ओणम कब और कैसे मनाया जाता है, जानिए इसके पीछे का इतिहास

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 05 सितम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 05 सितम्बर 2025, 05:30 AM
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History About Onam: ओणम, जिसे मलयालम में ‘थिरुवोनम’ भी कहा जाता है, केरल (Kerala) का सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहार है। यह दस दिनों तक चलने वाला फसल उत्सव है जो राजा महाबली के स्वागत में मनाया जाता है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे हर साल पाताल लोक से अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आते हैं। यह त्योहार न केवल केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि सद्भाव, समृद्धि और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। तो चलिए आपको इस लेख में ओणम के बारे में विस्तार से बताते हैं।

ओणम का इतिहास और महत्व

ओणम (Onam) का त्यौहार राजा महाबली (King Mahabali) के पाताल लोक से पृथ्वी पर अपनी प्रजा से मिलने के लिए लौटने की याद में मनाया जाता है। यह मलयालम (Malayalam) कैलेंडर के चिंगम महीने में मनाया जाने वाला दस दिवसीय फसल उत्सव भी है। यह त्यौहार अच्छी फसल के लिए प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है। ओणम उत्सव केरल में नई फसलों के आगमन का समय होता है। धान की बालियाँ पकने लगती हैं और प्रकृति हरियाली से आच्छादित हो जाती है। इसलिए इसे फसल उत्सव भी कहा जाता है।

ओणम वह समय है जब केरल की कला और परंपराएँ अपनी संपूर्णता में प्रतिबिम्बित होती हैं। फूलों की सजावट, नाव दौड़, ओणम सद्या (भव्य भोज), पुलिकली (बाघ नृत्य), कथकली और तिरुवथिरा जैसे लोक नृत्य इस उत्सव को और भी भव्य बनाते हैं।

राजा महाबली और वामन अवतार 

राजा महाबली एक अत्यंत न्यायप्रिय और दानशील राक्षस राजा थे, जिनकी प्रसिद्धि से देवता ईर्ष्या करते थे। देवताओं की सहायता के लिए, भगवान विष्णु ने वामन (एक बौने ब्राह्मण) का रूप धारण किया। उन्होंने राजा महाबली से दान में केवल तीन पग भूमि माँगी। वामन का छोटा कद देखकर राजा ने तुरंत दान देने की हामी भर दी।

अपने गुरु शुक्राचार्य की चेतावनी के बावजूद, राजा महाबली अपने वचन से नहीं हटे। दान देने का वचन देते ही, वामन ने अपना विशाल त्रिविक्रम रूप धारण कर लिया। उन्होंने एक पग में पृथ्वी और दूसरे पग में आकाश नाप लिया। जब तीसरे पग के लिए कोई स्थान नहीं बचा, तो राजा महाबली ने अपना सिर झुका लिया।

राजा महाबली की उदारता

राजा की उदारता और प्रतिबद्धता से प्रसन्न होकर, भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक भेजा और उन्हें वरदान दिया कि वे वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आ सकते हैं। इस दिन को ओणम के रूप में मनाया जाता है, जहाँ लोग अपने प्रिय राजा महाबली का स्वागत करते हैं।

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