Who is Jacky Yadav: जानें संघर्ष से सफलता तक की अनसुनी कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 18 Dec 2024, 12:00 AM | Updated: 18 Dec 2024, 12:00 AM

Web profile of Jaiky Yadav: भारतीय सोशल मीडिया जगत की उभरती हस्ती जैकी यादव ने अपने विचारपूर्ण पोस्ट और ‘तर्क साहित्य’ नामक एक मंच के संस्थापक के रूप में डिजिटल दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव के रहने वाले जैकी यादव की कहानी संघर्ष और दृढ़ता की मिसाल है। जैकी यादव ट्विटर पर विशेष रूप से सक्रिय हैं, जहां वे सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर अपने विचार साझा करते हैं। उनकी पोस्ट्स में गहराई और विश्लेषण की झलक मिलती है, जो उनके अनुयायियों को सोचने पर मजबूर करती है। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली है, जो व्यापक दर्शकों तक पहुंचती है।

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प्रभाव और मान्यता- Web profile of Jaiky Yadav

उनकी ऑनलाइन सक्रियता ने उन्हें एक प्रभावशाली व्यक्तित्व बना दिया है। विभिन्न मीडिया आउटलेट्स और प्लेटफ़ॉर्म्स ने उनके कार्यों की सराहना की है। अपने हालिया पॉडकास्ट में उन्होंने अपने विचारों, दृष्टिकोण और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की है।

हालिया साक्षात्कार और उनके विचार

हाल ही में जैकी यादव Samajwadi Party: Prahari नाम के Youtube चैनल के पॉडकास्ट में नजर आए। इस पॉडकास्ट में उन्होंने अपने जीवन, संघर्षों और पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि कैसे वित्तीय बाधाओं ने उनकी पढ़ाई में रुकावट डाली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और ट्विटर पर अपनी नई पहचान बनाई।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

उत्तर प्रदेश के रहने वाले जैकी यादव ने 12वीं के बाद पत्रकार बनने का सपना देखा। लेकिन वो किसी कारणवश पूरा नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने नोएडा के एक कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन वित्तीय कठिनाइयों के कारण उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई और उन्हें वापस गांव लौटना पड़ा। 2019 में, उन्होंने अपने मामा के बेटे का ट्विटर अकाउंट देखा और इससे उन्हें न्यूज़ कंटेंट शेयर करने का विचार आया।

ट्विटर का सफर

इसी बीच 2019 से 2021 तक UPSC तैयारी शुरू कर दी। तैयारी के दौरान उन्होंने ट्विटर पर ट्रेंड को समझा और उसका उपयोग अपनी पढ़ाई के लिए किया। कड़ी मेहनत के बावजूद, वह यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में कुछ अंकों से चूक गए। इसके बाद, उन्होंने ट्विटर की ओर अपना रुख किया और वहां कंटेन्ट बनाने के बारे में सोचा। इसके बाद उन्होंने साहित्य के लिए काम करने की सोची और साहित्य के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाया। पहले उन्होंने एक कविता प्रकाशन करने वाले एक ट्विटर अकाउंट से संपर्क किया ताकि दोनों साथ मिलकर काम कर सकें लेकिन जब वहां बात नहीं बनी तो उन्होंने अपना खुद का अकाउंट ‘तर्क साहित्य’ बना लिया।

‘तर्क साहित्य’ की स्थापना

जैकी यादव (Who is Jacky Yadav) के ‘तर्क साहित्य’ (Tark Sahitya) का उद्देश्य साहित्यिक और तार्किक चर्चाओं को बढ़ावा देना है। यह मंच लेखकों, विचारकों और पाठकों को एक साथ लाता है, जहां वे विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा कर सकते हैं और स्वस्थ बहस में भाग ले सकते हैं। ‘तर्क साहित्य’ ने कम समय में एक सक्रिय और जागरूक समुदाय तैयार कर लिया है। और जल्द ही उनके प्लेटफॉर्म  को ट्विटर पर अच्छी रीच मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने अपना साल 2019 से बंद पड़ा ट्विटर अकाउंट फिर से शुरू किया और उस पर समाचार से जुड़ी खबरों पर अपने विचार देने लगे। लोगों ने उनकी राय को सराहा और इस तरह उनके ट्विटर की प्रसिद्धि शुरू हो गई।

मशहूर मामले और चर्चाएं

जैकी यादव ने कई बार ऐसे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे उठाए हैं, जिन्होंने बड़ी बहस छेड़ी। उनका कहना है कि उनके द्वारा किए गए गहन शोध के बावजूद उन्हें क्रेडिट नहीं दिया जाता। जैकी यादव ने पॉडकास्ट में कहा कि वो ट्विटर पर बहुत मेहनत करते हैं लेकिन उन्हें इसका क्रेडिट नहीं दिया जाता है। वो कहते हैं कि कई बार ऐसा हुआ है कि वो और उनकी टीम बहुत रिसर्च करके कोई टॉपिक उठाती है और उस पर नेशनल लेवल पर खबरें बन जाती हैं लेकिन उन्हें कभी इसका क्रेडिट नहीं दिया जाता। जैसे जया किशोरी केस जिसमें वो 2 से 2.5 लाख का बैग लेकर जा रही थी। इस बैग को लेकर कई खबरें छपीं और जया किशोरी को ट्रोल किया गया और इस खबर को हाईलाइट किया गया लेकिन जैकी यादव को कभी कोई क्रेडिट नहीं मिला कि उन्होंने सबसे पहले इस टॉपिक को उठाया।

इसी तरह से धोनी द्वारा 1200 किमी साइकिल चलाकर मिलने आए फैन से न मिलने पर, जैकी ने धोनी की आलोचना की। इस मुद्दे ने काफी ट्रोलिंग और चर्चा को जन्म दिया।

 

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एससी-एसटी समुदाय के लिए आवाज

जैकी यादव पर कई बार आरोप लगे हैं कि वह सिर्फ एससी-एसटी समुदाय के लिए लिखते हैं। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि वह उन लोगों की आवाज उठाते हैं जिनका उत्पीड़न होता है। शुरुआत में इन्हीं समुदायों ने उनका समर्थन किया था, जिससे उनका जुड़ाव मजबूत हुआ।

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