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Montello Italy Sikh Memorial: इटली को नाजियों से बचाने वाले सिख सैनिकों की बहादुरी का किस्सा, जहाँ आज भी क्यों पूजे जाते हैं सिख सैनिक?

Shikha Mishra | Nedrick News Italy Published: 12 Mar 2026, 05:59 AM | Updated: 12 Mar 2026, 06:01 AM

Montello Italy Sikh Memorial: दक्षिण यूरोप का एक खूबसूरत देश ईटली, वैसे तो क्षेत्रफल में काफी छोटा है, लेकिन इसने सिखों के एक महान इतिहास को खुद में समेटा हुआ है। कनाडा और ब्रिटेन के बाद ईटली एक देश है, जहां पर सिखों ने अपना अधिपत्य जमाया हुआ हैष सिखों ने न केवल यहां कृषि पर अपनी छाप छोड़ी है बल्कि डेयरी प्रोडक्ट के व्यापार पर सिखो का एकछत्र राज चलता है, लेकिन सिखो को ईटली में ये सम्मान इतनी आसानी से नहीं मिला है, उसके लिए सिखों ने बड़ी कीमत चुकाई है।

वो कीमत, जिसके लिए ईटली हमेशा सिखों का शुक्रगुजार रहेगा.. सिखों की सफलता के बीच मौजूद है सिखों के बलिदान की कहानी कहता एक क्षेत्र मोन्टेलों.. जहां विश्वयुद्ध के दौरान सिख सैनिको ने इटली को नाजियो से बचाने के लिए अपनी जान की बाजी तक लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, ईटली के एक गांव में आज भी सिख सैनिकों को सम्मान पूर्वक पूजा जाता है। अपने इस लेख में हम मोंटेलो में मौजूद उस स्मारक के इतिहास को जानेंगे, जिसके कारण सिखों को वहां पूजा जाता है।

कहां है मोंटेलो

मोंटेलो असल में एक हिली एरिया है, एक आकड़ो की माने तो दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिन के भेजे गए 50000 से भी ज्यादा सैनिक भारतीय थे, जिसमें से 23722 सैनिक शहीद हुए थे और इनमें 5782 सैनिको ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। इटली के फोरली में मौजूद है सिख वॉर मेमोरियल, जिन्हें फोरली श्मशान स्मारक भी कहा जाता है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1943 से लेकर 1945 के बीच यहां करीब 800 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे और उनकी शहादत के सम्मान में ये स्मारक बनाया गया था, जिसमें 352 सिख सैनिक भी शहीद हुए थे। 2011 में फोरली युद्ध कब्रिस्तान में सिख सैन्य स्मारक कहा गया था। इस युद्ध में नाजियो ने इटली को जीतने के लिए चढ़ाई शुरु कर दी थी लेकिन ईटली की सुरक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़े थे भारतीय सिख सैनिक.. करीब 2 सालों का संघर्ष देखा उस वक्त सिख सैनिको ने, लेकिन भारतीय सैनिको ने इटली को नाजियो से मुक्त करा कर ही दम लिया।

नाजियो से 2 सालो का संघर्ष

जब दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था तब सितंबर 1943 में इटली ने युद्ध में आत्मसमर्पण करते हुए हथियार डाल दिये थे, जिसका फायदा उठा कर हिटलर की नाजी सेना ने ईटली पर कब्जा कर लिया। हिटलर किसी भी हाल में इटली से अपना कब्जा जाने नहीं देना चाहता था, इसके लिए उसने मुसोलिनी को आजाद कराया, और नॉर्थ में सलो रिपब्लिक नाम के एक राज्य की स्थापना की, ताकि ईटली नाजियों के अधीन रहे। लेकिन ब्रिटेन की सेना ने इटली क आजाद कराने के लिए जंग छेड़ दी।

करीब 2 सालो तक नाजियो ने ईटली पर कब्जा कर रखा था लेकिन भीतर ही भीतर उत्तरी इटली की राष्ट्रीय मुक्ति समिति (सीएलएनएआई) ने जर्मनी के नाजी वाले कब्जे और इतालवी सामाजिक गणराज्य के खिलाफ आम विद्रोह की घोषणा कर दी थी, जो धीरे धीरे व्यापक होने लगा और 25 अप्रैल 1945 में दूसरा विश्वयुद्ध के अंत के साथ ही इटली की गुलामी का भी अंत हो गया। इस विद्रोह में ब्रिटेन के सैनिको ने भी अहम योगदान दिया और नाजियों को कमजोर करके उन्हें इटली छोड़ने पर मजबूर करने में भी मदद मिली। विद्रोह का केवल एक ही ध्येय था, या तो नाजियों को समर्पण करने को कहा गया या फिर मरने के लिए। हालांकि ये इतना बड़ा था कि ज्य़ादातर नाजियो ने समपर्ण का रास्ता चुना।

इटली के वो गांव जहां दिया जाता है सम्मान

आज भी इटली के तेओदोसियों और कसोला वाल्सेनियो नाम के दो प्रसिद्ध गांव है जहां विश्वयुद्द के दौरान मारे गए सिख सैनिकों की शहादत में हर साल 6 नवंबर को उनके सम्मान में विशेष आयोजन किया जाता है, जो कि नाजियो के खिलाफ लड़ने वाले सिख सैनिकों को याद करके कार्यक्रम किया जाता है। इन गांवो में सिख समुदाय भी अच्छी खासी संख्या में रहते है। जो सिक्खी की लौ को तेजी से प्रकाशित कर रहे है।

इटली की आजादी में जितना योगदान वहां की आम जनता का रहा, उतना ही योगदान उन सैनिकों का भी रहा जो इटली की सुरक्षा के लिए लड़ रहे थे। कई भारतीय जवानों के साथ सिख सैनिकों ने भी इस युद्ध में बलिदान दिया…जिसे इटली ने कभी नहीं भुलाया। वो आज भी उन जवानों को पूरा सम्मान देते है, उनकी ही याद में ईटली के कई नगरो में मेमोरियल बनाये गए है। जहां आज भी हर साल जवानो को श्रद्धांजलि दी जाती है। ईटली एक ऐसा देश है, जिसने अपने सभी मित्रों को पूरा सम्मान दिया, और उनके सेनिको को भी। इटली ने सिख जवानो के लिए जो सम्मान और भावना व्यक्त की है उसे देखकर हर एक सिख का सिर गर्व से उंचा उठ जाता है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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