जानिए श्रीकृष्ण की भक्त इस महिला IPS ऑफिसर के बारे में…जो करती हैं समाज को बेहतर बनाने के लिए इंस्पायर!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 14 Mar 2021, 12:00 AM | Updated: 14 Mar 2021, 12:00 AM

जयपुर निवासी एक स्टूडेंट जो कि कृष्ण के दर्शन से इतनी प्रभावित हुई कि उनकी भक्त बन गई। इस स्टूडेंट की पहचान बस इतनी नहीं है बल्कि एक के बाद एक कामयाबी के परचम को इस स्टूडेंट ने अपने आगे की लाइफ को बुलंद किया है। इंसानियत की मिसाल पेश की है और समाज में एक ऐसा एग्जांपल पेश किया, जिससे लोग काफी वक्त तक इंस्पायर होते रहेंगे। वो एक महिला IPS ऑफिसर हैं जिनका नाम तो लड़कों वाला है लेकिन काम एक सच्चे और ईमानदार ऑफिसर के जैसा। ये महिला IPS ऑफिसर हैं असलम खान। चलिए आज असलन खान को जानते हैं। 

नाम के पीछे दिलचस्प कहानी

पहले आते हैं नाम पर, असलम खान का नाम यूं ही ये नहीं पड़ गया बल्कि इसके पीछे भी छोटी सी स्टोरी है। हुआ ये कि पिता को पुत्र के पैदा होने की उम्मीद पर पैदा लड़की हो गई। बच्चे का नाम पिता ने बच्चे के जन्म से पहले ही सोच लिया था। लेकिन जब बेटी पैदा हुई तो उसका ही नाम असलम रख दिया गया। उसकी परवरिश में पिता ने कोई कमी नहीं छोड़ी, बेहतर शिक्षा दी गई। इसका ये परिणाम हुआ कि साल 2007 में आईपीएस अफसर बन गई। दिल्ली के उत्तर पश्चिमी जिला में असलम खान पुलिस उपायुक्त के पद पर भी रही है। असलम के नाम का मतलब है महफूज़ और अपने नाम को वो बकायदा फुलफिल भी करती है। बड़ी ही बखूबी से वो लोगों को महफूज़ करने की जिम्मेदारी को निभा रही हैं। असलम के पति है पंकज कुमार सिंह जो कि 2008 बैच IPS ऑफिसर है और दिल्ली में ही पूर्वी जिले के डीसीपी रहे हैं। 

इस परिवार को भेजती है अपना आधा वेतन

साल 2018 की बात है तब असलम जुड़ी एक बात काफी चर्चाओं में थी कि International border पर बसे सुचेतगढ़ गांव की एक फैमिली को असलम खान पिछले कई महीनों से अपने वेतन का आधा भाग उस फैमिली को भेजती है वो भी फैमिली से बिना मिले। यहां तक कि हर तीसरे दिन फैमिली  को कॉल करके हाल भी जानती है। दरअसल असलम के जूरिसडिक्शन में ही जम्मू के एक ट्रैक ड्राईवर मान सिंह का 9 जनवरी 2018 को दिल्ली के जहांगीरपुरी में लूट की नीयत से उसका कत्ल कर दिया गया और मान सिंह ही 5 सदस्यों वाली फैमिली में अकेले कमाने वाले शख्स थे। असलम को इस बारे में जब पता चला तो उन्होंने परिवार परिवार तो सहारा दिया, हौसला दिया, फैमिली की मदद कर इंसानियत की मिसाल पेश की।  

एक बार की बात है जब आईपीएस की ट्रेनिंग के वक्त एक समारोह था पुलिस अकादमी में जिसके लिए महिला ऑफिसर्स को साड़ी पहननी थी और गुलदस्ता देकर चीफ गेस्ट को वेलकम करना था पर असलम ने ये कहा कि कोई सजावट की वस्तु नहीं है महिला। इतना ही नहीं असलम ने ऐसा करने से बिल्कुल मना कर दिया। 

असलम खान अपने काम के प्रति इतनी सीरियस हैं उनके एरिया में उनकी तूती बोलती है। उसकी बहादुरी का हर कोई लोहा मानता है। जब वो अंडमान में एसपी पद पर थीं तो पोर्ट ब्लेयर की नगरपालिका में जो भ्रष्टाचार जारी थी उसका उन्होंने भंडाफोड़ किया था।

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