Ajit Doval Spy Story: पाकिस्तान में 7 साल तक जासूसी करने वाला ‘भारतीय जेम्स बॉन्ड’, एक बार खुद फंस गए थे धर्म संकट में

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 11 May 2025, 12:00 AM | Updated: 11 May 2025, 12:00 AM

Ajit Doval Spy Story: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक नाम बार-बार सामने आ रहा है — अजीत डोभाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा बैठक हो या फिर सेना के तीनों प्रमुखों के साथ रणनीतिक चर्चा, हर तस्वीर में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। इसकी वजह भी साफ है — देश की सुरक्षा नीति की योजना से लेकर उसके ज़मीनी क्रियान्वयन तक, हर पहलू की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है।

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अजीत डोभाल को यूं ही ‘भारत का जेम्स बॉन्ड’ नहीं कहा जाता। उनके पास जासूसी, रणनीतिक नीति, कूटनीति और खतरे से खेलने का वो अनुभव है जो दुनिया में गिने-चुने लोगों को ही हासिल होता है। भारत के सुरक्षा तंत्र में उनका योगदान इतना अहम है कि आज अगर देश सीमाओं पर आत्मविश्वास से खड़ा है तो उसकी पृष्ठभूमि में डोभाल की सोच और योजना होती है।

पाकिस्तान में 7 साल तक गुप्त मिशन- Ajit Doval Spy Story

बहुत कम लोग जानते हैं कि अजीत डोभाल एक समय भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (Research and Analysis Wing) के लिए पाकिस्तान में सात साल तक गुप्त एजेंट के रूप में कार्य कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने बिना अपनी पहचान उजागर किए दुश्मन की ज़मीन पर रहते हुए भारत के लिए बेहद अहम सूचनाएं जुटाईं और कई ऑपरेशनों को अंजाम तक पहुंचाया। लेकिन इस खतरनाक मिशन के दौरान एक बार उनकी असलियत उजागर होने की नौबत आ गई थी।

जब पहचान के कारण फंस गए धर्म संकट में

इस घटना का जिक्र खुद अजीत डोभाल ने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान किया था। उन्होंने बताया कि वह उस समय पाकिस्तान के लाहौर शहर में एक मजार के पास रुके हुए थे, जहां एक अजनबी उनके पास आया और संदेह जताते हुए सीधा सवाल दागा: “क्या तुम हिंदू हो?” डोभाल ने तुरंत इंकार किया, लेकिन मामला वहीं नहीं रुका।

वह व्यक्ति उन्हें एक कमरे में ले गया और कान की तरफ इशारा करते हुए कहा, “तुम्हारे कान छिदे हुए हैं, ये केवल हिंदू ही करवाते हैं।” ऐसे में अजीत डोभाल को स्थिति को संभालते हुए यह स्वीकार करना पड़ा कि वह हिंदू हैं। दिलचस्प बात यह रही कि वह व्यक्ति भी एक हिंदू निकला, जो भेष बदलकर पाकिस्तान में रह रहा था। उसने अजीत डोभाल को सलाह दी कि कान की प्लास्टिक सर्जरी करवा लें ताकि आगे पहचान का खतरा न रहे।

निडरता और रणनीति का दूसरा नाम

यह किस्सा न केवल अजीत डोभाल की बहादुरी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह उन्होंने हर मोड़ पर खतरे को चतुराई और धैर्य से संभाला। पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश में सात साल तक बिना पकड़े रहना, और वहां से अहम जानकारियों के साथ सुरक्षित वापस लौटना — ये किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन डोभाल की असल ज़िंदगी इससे भी कहीं ज्यादा रोमांचक और प्रेरणादायक है।

आज भी देश की सुरक्षा का मजबूत स्तंभ

NSA अजीत डोभाल न केवल भारत की रक्षा रणनीति के प्रमुख स्तंभ हैं, बल्कि देश के लिए चल रहे हर बड़े ऑपरेशन की पृष्ठभूमि में उनकी सक्रिय भूमिका होती है। ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों में भी उनकी रणनीति और सूझबूझ का अहम योगदान माना जा रहा है।

आज जब सीमा पर तनाव कम हो रहा है, तब भी डोभाल जैसे रणनीतिकार भारत की सुरक्षा के लिए सतर्क और सजग हैं — पर्दे के पीछे से, लेकिन पूरी ताकत से।

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