Sikh community economic impact: सिख धर्म से जुड़ी कई कहानियां आपने पहले भी कई बार सुनी या पढ़ी होगी। सिख धर्म हमेशा से महान धर्म के रूप में प्रचलित हुआ, जो समानता के आधार पर स्थापित किया गया था। आज सिख दुनिया के जिस भी कोने में है, वो सिक्खी के परचम लहरा रहे है। कई ऐसे देश है जहां सिखो की आबादी अच्छी खासी है और वहां सिख कई दशकों से रह रहे है।
वहां न सिखो ने खुद को एक मजबूत संगठित समुदाय बनाया, बल्कि आज वो उस देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम योगदान दे रहे है। अपने इस विडियो में हम 5 ऐसे देशों के बारे में जानेंगे, जहां की अर्थव्यवस्था सिखो के योगदान के बिना अधूरी है। जो उस देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहे है। आइए जानते है कौन से है वो 5 प्रमुख देश।
टॉप 5 कंट्री जहाँ सिखों ने जमाई धाक
कनाडा (Canada) – कनाडा पूरी दुनिया में एक ऐसा देश है जो असल मायने में भारत के बाद सिखों की पहली पसंद है। कनाडा के एक हिस्से को ही नहीं बल्कि पूरे कनाडा को आप मिनी पंजाब कह सकते है। कनाडा में करीब 8 लाख सिख रहते है, जो कनाडा के अलग अलग स्थानों में रहते है। भारत का बाद सिखो की आबादी के मामले में कनाडा दूसरे स्थान पर है। इन्हें कनाडा में मॉडल माइनॉरिटी, यानि की आदर्श अल्पसंख्यक के रूप में देखा जाता है, यहां सिख केवल व्यापारिक क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि राजनैतिक और सामाजिक तौर पर भी काफी सक्रिय और अहम भूमिका निभाते है, कनाडा में सिख संघीय और प्रांतिय सरकार में अहम पदो पर है।
कनाडा के कई व्यापारी ऐसे है जो पूरी दुनिया में नाम कमा रहे है। वहीं अर्थव्यवस्था के मामले में भी ये 2.1 प्रतिशत सिख अहम माने जाते है। यहां रहने वाले सिख मुख्यता ट्रांसपोर्टेशन, फार्मिंग, AGRICULTURE, REAL ESTATE, और MANUFACTURING के क्षेत्र में सिखों ने अपना दबदवा बनाया हुआ है। ट्रक उद्योग में सिखों ने अपना आधिपत्य जमाया हुआ है, वहीं कनाडा में जो छात्र पढ़ने आते है उनमें ज्यादातर सिख छात्र ही होते है, जो वहां शिक्षा के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाते है। कनाडा में सिख एक युवा आबादी है, जिससे उनका कार्यबल बाकि कम्युनिटी से ज्यादा प्रभावशाली है। सही मायने में सिखो के बिना कनाडा उन उंचाई तक नहीं पहुंच पाता जहां वो है।
ब्रिटेन में सिखो का इतिहास 175 साल पुराना
ब्रिटेन (Britain)- इसके बाद नंबर आता है एक और पावरफुल देश ब्रिटेन का, ब्रिटेन में सिखो का इतिहास लगभग 175 साल पुराना है। जब भारत पर ब्रिटेन का राज था, लेकिन सिखो ने इस गुलामी को एक अवसर की तरह लिया और उनके ही गढ़ में अपना अधिपत्य जमाया। एक सैनिक के तौर पर ब्रिटेन में प्रवेश करने वाले सिख आज यहां की इकॉनमी को हिलाने तक की ताकत रखते है। आज ब्रिटेन में करीब 5 लाख सिख रहते है, ब्रिटेन के कई ऐसे इलाके, जैसे साउथहॉल हो गया.. वहां सिख समुदाय काफी संख्या में रहता है, जिन्हें आप मिनी पंजाब भी कह सकते है।
2014 के आकड़ो के मुताबिक केवल उसी साल सिखों ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्ता में करीब 7.63 बिलियन पाउंड का योगदान दिया था। यहां सिख ज्यादातर व्यापार को महत्व देते है और करीब 34 प्रतिशत सिख अपना बिजनस करते है। वहीं फाइनेंस के क्षेत्र में, शिक्षा के क्षेत्र में, मेडीकल और आईटी क्षेत्रों में सिखों की उपस्थिति सबसे ज्यादा है। सिख समुदाय की रोजगारी दर ब्रिटेन में करीब 84प्रतिशत है। करीब 87 प्रतिशत सिख समुदाय अपने घरो के मालिक है। ब्रिटेन में सिख समुदाय को एक मेहनतकश और सफल समुदाय माना जाता है। जो ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाते है।
यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका – United States of America
