Mini Punjab of Karnataka: कर्नाटक में बस रहा है मिनी पंजाब, जानें बीदर और बेंगलुरू में सिख समुदाय की बढ़ती संख्या

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 Mar 2025, 12:00 AM | Updated: 23 Mar 2025, 12:00 AM

Mini Punjab of Karnataka: कर्नाटक, एक दक्षिण भारतीय राज्य, अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि, राज्य के कुछ हिस्सों में सिख समुदाय ने अपनी अद्वितीय पहचान बनाई है, और विशेष रूप से बीदर और बेंगलुरु में इसे “मिनी पंजाब” के रूप में जाना जाता है। पिछले 80 वर्षों से सिख समुदाय ने इस क्षेत्र को अपना घर बना लिया है, और बीदर का गुरुद्वारा श्री गुरु नानक झिरा साहिब इस समुदाय की धार्मिक आस्था का प्रतीक है। लेकिन अब यह समुदाय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो उसकी भविष्य पीढ़ियों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही हैं।

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बीदर में सिखों का इतिहास- Mini Punjab of Karnataka

बीदर में सिख समुदाय की उपस्थिति की शुरुआत 1940 के दशक के आसपास हुई, जब गुरुद्वारा श्री गुरु नानक झिरा साहिब की नींव रखी गई। यह गुरुद्वारा न केवल कर्नाटक में, बल्कि भारत भर में सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। इसके साथ ही, बीदर सिखों के लिए एक शैक्षिक केंद्र भी था, जहां हजारों छात्र गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य शैक्षिक संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करते थे। 1980 के दशक में, बीदर में सिखों की संख्या 10,000 से 15,000 तक थी, और इस समुदाय का यहां बड़ा आर्थिक और सामाजिक प्रभाव था।

Mini Punjab of Karnataka
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गिरती आबादी और पलायन

लेकिन समय के साथ, सिख समुदाय की संख्या में गिरावट आई है। 1980 के दशक के अंत में सिख विरोधी दंगों के बाद, बीदर में सिख छात्रों की आमद में कमी आई। 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद यहां के छात्रों की संख्या में कमी आई और अन्य स्थानों पर अधिक शैक्षिक और व्यावसायिक अवसरों ने सिखों को बीदर से बाहर जाने के लिए मजबूर किया। अब बीदर में सिख समुदाय की संख्या घटकर 5,000 से भी कम हो गई है, और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यह संख्या 1,500 से भी कम हो सकती है।

बीदर में सिख समुदाय के लिए मुख्य कारण यह है कि यहां शैक्षिक और व्यावसायिक अवसरों की कमी है। गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य शैक्षिक संस्थान पहले के मुकाबले उतने आकर्षक नहीं रहे, और यहां के बुनियादी ढांचे में भी बहुत सुधार नहीं हुआ है। नतीजतन, युवा सिख पीढ़ी को बेहतर अवसरों की तलाश में हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर पलायन कर रही है।

55 वर्षीय व्यवसायी मनप्रीत सिंह, जो गुरुद्वारा कार्यकारी समिति के सदस्य भी हैं, ने बताया कि “हमारे समुदाय का बीदर में रहना आस्था पर आधारित है, लेकिन शिक्षा और औद्योगिकीकरण के अवसरों की कमी ने हमें यहां से बाहर जाने के लिए मजबूर किया है।” उन्होंने कहा कि “आजकल हमारे समुदाय की औसत आयु 65 साल हो गई है।” वे बताते हैं कि यहां बहुत कम सरकारी नौकरियां हैं और अधिकांश लोग छोटे-मोटे व्यवसायों या गुरुद्वारे की सेवाओं में काम करते हैं।

गुरुद्वारा और इसकी भूमिका

गुरुद्वारा श्री गुरु नानक झिरा साहिब बीदर के सिख समुदाय का एकमात्र प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह गुरुद्वारा देशभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और भारतीय सिखों के पवित्र तीर्थ स्थलों की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुरुद्वारे के विकास के लिए 2009 से 2014 तक 136 करोड़ रुपये का खर्च किया गया, लेकिन इसके आसपास के क्षेत्र में कोई खास सुधार नहीं हुआ। इसके बावजूद, बीदर के सिख समुदाय को इस गुरुद्वारे के कारण एक स्थिर धार्मिक आधार मिला हुआ है।

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मनमीत सिंह, जो गुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी (पुजारी) हैं, बताते हैं, “बीदर में हमारे लिए अब अपने भाइयों और बहनों को बनाए रखना मुश्किल हो गया है, क्योंकि वे अन्य स्थानों पर अवसरों की तलाश में हैं।” मनमीत के परिवार के सदस्य चार पीढ़ियों से इस गुरुद्वारे से जुड़े हुए हैं, और वे बीदर को अपना घर मानते हैं। हालांकि, वे बताते हैं कि “हमारे छोटे भाई ने घर लौटने की कोशिश की, लेकिन नौकरी की कमी के कारण वह यहां नहीं रह पाया।”

बेंगलुरु में सिख आबादी

बीदर की तरह बेंगलुरु में भी काफी बड़ी सिख आबादी है। 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 13,254 सिख रहते हैं। यहां सिख धर्म के अनुयायियों के लिए गुरुद्वारे एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र हैं, जहां वे न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बनाए रखते हैं।

कर्नाटक के प्रमुख गुरुद्वारे

कर्नाटक में सिखों के लिए कई प्रमुख गुरुद्वारे हैं, जो उनके धार्मिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

  1. गुरुद्वारा साहिब ईजीपुरा, छावनी एग्राम
  2. गुरुद्वारा साहिब, अरमान नगर
  3. गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, सोमेश्वरपुरा
  4. गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब संघ, नगराथपेटे
  5. सीआरपीएफ गुरुद्वारा साध संगत, येलाहंका

ये गुरुद्वारे न केवल पूजा के स्थल हैं, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सेवा, सामूहिक भोजन (लंगर) और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी अनुभव मिलता है। बेंगलुरु और उसके आसपास स्थित गुरुद्वारे इस समुदाय के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बने हुए हैं।

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