गाजियाबाद: हादसे को दावत देती MMG अस्पताल की इमारत, जर्जर घोषित होने के बाद भी मरीजों का चल रहा इलाज!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 Jul 2021, 12:00 AM | Updated: 23 Jul 2021, 12:00 AM

गाजियाबाद का MMG अस्पताल…जहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज अपना इलाज कराने के लिए आते हैं। वो अस्पताल खुद ‘बीमार’ पड़ा है। MMG अस्पताल की मुख्य इमारत और पुराने आवासीय परिसर की हालत खस्ता नजर होती जा रही है। एक्सपर्ट सालों पहले ही अस्पताल की मुख्य इमारत और पुराने आवासीय परिसर को जर्जर घोषित कर चुके हैं। लेकिन बावजूद इसके गाजियाबाद प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। 

अस्पताल की हालत खराब

ये इमारत किसी बड़े हादसे को दावत दे रही है। अस्पताल की मुख्य इमारत में टीकाकरण से लेकर OPD, सीटी स्कैन, अल्ट्रा साउंड, एक्स रे जैसी गतिविधियों का संचालन हो रहा है। पुरानी जर्जर इमारत से अक्सर ही छत का प्लास्टर गिरने की घटनाएं होती रहती है। फिलहाल तो जिसकी मरम्मत कराकर ही काम चलाया जा रहा है। 

2017 में पीडब्यलूडी की एक टीम ने इस अस्पताल का निरीक्षण किया था। टीम ने तब इसे असुरक्षित घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का प्रस्ताव भी लखनऊ भेजा। लेकिन इसको लेकर बात अब तक अटकी पड़ी है।

1956 में बना था ये अस्पताल

MMG अस्पताल की इमारत सालों पुरानी हो चुकी हैं। इस अस्पताल का निर्माण 1956 में हुआ था। इमारत को बनाते समय इसमें भूकंप निरोधी तकनीक का भी इस्तेमाल नहीं हुआ। 1978 में अस्पताल परिसर में ही दो मंजिला आवासीय परिसर का निर्माण हुआ था। जिसकी हालत भी अब काफी खराब हो चुकी है। वो इस अवस्था में है कि कभी भी गिर सकता है। 

भेजा जा चुका है प्रस्ताव, फिर भी…

अस्पताल की इस पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर 500 बेड वाला नया सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल बनाने का प्रस्तावभी शासन को भेजा जा चुका है। प्रस्ताव में बताया गया है कि कुल 11 एकड़ जमीन है, जिसको मिलाकर बहुत मंजिला अस्पताल का निर्माण किया जा सकता है। जिसमें MMG अस्पताल 8 एकड़ और पुराना महिला अस्पताल 3 एकड़ जमीन पर शामिल है। साथ ही प्रस्ताव में ये भी बताया गया कि जब अस्पताल का निर्माण होगा, उस दौरान के लिए MMG अस्पताल की व्यवस्थाओं को पुराने महिला अस्पताल में संचालित किया जा सकता है। इसको लेकर कई बार पत्र भेजने के बाद भी इस पर अब तक कोई एक्शन तो नहीं लिया गया। 

अस्पताल की हालत इस वक्त काफी खराब बनी हुई है और इस जर्जर इमारत में मरीजों का इलाज भी हो रहा है। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि पुराने हादसों से सबक लेकर गाजियाबाद प्रशासन वक्त रहते इस पर कोई एक्शन क्यों नहीं ले रहा? अगर आने वाले वक्त में ना चाहते हुए भी कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? 

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