Upkar movie history: सिर्फ 24 घंटे की मेहनत और बन गई ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर, उपकार फिल्म के पीछे की रोचक कहानी

Shikha Mishra | Nedrick News Mumbai Published: 24 Mar 2026, 12:13 PM | Updated: 24 Mar 2026, 12:13 PM

Upkar movie history: हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई देशभक्ति से जुड़ी फिल्में बनी लेकिन जो फिल्म भारत कुमार के नाम से फेमस मनोज कुमार ने बनाई, वो हमेशा याद की जाती है.. उनकी क्रांति हो या पूरब पश्चिम..सब की सब देशभक्ति से सराबोर रही थी…यानि की देश भक्ति की लौ उनके अंदर कितनी मजबूत होगी उनकी फिल्मों से अंदाजा लगाया जा सकता है लेकिन क्या आप सोच सकते है कि मनोज कुमार एक ऐसा फिल्म भी बना सकते है जो मात्र 24 घंटे में लिखी गई हो..

और वो भी ऐसे समय पर जब देश 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध से जूझ रहा था..लेकिन दिल्ली की उनकी उस यात्रा ने सब बदल दिया जब उनकी मुलाकात दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से हुई थी… अपने इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर कैसे 24 घंटे के अंदर ही मनोज कुमार ने उस ऐतिहासिक फिल्म की कहानी लिख दी थी जिसने एक नही..दो नहीं बल्कि 7 नेशनल अवार्ड जीता था। क्या था इस फिल्म का दूसरे पीएम लाल बहादुर शास्त्री से रिश्ता, और कौन सी थी वो ऐतिहासिक फिल्म।

साल 1965 की बात है, मनोज कुमार ने अपनी फिल्म शहीद की स्क्रिनिंग दिल्ली में रखी थी.. ये फिल्म शहीद भगत सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म थी जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी पहुंचे थे। देशभक्ति फिल्मों के प्रति मनोज कुमार का जूनून देखकर शास्त्री जी ने उनके दिये नारे जय जवान, जय किसान को लेकर एक फिल्म बनाने की सलाह दी..जिसमें वो चाहते थे कि केवल देश की सीमा पर लड़ने वाले जवानों की नही बल्कि देश के अंदर रह कर उन योद्धाओ की भी कहानी पर्दे पर दिखाई जाये, जिन्हें हम आप किसान कहते है।

वो चाहते थे कि एक ऐसी फिल्म बने जिसमें सेना के जवान और देश के किसान दोनो के बलिदान, उनकी मेहनत और जज्बें की कहानी को एक साथ दिखाया जाये। 1 जनवरी 1965 को शहीद रीलिज हुई थी और बड़ी हिट हुई थी..इसलिए देशभक्ति से जुड़ी फिल्में लोगो को पसंद आ रही थी… लेकिन शास्त्री जी की ये इच्छा मनोज कुमार के दिल में घर कर गई। वो इस बारे में सोचते हुए मुम्बई ट्रेन से ही रवाना हो गये, और साथ ही इस सफर में उन्होंने फिल्म का प्लॉट और उसकी कहानी आधी लिख भी डाली थी। जिसे उन्होंने घर पहुंचते ही पूरा कर लिया.. यानि की मात्र 24 घंटे के अंदर कहानी तैयार हुई एक ब्लॉकबस्टर फिल्म उपकार की।

1965 में जब उन्होंने कहानी लिखी तब उन्होंने ये नहीं सोचा था कि उन्हें 1965 का वॉर भी इसका हिससा बनाना पड़ेगा। फिल्म शुरु हुई तो अगस्त 1965 में भारत पाकिस्तान वॉर शुरु हो गया.. जो कि सितंबर 1965 तक चला था। किसान की कहानी तो पहले तैयार थी अब जवान की कहानी फाइनल हो गई। फिल्म उपकार 1965 वॉर से प्रेरित फिल्म कहलाई.. मनोज कुमार चाहते थे कि वो इस फिल्म में राजेश खन्ना को लीड लें, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और आखिरकार मनोज कुमार ने खुद एक्टिंग और डायेरेक्शन की कमान संभाल ली।

मनोज कुमार के अलावा  फिल्म में आशा पारेख, प्रेम चोपड़ा, प्राण, कामिनी कौशल और मदन पुरी  और प्राण साहब को कास्ट किया गया। फिल्म की कहानी एक ऐसे किसान की है जो खेतो में फसल उगाता है और वक्त आने पर देश के लिए लड़ने चला जाता है। फिल्म के गाने लिखे थे कमर जलालाबादी, इंदीवर, गुलशन बावरा और प्रेम धवन  ने तो वहीं कल्याण जी – आनंद जी ने संगीत दिया था। इसका लिखा मेरे देश की धरती गाना आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के मौके पर बजता है।

11 अगस्त 1967 को उपकार बॉक्स ऑफिस पर रीलिज हुई और रीलिज होते ही इसने कई रिकॉर्ड तोड़ दिये।  उपकार को 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट स्टोरी, बेस्ट डायलॉग के लिए मनोज कुमार को, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर  के लिए प्राण साहब को, बेस्ट गीतकार के लिए गुलशन बावरा,  और बेस्ट एडिटिंग का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला..वहीं इस फिल्म को सेकेंड बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवार्ड भी मिला था। किसी ने नहीं सोचा था कि जल्दबाजी में लिखी ये फिल्म इतना बड़ा कमाल करेगी।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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