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Operation Snow Leopard: जहां पहुंचते नहीं थे सिपाही, वहां अब आतंकियों का सफाया करेंगे ‘स्नो लेपर्ड्स, सुरक्षा बलों की नई रणनीति

Nandani | Nedrick News Jammu and Kashmir Published: 25 Feb 2026, 02:10 PM | Updated: 25 Feb 2026, 02:10 PM

Operation Snow Leopard: जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीति बदल दी है। पहले जहां सक्रिय आतंकी शहरों, कस्बों और गांवों में छिपकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाते थे, वहीं अब उन्होंने पहाड़ी, दुर्गम और बर्फ से ढके इलाकों को अपना ठिकाना बना लिया है। इन ऊंचाई वाले क्षेत्रों से अचानक हमले कर वे सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

पिछले तीन सालों में कुलगाम, बारामुला, शोपियां, अनंतनाग, डोडा, भद्रवाह, किस्तवाड़, रियासी, कठुआ और राजौरी जैसे इलाकों में इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। जंगलों और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में छिपे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। ऐसे में अब पुलिस ने भी अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।

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‘स्नो लेपर्ड्स’ यूनिट का गठन (Operation Snow Leopard)

इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने “स्नो लेपर्ड्स” नाम से एक विशेष टीम तैयार की है। यह यूनिट खास तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन चलाने के लिए बनाई गई है। बताया जा रहा है कि इन जवानों को भारतीय सेना की एलीट पैरा कमांडो यूनिट्स जैसी ट्रेनिंग दी गई है और चयन प्रक्रिया भी बेहद सख्त रखी गई है।

इस विशेष यूनिट की पहली झलक तब देखने को मिली जब इसे गुलमर्ग सेक्टर में तैनात किया गया। यहां इन दिनों खेलो विंटर इंडिया गेम्स आयोजित हो रहे हैं। गुलमर्ग लाइन ऑफ कंट्रोल के नजदीक स्थित है और 2024 में यहां सेना की एक गाड़ी पर हमला भी हो चुका है। ऐसे संवेदनशील इलाके में इस यूनिट की तैनाती को सुरक्षा रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

अलग वर्दी, आधुनिक हथियार और विशेष प्रशिक्षण

‘स्नो लेपर्ड्स’ के जवानों की वर्दी सामान्य पुलिस बल से अलग है। उनके पास आधुनिक हथियार और विशेष उपकरण हैं, जो बर्फीले और घने जंगल वाले क्षेत्रों में काम आने वाले हैं। आतंक विरोधी अभियानों के लिए इन्हें खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है ताकि वे कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से ऑपरेशन चला सकें।

शुरुआत में इस यूनिट में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के जवान शामिल किए गए थे, जो पहले से ही जम्मू-कश्मीर पुलिस की एलीट एंटी-टेरर टीम मानी जाती है। अब पुलिस बल के करीब 1.25 लाख कर्मियों में से चुनिंदा जवानों का चयन कर इस यूनिट का विस्तार किया जा रहा है। हालांकि चयन के लिए कड़े शारीरिक और मानसिक मानदंड तय किए गए हैं।

चयन प्रक्रिया और टफ ट्रेनिंग

सूत्रों के मुताबिक, ‘स्नो लेपर्ड्स’ में शामिल होने के लिए जवानों को हाइट, वेट, लेग और वेस्ट रेश्यो जैसे सख्त फिजिकल मानकों पर खरा उतरना होगा। इसके साथ ही उनकी मानसिक मजबूती भी परखी जाएगी। वजह साफ है—इन जवानों को ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों और बर्फीले इलाकों में अक्सर छोटे समूहों या अकेले भी ऑपरेशन चलाने पड़ सकते हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहली यूनिट पिछले कुछ महीनों से लगातार प्रशिक्षण ले रही है। उन्हें खास तौर पर पहाड़ी और जंगल वाले इलाकों में छिपे आतंकियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है।

बदली रणनीति के जवाब में नई तैयारी

2021 के बाद से कई आतंकी हमलों में देखा गया कि हमलावर घने जंगलों में पनाह लेते हैं। हमले के बाद वे लंबे समय तक इन्हीं इलाकों में छिपे रहते हैं। पहलगाम में हुए हमले के बाद भी हमलावर जंगलों में छिपे रहे थे, जिन्हें बाद में विशेष बलों ने ऑपरेशन के जरिए ढेर किया।

वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि आतंकियों के ‘जंगल वॉरफेयर’ की ओर झुकाव को देखते हुए ऐसी विशेष यूनिट की जरूरत महसूस की गई। अब ‘स्नो लेपर्ड्स’ को घाटी और जम्मू क्षेत्र के उन हिस्सों में तैनात किया जाएगा, जहां ऊंचाई वाले या जंगल क्षेत्रों में आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट मिलेंगे।

कुल मिलाकर, यह कदम साफ संकेत देता है कि बदलती परिस्थितियों के मुताबिक सुरक्षा तंत्र भी खुद को तेजी से ढाल रहा है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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