सिखो के योगदान में अमेरिका भी पीछे नहीं है। केर्लिफोर्निया जैसे क्षेत्र को तो वहां का मिनी पंजाब कहा जाता है, जहां सिखों की आबादी काफी ज्यादा है। 2020 के आकड़ो के मुताबिक अमेरिका में करीब ढाई लाख से पांच लाख तक सिख रहते है। जिसमें करीब 90.7 प्रतिशत सिख तो भारत से ही ताल्लुक रखते है। हालांकि अमेरिका में सिखो का इतिहास करीब 120 साल पुराना है जब 1904 में पहली बार सिख समुदाय रोजगार की तलाश में अमेरिका के मिलो में काम करने के लिए प्रवासी बन कर आये थे, भले ही उन्हें उस वक्त समस्याओ का सामना करना प़ड़ा हो लेकिन ये तो साफ है कि सिखों की दूरगामी सोच के कारण ही सिख न केवल अमेरिका में बसे बल्कि धीरे धीरे खुद को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत भी बनाया।
अमेरिका में सिख मुख्य रूप से परिवहन, एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी और छोटे व्यापारो के क्षेत्र में योगदान देने के साथ साथ वाइट कॉलर प्रोफेशन से भी जुड़े है जिसमें मेडिकल, इंजीनियरिंग और फाइनेंस के क्षेत्र शामिल है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका के 20 प्रतिशत ट्रक ड्राइवर सिख समुदाय से ही आते है। 2019 के आकड़े बताते है कि पूरे अमेरिका में करीब डेढ़ लाख सिख ड्राइवर थे। सिख समुदाय असल में अमेरिका का एक सफल और आर्थिक रूप से संपन्न समुदाय माना जाता है, यहां रहने वाले 75 प्रतिशत सिख सलाना 50 हजार डॉलर से ज्यादा की कमाई करते है। आर्थिक रूप से देश की उन्नति में योगदान देने के साथ साथ सामाजिक तौर पर भी सिख समुदाय अमेरिका में सिख धर्म की चमक बनाये हुए है।
अमेरिका की तरह सिख ऑस्ट्रेलिया की धरती पर फेरीवाले
ऑस्ट्रेलिया (Australia) – अगले नंबर पर एक और देश है ऑस्ट्रेलिया, जहां करीब 2 लाख दस हजार सिखो की आबादी रहती है, जो कि इसकी आबाजी की 0.8 प्रतिशत है। ऑस्ट्रेलिया से सिखो का इतिहात करीब 1800 सदी में जुड़ा था, अमेरिका की तरह सिख ऑस्ट्रेलिया की धरती पर फेरीवाले, जानवर पालक औऱ खेती बाड़ी करने वाले के रूप में आये थे। लेकिन धीरे धीरे वो इन कार्यों में कुशलता हासिल करते गए और एक सफल और मजबूत संगठन बनते गए। सिख मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया में ट्रांसपोर्टेशन, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, और व्यापार के क्षेत्र में योगदान दे रहे है।
2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया की जीडीपी में उस साल सिखो ने करीब 8.1बिलिय़न डॉलर का योगदान दिया था, जो हर साल बढ़ ही रहा है। यहां रहने वाले 65 प्रतिशत सिख काम करते है। सिख मौजूदा समय में सबसे तेजी से बढ़ता हुआ समूह है। इसके अलावा सिख पोस्टल, वेयरहाउसिंग, सोशल असिस्टेंस औऱ फूड सर्विस के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे है। समय के साथ सिखों की संख्या यहां बढ़ रही है, प्रवासी सिख छात्रों के लिए धीरे धीरे ऑस्ट्रेलिया पहली पसंद बनता जा रहा है।
एकाधिकार जमाने वाले अकेले सिख समुदाय
इटली (Italy) – अब बात करेंगे एक और खूबसूरत देश इटली की, इटली में आज के समय में दूध औऱ पनीर के उद्योग पर एकाधिकार जमाने वाले अकेले सिख समुदाय ही है, इटली में करीब 2 लाख सिख रहते है, जो मूल रूप से कृषि के क्षेत्र में खुद को स्थापित करते गए, साथ ही पशुपालन और दूध उत्पादन शुरु कर के धीरे धीरे आज उस मुकाम पर पहुंच चुके है कि अब सिखों के बिना वहां का दूध और पनीर उत्पादन का व्यापार पूरी तरह से ठप हो जायेगा।
सिखों ने इटली पर अपने हुनर का जादू चलाया और 80 के दशक में जब मूल इतावली लोग कृषि और दूध पनीर उद्योग से दूर भाग रहे थे तो ऐसे मौंके को सिखो ने भुनाया, और आज सिख समुदाय इटली का एक मजबूत समुदाय है। सिखो के बिना इटली की अर्थव्यवस्था की रूपरेखा ही बदल जायेगी। आपको बता दें, ये है वो 5 देश, जो सिखो के बिना सच में पूरे तरह से अधूरे है। इनके योगदान को चाह कर भी इग्नोर नहीं किया जा सकता है।






























