Trending

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के पीछे की कहानी, उनके पोते की जुबानी!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 07 Nov 2023, 12:00 AM | Updated: 07 Nov 2023, 12:00 AM

1995 में, आखिरी बड़ी सियासी हत्या बेअंत सिंह की मानी जाती है, जिनकी हत्याओं शुरुआत कुछ दशकों पहले हो गए थी, जिसमें केसरी अख़बार के मालिक की हत्या हुई, जनरल वैद्य को मारा गया था. 1992 में, बेअंत सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे, उस समय खालिस्तानी अलगाववादियों ने पंजाब में अस्थायी स्थिति पैदा कर दी थी. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ने कहा था कि “पंजाब के मुख्‍यमंत्री के रूप में सरदार बेअंत सिंह ने राज्‍य में सामान्‍य स्थिति बहाली के लिए कड़े संघर्ष किए”. इस बात से झुटलाया नहीं जा सकता कि जब पंजाब के काफी बुरे हालात थे, जब बेअंत सिंह ने पंजाब में शांति के लिए संघर्ष किए थी. बेअंत सिंह जी राजनीति में आने से पहले सेना में थे, दो साल सेना में सेवा करने के बाद इन्होने राजनीति और सामाजिक कार्यों की तरफ अपना मुख कर लिया था.

दोस्तों, आईये आज हम आपको बेअंत सिंह की मौत के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बताएंगे जिनसे काफी लोग वाखिफ नहीं होने.

और पढ़ें : पंजाब के इन 3 हिंदू मुख्यमंत्रियों को जनता ने भुला क्यों दिया? 

बेअंत सिंह की मौत की कहानी 

लल्लनटॉप के एक इंटरव्यू में बेअंत सिंह के पोते ने बेअंत सिंह की मौत के बारे में कुछ ऐसी बताएं बताई है, जिनसे बहुत लोग वाखिफ नहीं होंगे. जब उस इंटरव्यू में उनके पोते से पूछ गया कि बेअंत सिंह की मौत के समय आप कितने साल के थे तो उन्होंने बताया कि वह 20 साल के थे.

और ध्यान देने की बात है कि जब बेअंत सिंह की मौत हुई थी तो उनके पोते भी वहीं सविचालय में मौजूद थे. बेअंत सिंह के पोते ने कहा कि “बेअंत सिंह जी ने बहुत मुश्किल दौर से पंजाब को बहार निकाला था, वह 9 साल कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहे, और वो हर उस घर में जाते थे, जहाँ किसी की मौत हो जाती थी. जिन लोगो को आतंकवादियों का शिकार होना पड़ता था बेअंत सिंह जी उनके घर जाते थे”

बेअंत सिंह के पोते ने अनुसार 1992 में, पंजाब के चुनाव आतंकवाद के साए में हुए थे, लेकिन बेअंत सिंह ने बहुत बहादुरी से उस चुनाव में भाग लिया और जीते भी थे. उन्होंने 2 साल के अंदर ही पंजाब की स्थति बदल दी, पंजाब में शांति आ गयी थी. धीरे-धीरे पंजाब में स्थिति काफी नार्मल होने लगी थी, बेअंत सिंह जी ने वहां के नगर-निगम और पंचायत के चुनाव भी करवाए थे, जो पिछले काफी योजनाओं से नहीं हो रहे थे. साथ ही लोकराज को भी मजबूत किया.

बेअंत सिंह का पोता उन्हें पापा जी कहते थे, बेअंत सिंह के पोते ने बताया कि जब उनकी हत्या हुई थी तो मैं उनके दफतर में था, जब हम दफ्तर में अंदर बैठे थे तो बहुत तेज़ धमाके की आवाज आई, हमने खिड़की से देखा तो कुछ गाड़ियाँ जल रही थी. हम निचे आए और देखा बेअंत सिंह की गाड़ी पूरी तरह जल गयी थी और उनके निजी स्टाफ की डेडबॉडी भी वही पड़ी हुई थी. कुछ समय तक हमे समझ ही नहीं आया कि पापा जी कहा है, एक घंटे के बाद पता चला कि उस धमाके में उनकी भी मौत हो गयी थी.

और पढ़ें : बीसीसीआई के गठन में था पंजाब के इस महाराजा का योगदान – भूपिंदर सिंह 

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2025- All Right Reserved. Designed and Developed by  Marketing Sheds