UP Crime: लखनऊ को नवाबों का शहर कहा जाता है और उसी नवाबों के शहर लखनऊ मर्डर केस ने सबको हैरान कर दिया है। कहने को लखनऊ की इस वारदात का सिरा सिर्फ ‘पढ़ाई के दबाव’ से जुड़ा दिखता है, लेकिन सोचने वाली बात यह है कि कोई आक्रोश किसी के भीतर कितना गहरा पैठ बना चुका होगा कि वह ‘बेटा’ ही ‘काल’ बन गया? सवाल यह भी है कि क्या किसी भी स्तर का गुस्सा या मानसिक तनाव, अपने ही पिता की जान लेने जैसे जघन्य अपराध को सही ठहरा सकता है? बेशक नहीं, क्योंकि आक्रोश की कोई भी सीमा इंसानियत और कानून से ऊपर नहीं हो सकती।
हम बात नवाबों के शहर लखनऊ की कर रहे है, जहां के पॉश इलाके आशियाना में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। यहां एक बेटे ने अपने ही पिता की हत्या कर उनकी लाश के टुकड़े-टुकड़े कर दिए और धड़ को नीले ड्रम में छिपा दिया।
नीले ड्रम से खुला खौफनाक राज
आशियाना के सेक्टर-एल स्थित घर में कई दिनों से बंद कमरे से बदबू आ रही थी। पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस पहुंची तो अंदर का मंजर देखकर सन्न रह गई। मशहूर पैथोलॉजी और शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की लाश कटी-फटी हालत में नीले ड्रम के अंदर मिली। जांच में सामने आया कि इस हत्याकांड को अंजाम किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उनके 21 साल के बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने दिया था।
पढ़ाई के दबाव से शुरू हुआ विवाद
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे पिता-पुत्र के बीच पढ़ाई और नीट की तैयारी को लेकर झगड़ा हुआ। अक्षत पहले दो बार परीक्षा में असफल हो चुका था और पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बने। विवाद इतना बढ़ा कि पिता ने गुस्से में अपनी लाइसेंसी राइफल तान दी। इसी दौरान अक्षत ने राइफल छीनी और पिता के सिर में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
बहन बनी वारदात की गवाह
गोली की आवाज सुनकर घर में मौजूद 11वीं में पढ़ने वाली छोटी बहन जाग गई और उसने खून से लथपथ पिता को देखा। आरोप है कि अक्षत ने उसे धमकाकर चुप करा दिया और चार दिन तक घर में ही कैद रखा।
लाश के टुकड़े कर सबूत मिटाने की कोशिश
हत्या के बाद आरोपी ने बाजार से इलेक्ट्रॉनिक आरी और बड़ा नीला ड्रम खरीदा। उसने लाश को तीसरी मंजिल से नीचे खाली कमरे में लाकर हाथ-पैर अलग कर दिए। हाथ-पैर कार से ले जाकर पारा इलाके में फेंके गए, जबकि धड़ को ड्रम में डालकर केमिकल से गलाने की कोशिश की गई। खून से सना सामान अमौसी इलाके में जलाने की बात भी सामने आई है।
खुद ही लिखी गुमशुदगी की कहानी
पुलिस से बचने के लिए अक्षत ने थाने जाकर पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई और कहानी बनाई कि वे दिल्ली गए हैं। लेकिन जांच में कई बातें संदिग्ध मिलीं। मोबाइल की आखिरी लोकेशन घर के पास मिली, आरोपी बार-बार कार धो रहा था, सीसीटीवी में पिता घर के अंदर जाते दिखे, बाहर निकलते नहीं। जैसे-जैसे पुलिस का दबाव बढ़ा, आरोपी ने पिता के दोस्त को फोन कर कहा कि पिता ने आत्महत्या कर ली है। पूछताछ में वह टूट गया और पूरी सच्चाई सामने आ गई। तलाशी के दौरान घर से नीले ड्रम में धड़ बरामद हुआ।
बिखर गया पूरा परिवार
मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन के रहने वाले थे और उनकी पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी थी। इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया—पिता की मौत, बेटा जेल में और बेटी सदमे में है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या में इस्तेमाल राइफल, आरी और कार बरामद कर ली है, जबकि शव के बाकी हिस्सों की तलाश जारी है।





























