“यह हिंदुस्तान है, बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार काम करेगा”, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव ने दिया बयान

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 09 दिसम्बर 2024, 05:30 AM Updated: 09 दिसम्बर 2024, 05:30 AM
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Judge Shekhar Yadav VHP Event: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव (Allahabad High Court Justice Shekhar Yadav) ने रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया है। उन्होंने कहा, “यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार काम करेगा।” इस बयान ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बहस छेड़ दी है। जस्टिस यादव का यह बयान एक तरह से भारत के बहुसंख्यक समाज के अधिकारों और उनकी इच्छाओं को प्राथमिकता देने की बात करता है, जो कि संविधान और न्याय व्यवस्था के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।

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जस्टिस शेखर यादव का बयान- Judge Shekhar Yadav VHP Event

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस शेखर यादव ने कहा, ‘मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार काम करेगा। यह कानून है। आप यह नहीं कह सकते कि आप हाईकोर्ट के जज के तौर पर यह कह रहे हैं। दरअसल कानून बहुसंख्यकों के हिसाब से काम करता है। इसे परिवार या समाज के संदर्भ में देखें। केवल वही स्वीकार किया जाएगा जिससे बहुसंख्यकों का कल्याण और खुशहाली होगी।’

हिंदू धर्मग्रंथों में महिलाओं को देवी के तौर पर पूजते- जस्टिस शेखर

जस्टिस शेखर यादव ने कहा, “आप उस महिला का अपमान नहीं कर सकते, जिसे हमारे शास्त्रों और वेदों में देवी के रूप में पूजा जाता है। आप चार पत्नियां रखने, हलाला करने या तीन तलाक देने का अधिकार नहीं मांग सकते।” उन्होंने इस मुद्दे पर यह भी कहा कि महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार न देना और उन्हें सामाजिक और कानूनी अधिकारों से वंचित करना एक गंभीर समस्या है, जिसका जल्द से जल्द समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) वह रास्ता नहीं है, जिसे वीएचपी, आरएसएस या हिंदू धर्म स्वीकार करता है। इसके अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका का भी जिक्र किया, जो ऐसे मुद्दों पर न्याय की बात करता है।

राजा राम मोहन राय का उदाहरण

जस्टिस शेखर यादव ने राजा राम मोहन राय का उदाहरण देते हुए बताया कि हिंदू धर्म में भी बाल विवाह, सती प्रथा और बालिका हत्या जैसी कई सामाजिक बुराइयां थीं, जिन्हें खत्म करने के लिए सुधारकों ने संघर्ष किया। राजा राम मोहन राय जैसे महान सुधारकों ने समाज में सुधार लाने के लिए लगातार काम करना जारी रखा। इस संदर्भ में उन्होंने मुस्लिम समुदाय का उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम समाज में हलाला, तीन तलाक और गोद लेने से जुड़ी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए कोई गंभीर पहल नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि समाज को इन प्रथाओं के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और इनमें सुधार के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति शेखर ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई समाज खुद में सुधार नहीं करता है, तो वह अपनी प्रगति में बाधा डालता है और समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों का हनन करता है।

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