Dakshayani Velayudhan: दलित समाज की पहली ग्रेजुएट, जिसने विद्रोह को आवाज़ और संविधान को आत्मा दी
Dakshayani Velayudhan: सोचिए एक ऐसा वक्त जब किसी लड़की का स्कूल जाना गुनाह था, उसका ऊपरी वस्त्र पहनना बगावत मानी जाती थी, और उसका बोलना… बस बर्दाश्त से बाहर। अब सोचिए, उसी दौर में एक लड़की न सिर्फ पढ़ी, बल्कि देश की संविधान सभा तक पहुंच गई। उसने संसद में खड़े होकर वो कहा, जो...
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