमेरिका के हथियारों का भंडार कम हुआ, तो चीन ताइवान को लेकर आक्रामक रुख अपना सकता है।
जनरल डैन केन की चिंता
अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन संभावित सैन्य विकल्पों पर काम तो कर रहे हैं, लेकिन वे हालात को लेकर चिंतित भी हैं। सीएनएन की रिपोर्ट बताती है कि जनरल केन ने सेना, नौसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई बैठकें की हैं।
पेंटागन के अंदरूनी विमर्श में उन्होंने बड़े हमले की स्थिति में उसके पैमाने, जटिलता और अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की आशंका पर सवाल उठाए हैं। खबर यह भी है कि इराक युद्ध के बाद पहली बार मध्य पूर्व में अमेरिका ने इतना बड़ा सैन्य जमावड़ा किया है।
दिलचस्प बात यह है कि इसी बीच अमेरिका और ईरान जिनेवा में परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने की तैयारी भी कर रहे हैं। यानी एक तरफ कूटनीति, दूसरी तरफ सैन्य तैयारी दोनों रास्ते खुले रखे गए हैं।
अमेरिकी ठिकानों पर खतरा?
सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन जैसे बड़े स्तर का हमला किया गया, तो ईरान पूरी ताकत से जवाब दे सकता है। मध्य पूर्व में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकाने संभावित निशाने बन सकते हैं। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इन ठिकानों को इजरायल की ‘आयरन डोम’ जैसी सुरक्षा नहीं मिली है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।
मानवाधिकार का मुद्दा भी गरम
इसी बीच अमेरिकी सांसदों ने ईरान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर एक नया विधेयक पेश किया है। इसका मकसद इंटरनेट स्वतंत्रता को बढ़ावा देना और कथित उल्लंघन करने वालों पर सख्ती करना है।
कुल मिलाकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अंतिम सैन्य फैसला अभी नहीं हुआ है, लेकिन कूटनीतिक बातचीत और सैन्य तैयारियों के बीच संतुलन साधना ट्रंप प्रशासन के लिए आसान नहीं दिख रहा। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि हालात बातचीत से संभलते हैं या टकराव की ओर बढ़ते हैं।
