Jharkhand Plan Crash: जान बचाने निकले थे और खुद की जान ही गंवा बैठे। किसी की जान बचाने की जद्दोजहद और मौत के बीच का फासला महज कुछ ही मिनटों का रहा। जो दूसरों की जान बचाने का संकल्प लेकर उड़े थे, मौत ने उन सभी को एक साथ आगोश में ले लिया। झारखंड के चतरा में हुआ यह विमान हादसा चीख-चीख कर कह रहा है कि नियति के आगे इंसान बेबस है, जहां एक मरीज को नई जिंदगी देने की कोशिश, सात जिंदगियों की आखिरी उड़ान बन गई।
जानें क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि झारखंड में एयर एम्बुलेंस क्रैश का बड़ा और दुखद मामला सामने आया है। रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई।
उड़ान के कुछ देर बाद टूटा संपर्क
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि सोमवार (23 फरवरी) देर रात एयर एम्बुलेंस ने रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। लेकिन कुछ ही देर बाद विमान का रडार से संपर्क टूट गया। बाद में विमान का मलबा चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के करमाटांड़ गांव के पास घने जंगलों में मिला।
सभी 7 लोगों की मौत
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार हादसे में विमान में मौजूद सभी 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। मृतकों में शामिल हैं 1 मरीज, 1 डॉक्टर, 1 पैरामेडिक, 2 अटेंडेंट, 1 पायलट, 1 को-पायलट मृतकों के शव चतरा सदर अस्पताल में रखे गए हैं, जहां परिजन भी मौजूद हैं।
केंद्रीय मंत्री ने जताया दुख
केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। उन्होंने बताया कि अचानक मौसम खराब हो गया था और दुर्घटना की जांच कराई जाएगी। इतना ही परिवारों पर दुखो का पहाड़ टूट पड़ा है.. अटेंडेंट धुरु कुमार के पिता दिनेश कुमार ने बताया कि उनका बेटा सुबह सिमडेगा से गया था और शाम को रांची से फ्लाइट थी, लेकिन हादसे की खबर ने परिवार को तोड़ दिया।
जांच शुरू, प्रशासन मौके पर पहुंचा
नागरिक विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने हादसे की पुष्टि कर दी है। ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। यह हादसा पूरे इलाके के लिए बड़ा झटका है। मरीज को इलाज के लिए ले जा रही एयर एम्बुलेंस का इस तरह दुर्घटनाग्रस्त होना बेहद दुखद माना जा रहा है।
यह हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि उन सात परिवारों के सपनों का अंत है जिन्होंने उम्मीद की एक लौ जलाई थी। चतरा के जंगलों से उठ रहा धुआं शांत हो जाएगा, जांच की रिपोर्टें भी आ जाएंगी, लेकिन यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि क्या आधुनिक तकनीक और इंसान की कोशिशें कुदरत के कहर के आगे हमेशा ऐसे ही बेबस रहेंगी? आज उन सात जांबाजों और अपनों को खोने का गम पूरे झारखंड की आंखों में है।



























