UP Election 2022: ‘सपा घोर स्वार्थी, संकीर्ण और दलित विरोध, इसीलिए बड़ी पार्टियां नहीं कर रही गठबंधन’

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 02 Jul 2021, 12:00 AM | Updated: 02 Jul 2021, 12:00 AM

उत्तर प्रदेश में साल 2022 के शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। जिसे लेकर राजनीतिक पार्टियां अभी से ही अपनी तैयारियों में लग गई है। आरोप-प्रत्यारोप के दौर शुरु हो चुके हैं। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने वाली है। जबकि समाजवादी पार्टी छोटे दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी। पार्टी पहले ही इस बात का ऐलान कर चुकी है। 

इसी बीच बीएसपी चीफ मायावती ने समाजवादी पार्टी पर कई बड़े आरोप लगाए हैं और सपा को दलित विरोधी पार्टी बताया है। उन्होंने कहा है कि सपा घोर दलित विरोधी है। इसीलिए कोई भी बड़ी पार्टी उनके साथ गठबंधन के लिए तैयार नहीं है। इसीलिए उसे छोटे दलों का सहारा लेना पड़ रहा है।

…बड़ी पार्टियों ने कर लिया है सपा से किनारा

बीएसपी सुप्रिमो ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लगातार कई ट्विट करते हुए सपा को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, ‘सभी जानते हैं कि समाजवादी पार्टी घोर स्वार्थी, संकीर्ण और ख़ासकर दलित विरोधी सोच वाली पार्टी है। उसके काम करने के तरीके और कड़वे अनुभवों का शिकार बनकर देश की अधिकतर बड़ी और प्रमुख पार्टियों ने चुनाव में इनसे किनारा करना ही ज़्यादा बेहतर समझा है।‘

मायावती ने अपने अगेल ट्विट में कहा, ‘यही वजह है कि समाजवादी पार्टी आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव अब किसी भी बड़ी पार्टी के साथ नहीं बल्कि छोटी पार्टियों के गठबंधन के सहारे ही लड़ेगी।‘

उन्होंने सपा को निशाने पर लेते हुए यह भी कि ‘ये सपा की महालाचारी है। क्योंकि कोई भी दल उनके साथ गठबंधन के लिए तैयार ही नहीं है ऐसे में सपा को छोटे दलों से ही गठबंधन करना होगा।‘

मार्च-अप्रैल 2022 में होने वाले हैं चुनाव

बताते चले कि मार्च 2021 में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करेगी, क्योंकि बड़ी पार्टियों के साथ गठबंधन फायदेमंद नहीं रहा है। इसीलिए अगले चुनाव में छोटी पार्टियों को तवज्जो दी जाएगी। 

गौरतलब है कि राज्य में मार्च-अप्रैल 2022 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। जिसे लेकर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में हलचलें तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि यह चुनाव बीजेपी के लिए आसान नहीं होने वाला है। ऐसे में यूपी की जनता किस पार्टी पर भरोसा जताएगी, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा।

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