यूपी चुनाव में सपा के साथ आएंगे शिवपाल यादव या भतीजे के लिए बनेंगे 'ब्रेकर'?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 13 नवम्बर 2021, 05:30 AM Updated: 13 नवम्बर 2021, 05:30 AM
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यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में दो पार्टियां अपनी अपनी सियासी खिचड़ी पकाने में लगी है। हम बात कर रहे हैं समाजवादी पार्टी की और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 12 अक्टूबर को ही कानपुर से विजय रथ यात्रा की, तो वहीं प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल की मथुरा के वृंदावन से सामाजिक परिवर्तन यात्रा निकाली।

खैर वैसे देखें तो बात चाचा भतीजा पर आकर टिक जाती है, लेकिन यहां होड़ दोनों में ये लगी है कि आखिर दोनों में से कौन ज्यादा समाजवादी है? ये साबित करने की होड़ है।

वैसे बीते दिनों दोनों के गठबंधन की तो खूब चर्चाएं थी, लेकिन जब गठबंधन नहीं हुआ तो आशंकाएं इस बात की भी हैं कि अखिलेश की साइकिल के लिए कहीं चाचा शिवपाल यादव ‘ब्रेकर’ न बन जाएं।

अखिलेश की सपा का अच्छा खासा वजूद है, जिसे नुकसान पहुंचाने में शिवपाल कतई पीछे नहीं रहेंगे, क्योंकि उनके पास खोने को कुछ नहीं हैं तो किसी तरह के  कदम उठाने में डर भी नहीं है। सपा और प्रसपा के वर्चस्व की लड़ाई में एक बात जो गैर करने वाली है वो ये कि सपा के गढ़ में मतदाताओं की पसंद शिवपाल भी हैं।

यूपी के जो कुछ डिस्ट्रिक्ट है एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, मैनपुरी, कन्नौज, आजमगढ़, फैजाबाद, बलिया, संत कबीर नगर और कुशीनगर ये एरिया यादव बहुल हैं और कहते हैं कि ये एरिया सपा के गढ़ हैं। मुलायम सिंह यादव के साथ काफी स्ट्रगल करके शिवपाल यादव ने इस वोट बैंक को जुटाया और आज भी शिवपाल को यहां के लोग पसंद करते हैं। अब हाल ये हैं कि चाचा भतीजे में बन नहीं रही तो इसकी भारी कीमत 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा को चुकानी पड़ी।

2017 में पार्टी को बस 47 सीट ही मिलीं। फिर शिवपाल यादव ने प्रसपा (लोहिया) बनाई और जब लोकसभा चुनाव 2019 आया तो उसमें शिवपाल भी सपा से अलग रहकर कुछ खास कमाल कर नहीं पाए। अब दोनों ही पार्टियों ने 2022 के लिए तैयारी शुरू कर दी, लेकिन दोनों के रास्ते अब भी पूरी तरह से अलग हैं। अखिलेश की नजरें बुंदेलखंड की जमीन को सियासत के नजरिए से कब्जाने की फिराक में हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सामाजिक परिवर्तन यात्रा को प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव हरी झंडी दिखाई।

यहां तक कि विधानसभा की सभी 403 सीटों पर सपा पर चुनाव लड़ने को तैयार है। एक तो शिवपाल का प्रभाव ऊपर से अखिलेश की पार्टी सपा की हालत खराब, तो कही शिवपाल अखिलेश की साइकिल के ‘ब्रेकर’ तो नहीं बन जाएंगे? देखना दिलचस्प होगा।

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