SCO Summit China 2025: पहलगाम पर खामोशी क्यों? SCO में मोदी का कड़ा प्रहार – ‘आतंक का समर्थन कैसे मंजूर हो सकता है?’

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 01 सितम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 01 सितम्बर 2025, 05:30 AM
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SCO Summit China 2025: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को लेकर जो बातें कहीं, वो साफ-साफ बता रही थीं कि अब भारत इसे हल्के में नहीं लेने वाला। चीन के तियानजिन में हुए इस बड़े सम्मेलन में उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि कुछ देश जो आतंकवाद को खुलेआम समर्थन दे रहे हैं, उन पर सवाल उठना ज़रूरी है।

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पीएम मोदी ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें कई लोगों की जान गई। उन्होंने कहा, “भारत चार दशकों से आतंकवाद का दर्द झेल रहा है। कितनी ही मांओं ने अपने बेटे खोए हैं, और न जाने कितने बच्चे अनाथ हो गए। पहलगाम में जो हमला हुआ, वो सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए एक चुनौती है।”

“आतंकवाद पर कोई ‘अगर-मगर’ नहीं” SCO Summit China 2025

मोदी ने साफ कर दिया कि आतंकवाद पर दोहरा रवैया अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना था, “हमें मिलकर आतंकवाद के हर रूप का विरोध करना होगा। ये केवल हमारी सुरक्षा का सवाल नहीं, बल्कि इंसानियत की जिम्मेदारी है।”

उन्होंने ये भी बताया कि भारत ने इस साल एससीओ के तहत अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों पर एक संयुक्त सूचना अभियान चलाया, जिससे काफी अहम जानकारियाँ सामने आईं। इसके अलावा टेरर फंडिंग और कट्टरपंथ के खिलाफ भी भारत ने समन्वित प्रयासों का प्रस्ताव रखा, जिसे कई देशों ने समर्थन दिया।

कनेक्टिविटी सिर्फ सड़कें नहीं, भरोसे का रास्ता भी है

सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, पीएम मोदी ने कनेक्टिविटी को भी बड़ी प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि मजबूत कनेक्टिविटी से न सिर्फ व्यापार बढ़ता है, बल्कि देशों के बीच भरोसा और आपसी समझ भी गहराती है। उन्होंने भारत के चाबहार पोर्ट और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स का ज़िक्र किया, जिनसे अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ संपर्क बढ़ रहा है।

लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि किसी भी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट में देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए, ये एससीओ के सिद्धांतों में शामिल है।

“अवसरों के दरवाज़े खोलना चाहता है भारत”

एससीओ की तीसरी प्राथमिकता यानी “Opportunity” पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान कई नए विषयों को सामने लाया जैसे स्टार्टअप्स, पारंपरिक चिकित्सा, डिजिटल समावेशन और युवा सशक्तिकरण।

उन्होंने एक खास सुझाव भी दिया कि एससीओ के तहत एक “सभ्यतागत संवाद मंच” (Civilizational Dialogue Forum) बनाया जाए, जहां सदस्य देश अपनी सभ्यताओं, कलाओं और परंपराओं को साझा कर सकें।

‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ – भारत की राह

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विकास यात्रा का भी जिक्र किया और बताया कि देश किस तरह “रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म” के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “कोविड और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भी भारत ने मौके तलाशे और उन्हें अवसर में बदला। हम हर स्तर पर सुधार की कोशिश में जुटे हैं और ये सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि साझेदारी और सहयोग के नए रास्ते खोलने के लिए है।”

उन्होंने सभी देशों को भारत की विकास यात्रा से जुड़ने का न्योता भी दिया।

नई चुनौतियों से निपटने के लिए चार नए केंद्र

सम्मेलन में पीएम मोदी ने संगठित अपराध, नशे की तस्करी और साइबर सिक्योरिटी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ द्वारा चार नए क्षेत्रीय केंद्र बनाने के फैसले का स्वागत किया।

साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए UN में सुधार की वकालत की। उन्होंने कहा कि अगर ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को नजरअंदाज किया गया, तो ये भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।

किर्गिजस्तान को अध्यक्षता की बधाई

समापन पर पीएम मोदी ने एससीओ की अगली अध्यक्षता संभालने वाले किर्गिजस्तान के राष्ट्रपति सदर जपारोव को शुभकामनाएं दीं और कहा, “हमें भरोसा है कि आपके नेतृत्व में संगठन और आगे बढ़ेगा। भारत सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर, पूरी प्रतिबद्धता से काम करता रहेगा।”

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