Pak-Afghan Conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने रविवार तड़के खुले सैन्य संघर्ष का रूप ले लिया। पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में एयरस्ट्राइक कर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट (ISKP) के सात ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तानी सरकार ने इसे हाल के आत्मघाती हमलों के जवाब में “इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशन” करार दिया है।
पाकिस्तान का दावा और अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया (Pak-Afghan Conflict)
पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि TTP और ISKP के हमलों की साजिश अफगान जमीन से संचालित नेटवर्क ने रची थी। वहीं, मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (IHRF) का कहना है कि इस एयरस्ट्राइक में कम से कम 16 लोग मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। पाकिस्तान की ओर से अभी तक आधिकारिक मृतकों की संख्या जारी नहीं की गई है।
तालिबान ने इस हमले का जवाब देने की चेतावनी दी है। अफगान उप गृह मंत्री और तालिबान वार्ता दल के प्रमुख Rahmatullah Nazib ने कहा कि अफगानिस्तान से बाहर किसी जंग को जायज या नाजायज नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने पाकिस्तान के सामने दो शर्तें रखीं: पहले पाकिस्तान को अपने देश में ISIS के ठिकानों को समाप्त करना होगा और उनके नेताओं को गिरफ्तार करना होगा, दूसरा, पाकिस्तानी सैन्य विमान अफगान सीमा का उल्लंघन बंद करें।
TTP का समर्थन और तालिबान का फतवा विवाद
नवंबर 2025 में पाकिस्तान ने अफगान तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा से यह मांग की थी कि वह पाकिस्तान में TTP की ओर से की जा रही जंग को गैर-इस्लामी घोषित करें। इसका मतलब था कि तालिबान खुलकर TTP के खिलाफ धार्मिक आदेश जारी करे। लेकिन तालिबान ने इसे ठुकरा दिया। तालिबान का कहना है कि “अमीर ही हुक्म देता है, फतवे नहीं। पाकिस्तान अगर फतवा चाहता है तो उसे औपचारिक आवेदन के जरिए दारुल इफ्ता जाना होगा।”
तालिबान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अफगानिस्तान से बाहर की किसी जंग में सीधा हस्तक्षेप नहीं करेगा। यही मतभेद दोनों देशों के बीच लगातार टकराव की मुख्य वजह बन गए हैं।
सीमा पर लगातार झड़पें
अक्टूबर 2025 के बाद सीमा पर झड़पों और आक्रामक गतिविधियों ने हालात और बिगाड़ दिए। कतर की मध्यस्थता में 19 अक्टूबर को एक युद्धविराम हुआ था, लेकिन इस्तांबुल वार्ता तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो पाया।
2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद TTP ने पाकिस्तान में गुरिल्ला हमले तेज कर दिए। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP को अफगानिस्तान से समर्थन मिलता है, जबकि तालिबान इसे पूरी तरह नकारता है। यही असहमति लगातार दोनों देशों के बीच तनाव की वजह बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है। सीमावर्ती एयरस्ट्राइक और झड़पों के चलते स्थानीय नागरिकों में डर और असुरक्षा बढ़ गई है। मानवाधिकार समूह इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि आम लोगों की जान जोखिम में है और बच्चों तथा महिलाओं को भी हमलों में नुकसान पहुंच सकता है।
यह तनाव पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच TTP और ISKP की गतिविधियों, धार्मिक आदेशों और सीमा उल्लंघनों से जुड़ा एक लंबा और जटिल मसला बन चुका है, जिसका हल अभी तक नहीं निकल पाया है।
