Trending

Noida Farm House : नोएडा प्राधिकरण के मंसूबे कुछ और ही इशारा कर रहें हैं, आखिर क्यों नहीं खुली दो सालों से डूब क्षेत्र के फार्म हाउसों की रजिस्ट्री? पढ़िए ये Exclusive खबर!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 17 Jun 2022, 12:00 AM | Updated: 17 Jun 2022, 12:00 AM

नोएडा(Noida) के डूब क्षेत्र में बनें सैकड़ों अवैध फार्म हाउस पर प्रयागराज हाईकोर्ट (Prayagraj  Highcourt) ने फार्म हाउसों के मालिकों को राहत पहुंचाने वाला आदेश दिया है। क्यूंकि इनके अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जद में आ रहे थे। प्रयाग राज हाईकोर्ट ने यमुना के डूब क्षेत्र  में नोएडा के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यथास्थि‌ति बरकरार रखने के साथ ही आदेश दिया कि नोएडा के स्‍थानीय लोगों की आपत्तियों को तय किया जाए। प्रभावित होने वाले लोगों को नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) के समक्ष 10 दिन के भीतर आपत्ति प्रस्तुत करने का दिया निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने आपत्ति के निस्तारण तक मौके पर यथास्थिति बरकरार रखने को कहा है। गौरतलब है कि Prayagraj Highcourt में हरित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल व अन्य लोगों ने प्राधिकरण की ध्‍वस्तीकरण की कार्रवाई के खिलाफ याचिका लगाई थी। इन याचिकाओं में नोएडा प्राधिकरण के 8 जून 2022 के पब्लिक नोटिस को चुनौती दी गई थी। 

नोएडा प्राधिकरण की ओर से 11 जून को चला बुलडोजर 

नोएडा के यमुना के डूब क्षेत्र में आने वाले सैकड़ों  फार्म हाउसों को लेकर नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority)  ने नोटिस जारी किया था। नोटिस में प्राधिकरण ने कहा था कि ‘यमुना के डूब क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं है और उस पर किए गए सभी निर्माण अवैध हैं, उन्हें जल्द ही ध्वस्त किया जाएगा’। नोएडा प्राधिकरण अपने नोटिस के तहत करवाई करते हुए नोएडा के सेक्टर-135 के Hps फार्म हाउस समेत यमुना के डूब क्षेत्र में बनें फार्म हाउसों पर 11 जून को बुलडोजर चलाया था और कई फार्म हाउस ध्वस्त किए गए थे। जिसमें लाखों-करोड़ो का भारी नुकसान हो गया हैं। सूत्रों की मानें तो ये बुलडोजर नोएडा प्राधिकरण की CEO ऋतु माहेश्वरी (Ritu Maheshwari) के नेतृत्व से चलवाएं गए थे। इन अवैध फार्म हाउस  के मालिकों के नाम में IAS-IPS ,अफसर, नेता, न्यायधीशों , उद्दोगपतियों जैसे बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएं हैं। इस मामलें ने इन दिनों नोएडा प्राधिकरण पर भी कहीं ना कहीं सवालियां निशान खड़े कर दिए हैं। क्यूंकि अगर ये फार्म हाउस अवैध थे तो उतने दिन से नोएडा प्राधिकरण क्या कर रहा था और सबसे बड़ी बात इतनी बड़ी संख्या में अवैध फार्म हाउस कैसे निर्मित हो गए? उस समय नोएडा प्राधिकरण ने करवाई क्यों नहीं की?

Noida Farm House : नोएडा प्राधिकरण के मंसूबे कुछ और ही इशारा कर रहें हैं, आखिर क्यों नहीं खुली दो सालों से डूब क्षेत्र के फार्म हाउसों की रजिस्ट्री? पढ़िए ये Exclusive खबर! — Nedrick News

क्या नोएडा प्राधिकरण के मंसूबे कुछ और   इशारा कर रहें हैं?

