Gurudwaras in Dubai: अगर आपसे पूछे कि दुनिया के अमीर देशों में कौन सा देश सबसे अमीर देशों में से एक है, वहीं सबसे बड़ी बिल्डिंग बुर्ज खलीफा मौजूद है, जहां जाना सबका सपना है तो वहीं वहां का सोना इतना सस्ता है कि एक आम आदमी भी आराम से सोना पहन सकता है, हां वो अलग बात है कि सोना दूसरे देश में ले जा नहीं सकता है, इतने हिंट्स के बाद तो आप भी समझ ही गए होंगे कि हम बात कर रहे है यूएई यानि की यूनाइटेड अरब अमीरात की राजधानी दुबई के बारे में.. जो अपने सबसे लेविश लाइफ स्टाइल के लिए जाना जाता है, साथ ही एक रेगिस्तानी क्षेत्र होते हुए भी ये पर्यटन की दृष्टि में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला देश है।
बुर्ज खलीफा दुनियाभर में सबसे लंबी मैनमेड बिल्डिंग
जहां एक तरफ यहां पर बना बुर्ज खलीफा दुनियाभर में सबसे लंबी मैनमेड बिल्डिंग है, वहीं इसी दुबई में शहर के बीचों बीच बना है एक ऐतिहासिक और गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने वाला, सिख धर्म खूबसूरती और उसकी महानता की कहानी कहता गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार। दुबई का इकलौता गुरुद्वारा, जिसने सिखों को विशेष पहचान दिलाने में अहम रोल प्ले किया है। अपने एस वीडियो में हम गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार के बारे में बात करेंगे।
दुबई में करीब 50 हजार सिखों के धार्मिक विचारधारा
गुरुद्वारा गुरू नानक दरबार, सिखो के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक गुरू नानक देव को समर्पित करते हुए बनाया गया है। वैसे तो यूएई एक इस्लामिक देश है लेकिन वहां की सरकार देश में रहने वाले सभी नागरिकों को समान सम्मान और बेहतर जीवन देने की दिशा में लगातार काम कर रही है, जिसका नतीजा है कि दुबई में करीब 50 हजार सिखों के धार्मिक विचारधारा का सम्मान करते हुए यूएई की सरकार ने आधिकारिक तौर पर गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार बनाने की इजाजत दी थी। जो कि साल 2012 में बन कर तैयार हुआ था।
सुरेंदर सिंह कंधारी की देखरेख में बना गुरुद्वारा
इस गुरुद्वारे के निर्माण की सारी जिम्मेदारी 1976 से दुबई में रहने वाले सुरेंदर सिंह कंधारी ने ली थी, और उन्होंने ही अपनी देखरेख में गुरुद्वारे का निर्माण कराया था जो कि 120,000 स्क्वायर फीट ज़मीन के एक प्लॉट में बनाया गया था। वहीं इसकी डिजाइनिंग आर्किटेक्ट फर्म होलफोर्ड एसोसिएट्स ने तैयार किया था। इसका आर्किटेक्चर 2008 में पूरी हुई और 2010 में गुरुद्वारे की नींव रखी गई थी। गुरुद्वारो को सबसे हटकर बनाने के लिए टीम दुनिया भर के कई मशहूर गुरुद्वारों में गई थी।
मिडिल ईस्ट का पहला ऑफिशियल सिख गुरुद्वारा
इस गुरुद्वारो को आने वाले 100 तक मजबूती से खड़े रहने के लिए बनाया गया है। वहीं गुरुद्वारा गुरू नानक दरबार के निर्माण में करीब 65 मिलियन दिरहम (लगभग 20 मिलियन डॉलर खर्चा आया था। ये गुरुद्वारा GCC क्षेत्र और मिडिल ईस्ट का पहला ऑफिशियल सिख गुरुद्वारा है, जिसे 17 जनवरी 2012 को आम लोगो के लिए खोला गया था। इस दिन करीब 50 हजार लोग इसकी ऑपनिंग सेरेमनी में शामिल हुए थे।
प्राइम मिनिस्टर शेख मोहम्मद बिन राशिद
ये गुरुद्वारा भारत और यूएई के मधुर संबंधो की भी एक निशानी माना जाता है। हालांकि ऑफिशियल गुरुद्वारे के लिए यूएई के सिख समुदाय साल 2000 से ही लगातार कोशिश कर रहे थे। काफी मशक्कत के बाद इमामों की काउंसिल से मंज़ूरी मिली और साथ ही UAE के वाइस-प्रेसिडेंट और प्राइम मिनिस्टर शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मख्तूम ने गुरुद्वारा बनाने के लिए जमीन भी मुफ्त में दान की थी। और करीब 2.5 सालो के अथक प्रयास के बाद एक तीन मंजिला गुरुद्वारा बन कर तैयार हुआ। गुरु नानक दरबार एक मल्टी-स्टोरी फैसिलिटी है, जो कि दो बड़ी सड़कों के T-जंक्शन पर है। इस गुरुद्वारे को आप अल्ट्रा-मॉडर्न आर्किटेक्ट का अनूठा संगम कह सकते है।
सीनियर सिटिज़न्स की खास ज़रूरतों को पूरा ध्यान
ये गुरुद्वारा इतना आलीशान है कि अंडरग्राउंड कार पार्क के तीन लेवल हैं, बेसमेंट 25,000 स्क्वायर फ़ीट का है, जिसमें 140 कारों तक की पार्किंग हो सकती है। अंदर आने के लिए दो मेन एंट्रेंस हैं। वहीं तीन मंजिलों में पहले मंजिल पर डाइनिंग हॉल, किचन, पेंट्री, रिसेप्शन डेस्क, गुरुद्वारा ऑफ़िस और स्टोर रूम हैं। जूते रखने के लिए बड़ा परिसर है, औरतो और मर्दो के लिए अलग अलग स्थान बनाये गए है। सड़क के सामने एक सरोवर बना हुआ है, इसका बहता पानी गोल्डन टेम्पल के सरोवर से इंस्पायर्ड है। सीनियर सिटिज़न्स की खास ज़रूरतों को पूरा करने के लिए और फीजिकली चैलेंज्ड लोगो के लिए लिफ्ट बनाई गई है।
गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज
पहली मंजिल पर प्रेयर हॉल है, जहां गुरु ग्रंथ साहिब सोशोभित है और उनके लिए अलंकृत 24 कैरेट सोने की छतरियां भी बनी हुई है और छत पर इटली से शानदार झूमर मुरानो लगा हुआ है। गुरुद्वारे में रहने वाले रागी स्पेशन भारत के बुलाये गए है। पूरे दिन पवित्र जगह गुरबानी का पाठ यहां आपको एक अलग शांति और सूकून महसूस कराता है। गुरुद्वारे ने काफी तेजी से प्रसिद्धि पाई खास कर अप्रैल 2017 में जब गुरु नानक दरबार ने 101 देशों के 600 से ज़्यादा लोगों को एक साथ नाश्ता परोसा था तब ये रिकॉर्ड गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया था, जिससे इस गुरुद्वारे को केवल इसकी बनावट ही नहीं बल्कि उसके कार्यों के लिए भी सराहा जाने लगा। क्या आपने ये गुरुद्वारा देखा है, तो हमे कमेंट करके जरूर बतायें कि आपको ये गुरुद्वारा कैसा लगा।





























