Maha Kumbh 2025: महाकुंभ पर नकारात्मक रिपोर्टिंग की साजिश? नेता और मीडिया मुग़ल पर उठे सवाल!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 03 फ़रवरी 2025, 05:30 AM Updated: 03 फ़रवरी 2025, 05:30 AM
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Maha Kumbh 2025: हाल ही में FrustIndian के संपादक अनुपम के. सिंह ने एक विवादास्पद दावा किया है, जिसमें उन्होंने महाकुंभ पर नकारात्मक रिपोर्टिंग के पीछे एक प्रमुख नेता और एक मीडिया मुग़ल की मिलीभगत का आरोप लगाया है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक और मीडिया जगत में हलचल मचा दी है।

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दावा: नेता और मीडिया मुग़ल की साजिश- Maha Kumbh 2025

अनुपम के. सिंह ने कहा, “मैं नाम नहीं ले रहा, लेकिन एक बहुत ही गोपनीय सूचना दे रहा हूँ। महाकुंभ पर नकारात्मक रिपोर्टिंग जिस नेता के इशारे पर की जा रही है, वो मुख्यमंत्री के अगल-बगल ही मौजूद रहता है। जिस ‘मीडिया मुग़ल’ को उसने इसके ठेका दे रखा है, वो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा सम्मानित किया जाता रहा है।”

उनके अनुसार, एक प्रमुख न्यूज़ चैनल, जिसके प्रादेशिक संस्करण के एक एंकर के सभी राष्ट्रवादी फैन हैं, महाकुंभ में भगदड़ को लेकर रिपोर्टिंग में “प्रपंच की पराकाष्ठा” को पार कर रहा है।

पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल

सिंह ने पत्रकारों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “आपको अधिकारियों से सवाल करना है तो कीजिए, लेकिन पुलिसकर्मियों के कार्य में व्यवधान डालना और उनके मुँह में माइक ठूँसना बंद कीजिए।” उन्होंने विशेष रूप से एक पत्रकार, विपिन चौबे, का उल्लेख किया, जो वहां तैनात हैं और जिन पर श्रद्धालुओं की लाशों और मृतकों के परिजनों की चीत्कारों से टीआरपी बटोरने का आरोप लगाया।

सिंह ने सवाल उठाया कि 150 लाशों की बात कहाँ से आई? तथ्य कहाँ हैं? उन्होंने कहा, “नहीं हैं तो फ़र्ज़ी ख़बर क्यों? कार्रवाई होगी तो ये ‘प्रेस फ्रीडम’ का रोना रोने लगेंगे।”

महामंडलेश्वर का समर्थन

जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने प्रशासन की तारीफ करते हुए कहा कि प्रशासन पूरी तरह से चाक-चौबंद है। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ के बावजूद संतों और आमजनों को सुचारु व्यवस्था के साथ स्नान कराया गया और स्थिति पूर्ववत नियंत्रण में आई।

नेता और पत्रकार पर आरोप

अनुपम के. सिंह ने अपने बयान में दो व्यक्तियों का उल्लेख किया है – एक नेता और एक दिग्गज पत्रकार। उन्होंने कहा, “दोनों ही भाजपा और राष्ट्रवादी समूह के प्रिय। लेकिन, पर्दे के पीछे से खेल कुछ और चल रहा है।”

अनुपम के. सिंह के इन दावों ने मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके आरोप गंभीर हैं और इनकी सत्यता की जांच आवश्यक है। यह देखना बाकी है कि संबंधित पक्ष इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या कोई आधिकारिक जांच शुरू होती है।

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