नोएडा के यमुना के डूब क्षेत्र में बीते दो वर्षों से वहां रजिस्ट्री पूर्ण रूप से बंद की जा चुकी है। उसके बाद नोएडा प्राधिकरण की तरफ से ध्वस्तीकरण  किया जा रहा है। जिससे कहीं न कहीं ‘चोर की दाढी में तिनका’ वाली कहावत सही होती दिख रहीं है। इन सब से पता चलता है कि नोएडा प्राधिकरण के मंसूबे कहीं और ही इशारा कर रहें हैं। जो आने वाले दिनों में सामने ज़रूर आ सकते हैं।

Noida Farm House : नोएडा प्राधिकरण के मंसूबे कुछ और ही इशारा कर रहें हैं, आखिर क्यों नहीं खुली दो सालों से डूब क्षेत्र के फार्म हाउसों की रजिस्ट्री? पढ़िए ये Exclusive खबर! — Nedrick News

पिछले दो वर्षों से क्यों बंद थी, रजिस्ट्री 

पिछले 20 वर्षों से जिसको नोएडा  प्राधिकरण की ओर से डूब क्षेत्र में कहा जा रहा है। प्राधिकरण के द्वारा वहां सालों से जमीं की खरीद-बिक्री जारी थी। यहां तक कि सरकारी नियमों के तहत रजिस्ट्री की जा रही थी। वहां दाखिल ख़ारिज भी किया जा रहा था। जिससे धड़ल्ले से फॉर्म हॉउसों का निर्माण भी हो रहा था। लेकिन बीते दो वर्षों में नोएडा प्राधिकरण ने जमीन की रजिस्ट्री बिना कोई कारण बताएं बंद कर दी थी। आज तक रजिस्ट्री के बंद होने की वजह सामने नहीं आई। यमुना के डूब क्षेत्र में बीते सालों कोई सरकारी पैमानी नहीं आएं, जो बता सकें कि किस तरीके से इस जमीं का इस्तेमाल हो। हालाँकि रजिस्ट्री के द्वारा सरकार ने स्वयं ड्यूटी के द्वारा इन फार्म हाउसों द्वारा काफी धन अर्जित भी किया। उसके बाद अचानक इस तरीके का प्राधिकरण की ओर से ध्वस्तीकरण बिना किसी सख्त कारण के कहीं से भी जायज नहीं लगता।  

नोएडा प्राधिकरण की CEO ऋतु माहेश्वरी का बयान

Noida Farm House : नोएडा प्राधिकरण के मंसूबे कुछ और ही इशारा कर रहें हैं, आखिर क्यों नहीं खुली दो सालों से डूब क्षेत्र के फार्म हाउसों की रजिस्ट्री? पढ़िए ये Exclusive खबर! — Nedrick News

प्राधिकरण की CEO ऋतु माहेश्वरी ने एक चर्चित चैनल को इंटरव्यू देते हुए कहा है कि ‘नोएडा प्राधिकरण के डूब क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण वर्जित है, क्यूंकि यह एक नोटिफाइड एरिया है। इसमें नोएडा प्राधिकरण ही लैंड एक्वायर कर के और विकसित कर अलग-अलग लैंड यूसेस में बेचती है। लेकिन फिर भी कई लोग इन एरिया में अवैध निर्माण कर लेते हैं। यह सब एरिया सिचाई विभाग के अंतर्गत आते हैं। लेकिन इसमें नोटिस प्राधिकरण के तरफ से भी जाते हैं। कुछ लोग हैं, जिन्होनें कई प्रकार के फार्म हाउस स्कीम निकाल कर फार्म हाउसों को बेचा हैं। इन लोगों के विरुद्ध हमने समय-समय पर करवाई हुई हैं, डिमोलिशन हुई हैं और FIR भी हुई हैं। इस बार की करवाई कुछ नई नहीं है। पिछले वर्ष भी करवाई हुई थी।

हालांकि इस बार जो 15 से 20 दिनों से जो करवाई चल रहीं हैं। वह बड़े स्तर पर हो रहीं हैं। इसमें पुलिस बल और सिंचाई विभाग भी हमारे साथ होते हैं। हम इस अभियान के तहत 120 फार्म हाउस को ध्वस्त कर चुके हैं। प्राधिकरण के द्वारा कई लोगों पर FIR भी की गई हैं,जो इन फार्म हाउसों को खरीद रहें हैं और बेच रहें हैं। प्राधिकरण की ओर से पब्लिक नोटिस साफ़ कहा गया है कि इस डूब क्षेत्र में खेती के अलावा किसी भी प्रकार का निर्माण वर्जित नहीं है। हमने जनसमान्य से अपील भी की है कि इन फार्म हाउसों को ना ख़रीदे अन्यथा इन्हें ध्वस्त कर दिया जायेगा।

