महिला पत्रकारों को हिरासत में लेने का मामला: त्रिपुरा हिंसा पर गई थी रिपोर्टिंग करने, असम में किया गया डिटेन, खड़ा हुआ हंगामा!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 15 Nov 2021, 12:00 AM | Updated: 15 Nov 2021, 12:00 AM

त्रिपुरा में हाल ही में हुई सांप्रदायिक घटनाओं की वजह से वहां का माहौल तनावपूर्ण बना रहा है। इस बीच दो महिला पत्रकारों पर केस और हिरासत में लिए जाने के मामले के बाद ये मुद्दा पूरे देश में छा गया। दरअसल, त्रिपुरा में रिपोर्टिंग करने वाली दो पत्रकारों को असम पुलिस के द्वारा रविवार को हिरासत में लिया गया। उनको असम के करीमगंज के नीलबाजार से ही हिरासत में लिया गया। 

कई धाराओं में दर्ज हुआ केस

इन दोनों पत्रकारों के नाम समृद्धि सकुनिया और स्वर्ण झा है। इनके खिलाफ विश्व हिंदू परिषद के एक सपोर्टर ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद उनके खिलाफ एक्शन लिया गया। उनके खिलाफ सांप्रदायिक द्वेष फैलाने, शांति भंग करने और आपराधिक साजिश रचने से संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। उन पर आरोप लगाए गए है कि अपनी खबरों के जरिए इन पत्रकारों ने त्रिपुरा की छवि खराब की। दोनों पत्रकार एचडब्लयू न्यूज नेटवर्क से जुड़े थे। 

असम पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक पूरी रात इन पत्रकारों को सरकार द्वारा संचालित महिला आश्रय गृह में रखा गया और सोमवार सुबह त्रिपुरा पुलिस को सौंप दिया जाएगा। त्रिपुरा पुलिस के ही कहने पर असम पुलिस ने पत्रकारों को सिलचर हवाई अड्डे के रास्ते में हिरासत में लिया था। दूसरी ओर महिला पत्रकार की तरफ से पुलिस पर डराने धमकाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। 

विपक्ष ने उठाए सवाल

वहीं सोशल मीडिया पर पत्रकारों पर की गई इस कार्रवाई को लेकर खासा बवाल मचता हुआ दिख रहा है। विपक्षी पार्टियां समेत कई एक्टिविस्ट और तमाम लोग पत्रकारों पर लिए गए एक्शन को लेकर सरकार पर उंगली उठा रहे है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मामले पर एक ट्वीट किया। इस पर उन्होंने कहा- ‘भाजपा सिस्टम पत्रकारिता की हत्या में जुटा है, लेकिन झूठ के सामने सच कब रुका है?’

 

इसको लेकर यूथ कांग्रेस के नेता बीवी श्रीनिवास ने भी ट्वीट कर पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने पर चुप्पी साधने वालों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा- ‘दिल्ली की 2 युवा महिला पत्रकार त्रिपुरा के मौजूदा हालातों को कवर करने के लिए पहुंची थी। उन पर पहले गंभीर धाराओं में FIR की गई, फिर DETAIN किया गया, फिर असम से दिल्ली लौटते वक्त उन्हें करीमगंज में गिरफ्तार किया गया। आखिर NOIDA के बड़े सरकारी पत्रकार इस दमन पर खामोश क्यों है?’

वहीं एडिटर्स गिल्ड ने भी इस कार्रवाई की निंदा की है। साथ ही साथ दोनों पत्रकारों तो तत्काल रिहा करने की मांग भी की।

त्रिपुरा में आखिर हो क्या रहा है?

आपको जानकारी के लिए बता दें कि त्रिपुरा में कई दिनों से बवाल मचा हुआ है। बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों में हुई तोड़फोड़ की आंच यहां तक आई। त्रिपुरा में इसके खिलाफ कुछ रैलियां निकाली गई। जिस दौरान कुछ जगहों पर भीड़ ने दुकानों और घरों में तोड़फोड़ की। गोमती जिले में हुई रैली के दौरान पुलिस और भीड़ के बीच झड़प भी हो गई। वहीं इस दौरान ऐसी भी खबरें सामने आई कि इस पूरे बवाल के दौरान धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया। गोमती जिले में एक मस्जिद में तोड़फोड़ की खबरें सामने आई थी, हालांकि गृह मंत्रालय की तरफ से इन दावों को खारिज किया गया। 

त्रिपुरा में मचा बवाल सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं है। इसकी आंच देश के दूसरे राज्यों में भी पहुंचने लगी है। महाराष्ट्र में इसको लेकर खासा हंगामा मचा हुआ है। यहां के तीन शहरों नांदेड, मालेगांव और अमरावती में हिंसा भड़की। त्रिपुरा में हुई घटनाओं के खिलाफ बंद भी बुलाया गया था, जिस दौरान ही यहां हिंसा फैली। बवाल इतना बढ़ गया था कि अमरावती में तो दिन दिनों के लिए कर्फ्यू तक लगाने की नौबत आ गई। इस दौरान इंटरनेट सर्विस भी बंद की गई।

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