इस VIP पेड़ की 24 घंटे की जाती है सुरक्षा, इसका सालाना खर्चा आता है करीब 15 लाख रुपये!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 14 फ़रवरी 2021, 05:30 AM Updated: 14 फ़रवरी 2021, 05:30 AM
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आप कई तरह के वीआईपी लोगों के बारे में तो सुना ही होगा, जिनके साथ बॉडीगार्ड रहते हैं. इसके अलावा राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री या फिर कोई अन्य नेताओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस या अन्य सुरक्षा बल भी चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं, लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे पेड़ के बारे में सुना है जिसकी सुरक्षा 24 घंटे की जाती है.

जी हां, हम बात कर रहे हैं एक ऐसे वीआईपी पेड़ की जिसकी 24 घंटों तक सुरक्षा की जाती है. भले ही ये जानकर आपको थोड़ा अटपटा लग रहा हो, लेकिन ये एकदम सच है. आइए आपको बताते हैं कि आखिर ऐसा क्या खास है इस पेड़ में जो इसकी सुरक्षा की जाती है…

4 से 5 सुरक्षा बल करते हैं 24 घंटे निगरानी

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और विदिशा के बीच सलामतपुर की पहाड़ पर ये पेड़ है, इसकी सुरक्षा के लिए पुलिस के 4 या 5 सुरक्षा बल तैनात रहते हैं और वो 24 घंटे इस पेड़ की निगरानी करते हैं.

पेड़ के लिए खर्च होते हैं करीब 15 लाख रुपये

सांची नगरपालिका की तरफ से इस पेड़ की सिचाई के लिए पानी का टैंकर आता है. वहीं, इस पेड़ की जांच के लिए कृषि विभाग के अधिकारी भी यहां हर सप्ताह आते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस पेड़ के रखरखाव पर हर वर्ष 12 से 15 लाख रुपये खर्च होते हैं.

यहां के राष्ट्रपति ने लगाया था ये पेड़

बोधि वृक्ष नामक ये वीआईपी पेड़ पीपल का है. श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे साल 2012 में जब भारत का दौरा करने आए थे, तब उनके द्वारा ये पेड़ लगाया गया था.

ईसा से 531 साल पूर्व बोधि वृक्ष के नीचे ही बुद्ध भगवान को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. इस वृक्ष को बौद्ध धर्म में काफी खास माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने अपने बेटी संघमित्रा और बेटे महेंद्र को बोधि वृक्ष की एक टहनी देकर श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए  भेजा था और फिर उन्होंने श्रीलंका के अनुराधापुरा में ये बोधि वृक्ष लगाया था, जो वहां आज भी मौजूद है.

आपको जानकारी के लिए बता दें कि भगवान बुद्ध को जिस बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था, असलीयत में वो पेड़ बिहार के गया जिले में मौजूद है, जिसे बहुत बार नष्ट करने की कोशिश की गई लेकिन ये किसी तरह का कोई चमत्कार ही था कि यहां हर बार एक नया पेड़ उग आता था, वो बात अलग है कि ये पेड़ प्राकृतिक आपदा के चलते साल 1876 में नष्ट हो गया था, इसके बाद एक बार फिर साल 1880 में अंग्रेज अधिकारी लॉर्ड कनिंघम ने श्रीलंका के अनुराधापुरम से बोधि वृक्ष की शाखा मंगई और उसे बोधगया में स्थापित कराया था. उस दिन से आज तक ये वृक्ष वहां मौजूद है.

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