General Naravane book controversy: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों पर किताब या संस्मरण प्रकाशित करने से पहले 20 साल का अनिवार्य “कूलिंग ऑफ” पीरियड लागू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में न तो कोई औपचारिक चर्चा हुई है और न ही कैबिनेट के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव आया है।
उनका यह बयान उस समय आया है जब पूर्व थलसेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक ‘Four Stars of Destiny’ को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ी हुई है।
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पहले से मौजूद हैं गोपनीयता से जुड़े नियम : General Naravane book controversy
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में पहले से ही ऐसे नियम लागू हैं जो सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों को संवेदनशील और गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने से रोकते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि Official Secrets Act के तहत किसी भी संवेदनशील सूचना के प्रकाशन पर सख्त प्रावधान हैं और इसके लिए पूर्व अनुमति जरूरी होती है।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, सरकार सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाए रखने के पक्ष में है, लेकिन ऐसा कोई नया प्रतिबंधात्मक नियम लाने का प्रस्ताव फिलहाल नहीं है।
किताब को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
पूर्व सेना प्रमुख की किताब में चीन के साथ लद्दाख गतिरोध से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख होने की खबर के बाद संसद में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और भाजपा सांसदों के बीच लोकसभा में आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले।
हालांकि, प्रकाशक Penguin Random House India ने स्पष्ट किया है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है। कंपनी के अनुसार, किसी पुस्तक की घोषणा, उसका प्री-ऑर्डर पर उपलब्ध होना और उसका बाजार में आना तीनों अलग-अलग चरण होते हैं। केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्री-ऑर्डर दिखना यह साबित नहीं करता कि किताब आधिकारिक रूप से जारी हो चुकी है। खुद नरवणे ने भी इस स्पष्टीकरण का समर्थन किया है।
राफेल सौदे को जल्द अंतिम रूप देने की कोशिश
रक्षा मंत्री ने फ्रांस के साथ प्रस्तावित Dassault Rafale लड़ाकू विमान सौदे पर भी अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार 4 से 6 महीनों के भीतर इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि वे तो “कल ही” इस डील को पूरा करना चाहेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि रक्षा खरीद प्रक्रिया जटिल होती है और इसमें कई स्तरों की मंजूरी शामिल रहती है, जिनमें कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की स्वीकृति भी आवश्यक है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि 114 राफेल विमानों की अंतिम लागत को लेकर फ्रांस के साथ बातचीत जारी है और इसे पूरा होने में कुछ समय लग सकता है।
Su-57 और AMCA परियोजना पर क्या कहा?
रूस की ओर से पेश किए गए पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर Sukhoi Su-57 के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्री ने कहा कि फिलहाल इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।
इसके साथ ही उन्होंने भारतीय वायुसेना की महत्वाकांक्षी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) परियोजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी एयरो इंजन कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा।
सरकार का फोकस: सुरक्षा और आधुनिकीकरण
रक्षा मंत्री के बयानों से साफ संकेत मिला कि सरकार रक्षा क्षेत्र में एक ओर गोपनीयता नियमों को लेकर सख्त रुख रखे हुए है, वहीं दूसरी ओर सैन्य आधुनिकीकरण को भी प्राथमिकता दे रही है। राफेल सौदे को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की कोशिश और स्वदेशी परियोजनाओं पर जोर इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल किसी नए “कूलिंग ऑफ” नियम की योजना नहीं है, लेकिन सुरक्षा से जुड़े मौजूदा कानून पूरी तरह लागू रहेंगे।
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