 अवैध फार्म हाउसों से कमाई गयी राशि 

Noida Farm House : नोएडा प्राधिकरण के मंसूबे कुछ और ही इशारा कर रहें हैं, आखिर क्यों नहीं खुली दो सालों से डूब क्षेत्र के फार्म हाउसों की रजिस्ट्री? पढ़िए ये Exclusive खबर! — Nedrick News

नोएडा के यमुना के डूब क्षेत्र में बने फार्म हाउसों के स्टंप ड्यूटी पर 19 लाख 40 हज़ार का सरकारी रेट, जिसपर प्रति बीघा अदा किया गया स्टंप जो सरकारी खाते में गया वह 87000 रुपए प्रति बीघा है। फॉर्म हाउसों के 52 हज़ार और इसके अलावा रजिस्ट्री शुल्क भी दिया गया है, जो 20 हजार 100 रुपये प्रति बिधा यानि कुल मिला कर 1 लाख 60 हजार 100 रूपये  सरकारी खाते में पर बीघा सरकार के खाते में गए हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है की सरकारी राजस्व में कितना पैसा इन फार्म हाउसों के रजिस्ट्री और रजिस्ट्री के शुल्क से सरकार ने कमाएं है। उस समय नोएडा प्राधिकरण का पैमाना कहां था। जब इतनी बड़ी रकम सरकार के खजाने में जा रहीं थी और अब फार्म हाउस पर की जाने वाली करवाई किस हद तक सही है कि इतना पैसा कमाने के बाद बिना कोई पैमाना तय किए फार्म हॉउसों का ध्वस्तीकरण किया जा रहा है। इधर फार्म हाउसों के मालिकों की निगाहें प्रयागराज हाईकोर्ट पर टिकी हैं। उन्हें विश्वास हैं कि देश का कानून उनके साथ इंसाफ करेगा। फार्म हाउसों के मालिक नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ हर तरीके से क़ानूनी लड़ाई के लिए तैयार दिख रहे हैं।

बाकी फार्म हाउस मालिक भी कोर्ट आ सकते हैं 

अदालत ने फार्म हाउस मामले की सुनवाई करते हुए बाकी अन्य फार्म हाउस मालिकों को याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दे दी है। दरअसल, नोएडा प्राधिकरण की ओर से सार्वजनिक रूप से नोटिस जारी किया गया है। जिसके आधार पर सभी फार्म हाउसों को अवैध घोषित कर दिया गया है। लेकिन अब उसी नोटिस के आधार पर बाकी फार्म हाउस मालिक भी इस केस में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने कहा है- ‘इस प्रकरण की सुनवाई में ही बाकी लोग शामिल हो जाएं। बाद में अलग से किसी की याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। मतलब साफ़ है कि इस मामले में जो अदालत का फैसला आएगा, वह बाकी फार्म हाउसों पर भी पूर्ण रूप से लागू होगा। 

अवैध फार्म हाउसों पर नोएडा प्राधिकरण की दलील 

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया था कि हमने सैकड़ों अवैध फार्म हाउस के बाहर नोटिस चस्पा कर चेतावनी दी थी। जिसमें साफ़ लिखा था कि ‘डूब क्षेत्र अर्थात खादर क्षेत्र  में स्थित सैकड़ों अवैध  बने फार्म हाउस को जल्द से जल्द खाली कर दिया जाए’। शनिवार, 11 जून को नोएडा प्राधिकरण की टीम 5 बुलडोजर के साथ 100 से ऊपर छोटे-बड़े कर्मचारी दस्ता के साथ पहुंचे थे और सभी अवैध फार्म हाउस पर शाम तक बुलडोजर चला कर तोड़ा था। नोएडा प्राधिकरण का कहना है-  डूब क्षेत्र में 500 से ज्यादा अवैध फार्म हाउस बने हुए हैं, जिसमें इससे पहले नोएडा प्राधिकरण ने 75 से ज्यादा अवैध फार्म हाउस पर अपना बुलडोजर चलाकर कई एकड़ जमीन को खाली करवाई है। जिसकी आज कीमत अरबों रुपये आंकी जा चुकी है।

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds